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सुप्रीम कोर्ट की खबरें: DHFL के पूर्व CMD की जमानत याचिका पर ईडी से मांगा जवाब, पढ़ें प्रमुख समाचार
Fri, 21 Oct 2022 10:46 PM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 21 Oct 2022 10:46 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुप्रीम कोर्ट ने करोड़ों रुपये के यस बैंक धोखाधड़ी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जवाब तलब किया। कोर्ट ने शुक्रवार को आरोपी दीवान हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड (डीएचएफएल) के पूर्व अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) कपिल वधावन की अंतरिम जमानत याचिका पर ईडी से जवाब मांगा।
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जस्टिस केएम जोसेफ और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की पीठ ने एजेंसी से एक सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने कहा कि प्रतिवादी के वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है। मामले को दो नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।
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वधावन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कोर्ट को बताया कि उनके मुवक्किल की पांच सर्जरी हुई थी और उन्होंने चिकित्सा आधार पर अंतरिम जमानत मांगी है। कपिल वधावन और उनके भाई धीरज वधावन को ईडी ने 14 मई को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था। सीबीआई और ईडी के मुताबिक, यस बैंक ने अप्रैल और जून 2018 के बीच डीएचएफएल के अल्पकालिक गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर में लगभग 3,700 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
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(सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : सोशल मीडिया
डॉक्टर्स पर हमलों को लेकर दायर याचिकाओं पर जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर केंद्र और अन्य से शुक्रवार को जवाब मांगा। याचिका में चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों पर हमले बढ़ने का आरोप लगाया गया है। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने दिल्ली डॉक्टर्स फोरम, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और एक चिकित्सक सुनीत कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। उपाध्याय की पत्नी एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ अर्चना शर्मा ने राजस्थान में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद भीड़ द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर केंद्र और अन्य से शुक्रवार को जवाब मांगा। याचिका में चिकित्सकों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों पर हमले बढ़ने का आरोप लगाया गया है। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने दिल्ली डॉक्टर्स फोरम, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और एक चिकित्सक सुनीत कुमार उपाध्याय द्वारा दायर याचिकाओं पर नोटिस जारी किया। उपाध्याय की पत्नी एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ अर्चना शर्मा ने राजस्थान में प्रसव के दौरान एक महिला की मौत के बाद भीड़ द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी।
फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
केन्याई नागरिक को तीन नवंबर को सजा सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय मूल के केन्याई नागरिक पेरी कंसाग्रा को दोषी ठहराए जाने के बाद सजा पर शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि वह 21 अक्तूबर को भारतीय मूल के केन्याई नागरिक को दी जाने वाली सजा पर विचार करेगा, जिसे एक बाल अभिरक्षा के मामले में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने कहा कि उसको पर्याप्त मौका दिया गया, लेकिन उसने कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होने का फैसला किया। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने तीन नवंबर को सजा पर फैसला सुरक्षित रखने से पहले बच्चे की मां की ओर से वरिष्ठ वकील सोनिया माथुर और केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलें सुनीं। सीजेआई ने कहा कि हम 3 नवंबर को फिर से इकट्ठा होंगे और आदेश पारित करेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय मूल के केन्याई नागरिक पेरी कंसाग्रा को दोषी ठहराए जाने के बाद सजा पर शुक्रवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। इससे पहले कोर्ट ने सोमवार को कहा था कि वह 21 अक्तूबर को भारतीय मूल के केन्याई नागरिक को दी जाने वाली सजा पर विचार करेगा, जिसे एक बाल अभिरक्षा के मामले में दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने कहा कि उसको पर्याप्त मौका दिया गया, लेकिन उसने कोर्ट के समक्ष पेश नहीं होने का फैसला किया। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ ने तीन नवंबर को सजा पर फैसला सुरक्षित रखने से पहले बच्चे की मां की ओर से वरिष्ठ वकील सोनिया माथुर और केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलें सुनीं। सीजेआई ने कहा कि हम 3 नवंबर को फिर से इकट्ठा होंगे और आदेश पारित करेंगे।
Supreme Court
