SC Updates: 'हिंदुत्व' शब्द को 'भारतीय संविधानवाद' से बदलने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की जनहित याचिका
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा, संविधान की प्रस्तावना में धर्मनिरपेक्ष और समाजवाद शब्दों को पश्चिमी नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। जस्टिस खन्ना ने कहा कि समाजवाद का अर्थ यह भी हो सकता है कि अवसरों की समानता हो और देश की संपत्ति का समान वितरण हो। धर्मनिरपेक्ष शब्द के साथ भी यही बात है। शीर्ष अदालत बलराम सिंह, भाजपा नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी व अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। याचिकाओं में 1976 में 42वें संशोधन के जरिये संविधान की प्रस्तावना में शामिल किए गए दो शब्द धर्मनिरपेक्ष और सामाजवाद को हटाने की मांग की है। याचिकाओं में कहा गया है कि ये दोनों शब्द 1949 में तैयार किए गए संविधान के मूल प्रस्तावना में नहीं हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
पूछा-भारत धर्मनिरपेक्ष हो, आप नहीं चाहते...
जस्टिस खन्ना ने याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विष्णुशंकर जैन से सवाल किया, क्या आप नहीं चाहते हैं कि भारत धर्मनिरपेक्ष हो? इस पर अधिवक्ता जैन ने कहा, हम यह नहीं कह रहे हैं कि भारत धर्मनिरपेक्ष नहीं है। हम इस संशोधन को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने कहा था कि समाजवाद शब्द को शामिल करने से व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अंकुश लगेगा।
सुप्रीम कोर्ट का TPSC की परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार
नोटा का इस्तेमाल रोकने वाले प्रावधान के खिलाफ अर्जी पर केंद्र, आयोग को नोटिस
हाईकोर्ट जजों की चिंताजनक सोच से न्यायपालिका की छवि को नुकसान
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को देश के विभिन्न हाईकोर्ट के जजों की सोच पर चिंता जताते हुए कहा कि वे न्यायपालिका की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस पीके मिश्रा ने कहा, यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है और आश्चर्य जताया कि हाईकोर्ट के जजों पर शीर्ष अदालत का बहुत कम प्रभाव पड़ता है। उसके निर्णयों को लगातार नजरअंदाज किया जाता है।
शीर्ष अदालत उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप लगाया था कि गुजरात हाईकोर्ट के जज ने 1 मार्च, 2023 को वकील की दलीलें सुनने के बाद आदेश नहीं सुनाया था और हाईकोर्ट के आईटी सेल ने एक साल बाद 30 अप्रैल, 2024 को याचिकाकर्ता को एक तर्कपूर्ण आदेश की सॉफ्ट कॉपी दी थी। पीठ ने कहा, गुजरात उच्च न्यायालय ने इस मामले में कानून का घोर उल्लंघन किया है। हाईकोर्ट के जज काम का बोझ होने के बावजूद, विपरीत परिस्थितियों में सराहनीय प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन ऐसी घटनाएं न्यायिक प्रणाली को बदनाम कर रही हैं और पूरी न्यायपालिका की छवि खराब कर रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र से कहा कि वह 2002 के गुजरात दंगों से संबंधित बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर पिछले वर्ष प्रतिबंध लगाने के अपने फैसले से जुड़े मूल रिकॉर्ड तीन सप्ताह के भीतर पेश करे। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली वरिष्ठ पत्रकार एन. राम, तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, मानवाधिकार कार्यकर्ता वकील प्रशांत भूषण और वकील एमएल शर्मा की याचिका पर केंद्र को याचिकाओं पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। पीठ ने याचिकाकर्ताओं को उसके बाद दो सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने की अनुमति दी। न्यायालय ने मामले की अंतिम सुनवाई जनवरी, 2025 में निर्धारित की है। पीठ ने कहा, "इस मामले पर विचार करने की आवश्यकता है। इसका निपटारा 10 मिनट में नहीं किया जा सकता है।"
साथ ही पीठ ने केंद्र से कहा कि वह फैसले के मूल रिकॉर्ड पेश करने को लेकर न्यायालय के फरवरी 2023 के निर्देश का पालन करने को कहा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने जवाब दाखिल नहीं किया है और इसके लिए दो सप्ताह का समय चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने ऋण वसूली अधिकरण (डीआरटी) के आदेशों के आधार पर वसूली गई राशि का डाटा मांगने पर वित्त मंत्रालय को कड़ी चेतावनी दी और स्पष्टीकरण मांगा। जस्टिस अभय एस ओका और ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि मंत्रालय न्यायिक कर्मचारियों को अपनी अधीनता में नहीं ले सकता और ऐसा विशाल डाटा तीन दिनों के भीतर उचित नहीं है।
पीठ ने कहा, आप न्यायिक कर्मचारियों को अपने अधीन मान रहे हैं। हम सरकार से माफी की उम्मीद करते हैं। अगर आपको डाटा एकत्र करने की आवश्यकता है, तो डीआरटी के लिए अतिरिक्त स्टाफ प्रदान किया जाना चाहिए। ऐसा व्यवहार सहन नहीं किया जाएगा। इनमें से कुछ न्यायिक अधिकारी हैं, जिन्हें आप अपने अधीनस्थ मान रहे हैं।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.