SC: 'सियासी प्रतिद्वंद्विता में कानून का इस्तेमाल नहीं'; झारखंड के DGP अनुराग गुप्ता के केस में सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता की नियुक्ति को चुनौती देने वाली अवमानना याचिकाओं पर विचार करने से इन्कार कर दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को निपटाने के लिए अवमानना अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई ने कहा, झारखंड मामले में, हम नहीं चाहते कि अवमानना अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल राजनीतिक बदला लेने के लिए किया जाए। अगर आपको किसी विशेष नियुक्ति से कोई समस्या है तो कैट (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) जाएं। मैं बार-बार कहता रहा हूं कि अगर आपको अपना राजनीतिक बदला लेना है तो मतदाताओं के पास जाएं। इस टिप्पणी के साथ ही सीजेआई की पीठ ने अखिल भारतीय आदिवासी विकास समिति झारखंड और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी की अवमानना याचिका पर विचार करने से मना कर दिया। सीजेआई ने कहा, जनहित याचिका तंत्र वंचित वर्गों को न्याय तक पहुंच प्रदान करने के लिए तैयार किया गया था। यह प्रतिस्पर्धी अधिकारियों के बीच पदोन्नति या नियुक्तियों को चुनौती देने का साधन नहीं हो सकता।
महाराष्ट्र चुनाव 2024 में अनियमितताओं पर बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला बरकरार, सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने 2024 महाराष्ट्र चुनावों में फर्जी मतदान और अनियमितताओं के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर चेतन चंद्रकांत अहिरे की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने अहिरे की याचिका को निराधार और कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग बताया था। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की खंड ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में कोई खामी नजर नहीं आती। हाईकोर्ट ने सही ढंग से मामले की विवेचना की और उचित निष्कर्ष निकाला है। मुंबई-विक्रोली निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता अहिरे ने दावा किया था कि मतदान के दिन, 20 नवंबर, 2024 को शाम 6 बजे के बाद लगभग 76 लाख वोट अवैध रूप से डाले गए थे। एक आरटीआई जवाब का हवाला देते हुए तर्क दिया कि समय सीमा के बाद के वोटों के लिए कोई आधिकारिक डाटा मौजूद नहीं है। अहिरे ने सभी 288 विधानसभा क्षेत्रों के परिणामों को रद्द करने, विजयी उम्मीदवारों के चुनाव प्रमाण पत्र वापस लेने और ईवीएम की जगह मतपत्रों पर वापस लौटने की भी मांग की थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 25 जून को रिट याचिका को खारिज करते हुए इसे कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग बताया था। अदालत ने कहा था कि मुंबई निवासी चेतन चंद्रकांत अहिरे की याचिका में कानूनी योग्यता, सार और अधिकारिता का अभाव है। अहिरे ने न तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत चुनाव याचिका दायर की और न ही चुनाव आयोग (ईसीआई) को कोई पूर्व प्रतिनिधित्व दिया।
सुप्रीम कोर्ट अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ और एफएसडीएल के बीच 11 इंडियन सुपर लीग क्लबों के भविष्य को लेकर उठे विवाद से जुड़े मामले की सुनवाई 22 अगस्त को करेगा। यह विवाद राष्ट्रीय महासंघ और टूर्नामेंट के आयोजकों के साथ उनके अनुबंधों का नवीनीकरण न होने के कारण हुआ है। 11 इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) क्लबों ने अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) को चेतावनी दी है कि अगर शीर्ष स्तरीय घरेलू प्रतियोगिता के भविष्य को लेकर चल रहा गतिरोध जल्द ही नहीं सुलझाया गया, तो उनके पूरी तरह से बंद होने की संभावना है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ को न्यायमित्र गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि अनुबंध की अवधि के दौरान, फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) को आईएसएल का आयोजन करके इसका सम्मान करना होगा। अगर ऐसा नहीं होता है, तो एआईएफएफ को अनुबंध समाप्त करने और निविदा जारी करने का निर्देश दिया जाना चाहिए। अन्यथा खिलाड़ियों को नुकसान होगा और बार-बार भुगतान न करने पर फीफा हम पर जुर्माना लगा सकता है। इसके बाद पीठ याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई। क्लबों ने पिछले सप्ताह एआईएफएफ अध्यक्ष कल्याण चौबे को एक पत्र लिखा था, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय महासंघ और आईएसएल आयोजकों, एफएसडीएल के बीच मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) के नवीनीकरण न होने से उत्पन्न संकट ने "भारत में पेशेवर फुटबॉल को पंगु बना दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट के 2022 के आदेश को बरकरार रखा जिसमें दादरा नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासक प्रफुल खोड़ा पटेल सहित नौ लोगों के खिलाफ 2021 में सांसद मोहन देलकर को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में दर्ज आपराधिक मामला रद्द कर दिया गया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने मृतक के बेटे अभिनव मोहन देलकर द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए यह आदेश सुनाया। दादरा और नगर हवेली से सात बार सांसद रहे 58 वर्षीय देलकर 22 फरवरी, 2021 को दक्षिण मुंबई के मरीन ड्राइव स्थित एक होटल के कमरे में मृत पाए गए थे। एक सुसाइड नोट के आधार पर, पटेल और आठ अन्य लोगों पर मार्च 2021 में मुंबई पुलिस ने कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने और देलकर को आपराधिक धमकी देने का मामला दर्ज किया था। मृतक के पुत्र अभिनव डेलकर ने 9 मार्च, 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के 105 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को बंद करने के फैसले के खिलाफ आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह की याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया। यूपी सरकार ने जिन प्राथमिक विद्यालयों में शून्य या कम नामांकन है उनका पास के दूसरे विद्यालय में विलय कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने इस बात पर गौर किया कि इसी तरह का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है। पीठ ने याचिकाकर्ता से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका को वापस लेने को कहा। याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने तर्क दिया कि सैकड़ों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। पीठ ने कहा कि यह एक स्थानीय समस्या है और अन्य राज्यों तक नहीं फैली है, इसलिए इलाहाबाद हाईकोर्ट को इसकी जांच करनी चाहिए। अदालत ने कहा कि यह मामला बच्चों के निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत वैधानिक अधिकारों के प्रवर्तन से संबंधित है। हाईकोर्ट पहले से ही इस मामले पर विचार कर रहा है, इसलिए बेहतर होगा कि वह इस पर निर्णय ले। अदालत ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की छूट दी और मामले का शीघ्र निपटारा करने के लिए कहा। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस वर्ष जून में 105 स्कूलों को बंद करने का निर्णय अवैध, मनमाना और असांविधानिक था। याचिका में कहा गया कि शिक्षा का अधिकार नियमों के तहत कम से कम 300 लोगों की आबादी वाली प्रत्येक बस्ती के एक किलोमीटर के दायरे में कक्षा 1 से 5 तक के लिए प्राथमिक विद्यालय स्थापित करना अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के बैंक ऋण घोटाला मामले में डीएचएफएल के पूर्व प्रमोटर धीरज वधावन को आत्मसमर्पण के लिए दी गई समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया। मालूम हो कि 5 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने वधावन की जमानत रद्द कर दी थी और उन्हें दो हफ़्ते के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्रन शर्मा की पीठ ने आत्मसमर्पण के लिए दी गई समय सीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया और संबंधित सीबीआई और जेल अथॉरिटी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वधावन को नियमित जांच के लिए हर शनिवार को एम्स ले जाया जाए। वधावन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि वह गंभीर बीमारियों से ग्रस्त हैं। जब पीठ ने आत्मसमर्पण के लिए समय सीमा बढ़ाने पर अपनी आपत्ति जताई, तो सिब्बल ने एम्स की रिपोर्ट का हवाला दिया और कहा कि कृपया एम्स का एक बोर्ड गठित करें। इस पर जस्टिस कुमार ने टिप्पणी की कि चिकित्सा परीक्षण पहले ही हो चुका है और इस तरह की दलीलें अभी जारी हैं। इसके बाद सिब्बल ने फिर से रिपोर्टों का हवाला दिया और वधावन की चिकित्सा समस्याओं पर प्रकाश डाला। सिब्बल इस बात पर जोर देते रहे कि डॉक्टरों की रिपोर्ट बताती है कि सर्जरी की जरूरत है। हालांकि जस्टिस कुमार ने टिप्पणी की, "आप जेल जाइए। जब भी जरूरत होगी, वे आपको अस्पताल ले जाएंगे।"