- फोटो : ANI
केरल के छात्र की याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अर्जी एक मां की ओर से दायर की गई थी, जिनका बेटा कानून का छात्र है। उसे असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए केरल के एक कानून के तहत पिछले चार महीने से हिरासत में रखा गया है। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि महिला जिसका बेटा हिरासत में है, उनका वकील अपने इस तर्क को साबित करने में विफल रहा कि राज्य सलाहकार बोर्ड ने नजरबंदी के खिलाफ उनके मामले का समर्थन किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। अर्जी एक मां की ओर से दायर की गई थी, जिनका बेटा कानून का छात्र है। उसे असामाजिक गतिविधियों की रोकथाम के लिए केरल के एक कानून के तहत पिछले चार महीने से हिरासत में रखा गया है। चीफ जस्टिस उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि महिला जिसका बेटा हिरासत में है, उनका वकील अपने इस तर्क को साबित करने में विफल रहा कि राज्य सलाहकार बोर्ड ने नजरबंदी के खिलाफ उनके मामले का समर्थन किया था।
ताजमहल
- फोटो : iStock
कोर्ट ने ताजमहल के संबंध में दायर याचिका खारिज की
उच्चतम न्यायालय ने ताजमहल के इतिहास और स्मारक के परिसर में 22 कमरों को खोलने की तथ्यात्मक जांच कराने की मांग से जुड़ी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने इसे प्रचार हित याचिका करार दिया। जस्टिस एमआर शाह और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें याचिका खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करने में गलती नहीं की है। यह एक प्रचार हित याचिका है। इसे खारिज किया जाता है।
उच्चतम न्यायालय ने ताजमहल के इतिहास और स्मारक के परिसर में 22 कमरों को खोलने की तथ्यात्मक जांच कराने की मांग से जुड़ी याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। कोर्ट ने इसे प्रचार हित याचिका करार दिया। जस्टिस एमआर शाह और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें याचिका खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करने में गलती नहीं की है। यह एक प्रचार हित याचिका है। इसे खारिज किया जाता है।
सु्प्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
केंद्र सरकार की एक याचिका पर NGO को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की एक याचिका पर गैर सरकारी संगठन (NGO) कामन काउज को नोटिस जारी किया। याचिका में कोर्ट के आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। दरअसल, आदेश में सरकार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को बढ़ाने से रोक दिया गया था। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि जारी किया गया नोटिस को सात नवंबर तक वापस लिया जा सकता है। नोटिस को अधवक्ता प्रशांत भूषण ने स्वीकार किया।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की एक याचिका पर गैर सरकारी संगठन (NGO) कामन काउज को नोटिस जारी किया। याचिका में कोर्ट के आदेश में संशोधन की मांग की गई थी। दरअसल, आदेश में सरकार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को बढ़ाने से रोक दिया गया था। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस बीवी नागरत्ना की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि जारी किया गया नोटिस को सात नवंबर तक वापस लिया जा सकता है। नोटिस को अधवक्ता प्रशांत भूषण ने स्वीकार किया।
court new
- फोटो : istock
मसूदपुर श्मशान घाट पर हाई कोर्ट का फैसला खारिज किया
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें मसूदपुर गांव में 100 साल से अधिक पुराने श्मशान को किशनगढ़ स्थानांतरित करने का निर्देश देने वाले अपने दिसंबर 2003 के फैसले को संशोधित करने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) को एक साल के भीतर श्मशान को आधुनिक इलेक्ट्रिक श्मशान में बदलने के लिए कदम उठाने के लिए कहा, जो ग्रामीणों के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों के निवासियों के बड़े हित में होगा।
हाई कोर्ट के दिसंबर 2016 के फैसले के खिलाफ एसडीएमसी द्वारा दायर एक अपील पर जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने अपना फैसला सुनाया। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), वसंत कुंज द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अपने दिसंबर 2003 के आदेश में नगर निगम को भूमि पर कब्जा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि किशनगढ़ की जगह को श्मशान के रूप में उपयोग करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था करें।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें मसूदपुर गांव में 100 साल से अधिक पुराने श्मशान को किशनगढ़ स्थानांतरित करने का निर्देश देने वाले अपने दिसंबर 2003 के फैसले को संशोधित करने से इनकार कर दिया था। शीर्ष अदालत ने दक्षिण दिल्ली नगर निगम (एसडीएमसी) को एक साल के भीतर श्मशान को आधुनिक इलेक्ट्रिक श्मशान में बदलने के लिए कदम उठाने के लिए कहा, जो ग्रामीणों के साथ-साथ पड़ोसी क्षेत्रों के निवासियों के बड़े हित में होगा।