सुप्रीम कोर्ट ने मिलावटी दालचीनी मामले में सुनवाई से किया इन्कार
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया, जिसमें केरल में दालचीनी के नाम पर जहरीली कसिया बेचे जाने का आरोप लगाया गया था। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि कसिया जहरीला है, इसमें साइनाइड और क्यूमरिन जैसे घातक तत्व पाए जाते हैं। यह कैंसर तक का कारण बन सकता है। याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि संबंधित अधिकारी मामले में गंभीरता से कदम नहीं उठा रहे हैं। हकीकत यह है कि दालचीनी के नाम पर जहरीली कसिया बेची जा रही है, जो लोगों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा, इस मामले पर पहले ही केरल हाईकोर्ट ने जरूरी निर्देश जारी किए हैं। हम हर चीज की निगरानी करने नहीं बैठ सकते। इसके बाद पीठ ने याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट में दायर याचिका में कसिया के आयात पर रोक लगाने और उसकी बिक्री पर पाबंदी की मांग की गई थी। तब खाद्य सुरक्षा आयुक्त की ओर से बताया गया था कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने पहले ही राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा आयुक्तों को निर्देश जारी किए हैं और बाजार पर निगरानी अभियान चलाने को कहा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल के पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को शिक्षक भर्ती से जुड़े एक मामले में जमानत दे दी। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने जमानत खारिज किए जाने के खिलाफ चटर्जी की अपील स्वीकार करते हुए पूछा कि उन्हें कितने समय तक जेल में रहना चाहिए और क्या यह सजा के बराबर नहीं है। अदालत ने उनके मामले में मंज़ूरी मिलने के बाद चार हफ्तों के भीतर आरोप तय करने का आदेश भी पारित करने का निर्देश दिया। इसके बाद दो महीने के भीतर महत्वपूर्ण गवाहों से पूछताछ करने का भी आदेश दिया। अदालत ने मामले के दो अन्य आरोपियों, सुबीरेश भट्टाचार्य और शांतिप्रसाद सिन्हा, की जमानत भी बढ़ा दी। ये दोनों कथित भर्ती अनियमितताओं के दौरान राज्य के शिक्षा निकायों में वरिष्ठ पदों पर थे। सीबीआई की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू ने दलील दी कि आरोपी तीन साल से जेल में है और मुकदमे में देरी के लिए सीबीआई जिम्मेदार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह एक घोटाला था जिसमें बड़ी संख्या में अयोग्य उम्मीदवारों को शिक्षक के पद पर नियुक्त किया गया था क्योंकि उन्होंने मंत्री और दो अन्य लोगों को रिश्वत दी थी। चटर्जी की जमानत का विरोध करते हुए सीबीआई ने कहा कि वह इस साज़िश का मास्टरमाइंड था।
पुलिस सुधारों की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट सहमत
सुप्रीम कोर्ट पुलिस सुधारों और राज्य पुलिस प्रमुखों की तदर्थ नियुक्ति से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई को तैयार हो गया। 2006 के फैसले में ऐसी नियुक्तियों पर रोक लगाई गई थी। सीजेआई जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस के विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ याचिकाकर्ता और पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह की अर्जी पर भी विचार करेगी। इसमें एक ऐसी व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है जिसमें मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की समिति पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) का चयन करे। सीजेआई ने कहा, हम सभी मुद्दों पर विचार करेंगे और याचिकाओं को सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। कुछ अवमानना याचिकाओं सहित ये अर्जियां शीर्ष अदालत के समक्ष सूचीबद्ध थीं।
इनमें 2006 के उस फैसले का पालन न करने का आरोप लगाया गया था जिसमें पुलिस प्रशासन में सुधारों को अनिवार्य बनाया गया था ताकि पुलिस बल को राजनीतिक हस्तक्षेप से बचाया जा सके। याचिकाकर्ता और पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह के वकील प्रशांत भूषण ने आग्रह किया कि डीजीपी की नियुक्ति की प्रक्रिया सीबीआई निदेशक की नियुक्ति के समान होनी चाहिए। उन्होंने नियुक्तियों के लिए तीन सदस्यीय पैनल के गठन का प्रस्ताव रखा। भूषण ने तर्क दिया, सीबीआई की तरह, राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए राज्य पुलिस प्रमुख का चुनाव एक स्वतंत्र पैनल के माध्यम से किया जाना चाहिए।