हाई कोर्ट के दिसंबर 2016 के फैसले के खिलाफ एसडीएमसी द्वारा दायर एक अपील पर जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने अपना फैसला सुनाया। रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए), वसंत कुंज द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने अपने दिसंबर 2003 के आदेश में नगर निगम को भूमि पर कब्जा करने का निर्देश दिया था और कहा था कि किशनगढ़ की जगह को श्मशान के रूप में उपयोग करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्था करें।
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : सोशल मीडिया
नर्सिंग कॉलेजों की सीबीआई जांच के एमपी हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य के 2017 और उसके बाद अस्तित्व में आए सभी नर्सिंग कॉलेजों के मामलों की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ग्वालियर स्थित नर्सिंग संस्थान प्रेस्टन कॉलेज की ग्वालियर की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पीठ के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि 24 जनवरी, 2022 को पारित आदेश के अनुसार राज्य के लगभग 271 नर्सिंग कॉलेजों का निरीक्षण करने के लिए मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल द्वारा 10 सदस्यों वाली एक समिति नियुक्त की गई थी। समिति ने जांच की कि क्या ऐसे संस्थानों को उन्हें चलाने के लिए वैध रूप से मान्यता दी गई थी या नहीं और उनमें से 201 को मंजूरी दे दी। समिति द्वारा 70 कॉलेजों को मंजूरी नहीं दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने 2019 के मान्यता नियमों का पालन नहीं किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के उस फैसले पर रोक लगा दी, जिसमें राज्य के 2017 और उसके बाद अस्तित्व में आए सभी नर्सिंग कॉलेजों के मामलों की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था। मुख्य न्यायाधीश उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी की पीठ ग्वालियर स्थित नर्सिंग संस्थान प्रेस्टन कॉलेज की ग्वालियर की मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की पीठ के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर ध्यान दिया कि 24 जनवरी, 2022 को पारित आदेश के अनुसार राज्य के लगभग 271 नर्सिंग कॉलेजों का निरीक्षण करने के लिए मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल द्वारा 10 सदस्यों वाली एक समिति नियुक्त की गई थी। समिति ने जांच की कि क्या ऐसे संस्थानों को उन्हें चलाने के लिए वैध रूप से मान्यता दी गई थी या नहीं और उनमें से 201 को मंजूरी दे दी। समिति द्वारा 70 कॉलेजों को मंजूरी नहीं दी गई थी, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने 2019 के मान्यता नियमों का पालन नहीं किया है।
Supreme Court
- फोटो : ANI
स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर को मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने 2016 के आदेश में संशोधन किया और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तावित स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर को मंजूरी दे दी, क्योंकि पिछले दो शैक्षणिक वर्षों को कोविड-19 की शुरुआत के कारण शुरू करने में देरी हुई थी। स्वीकृत शैक्षणिक कैलेंडर में कहा गया है कि पीजी पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक सत्र इस साल 20 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में केंद्रीय परामर्श के तहत अखिल भारतीय कोटे और डीम्ड केंद्रीय संस्थानों के लिए पहले दौर की काउंसलिंग 15 से 27 सितंबर तक होगी। शेड्यूल के तहत राज्य की काउंसलिंग का पहला दौर भी 25 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने 2016 के आदेश में संशोधन किया और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए प्रस्तावित स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक कैलेंडर को मंजूरी दे दी, क्योंकि पिछले दो शैक्षणिक वर्षों को कोविड-19 की शुरुआत के कारण शुरू करने में देरी हुई थी। स्वीकृत शैक्षणिक कैलेंडर में कहा गया है कि पीजी पाठ्यक्रमों के लिए शैक्षणिक सत्र इस साल 20 अक्टूबर से शुरू होगा, जिसमें राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में केंद्रीय परामर्श के तहत अखिल भारतीय कोटे और डीम्ड केंद्रीय संस्थानों के लिए पहले दौर की काउंसलिंग 15 से 27 सितंबर तक होगी। शेड्यूल के तहत राज्य की काउंसलिंग का पहला दौर भी 25 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित किया गया था।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
सुप्रीम कोर्ट ने केरल विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति रद्द की
शीर्ष कोर्ट ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को कानून की दृष्टि से खराब और यूजीसी के नियमों के विपरीत बताते हुए रद्द कर दिया। जस्टिस एमआर शाह और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार, राज्य द्वारा गठित खोज समिति को चांसलर को इंजीनियरिंग विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित लोगों के बीच कम से कम तीन उपयुक्त व्यक्तियों के पैनल की सिफारिश करनी चाहिए थी। इसने केवल डॉ. राजश्री एमएस का नाम भेजा।
शीर्ष कोर्ट ने शुक्रवार को तिरुवनंतपुरम में एपीजे अब्दुल कलाम प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति की नियुक्ति को कानून की दृष्टि से खराब और यूजीसी के नियमों के विपरीत बताते हुए रद्द कर दिया। जस्टिस एमआर शाह और न्यायमूर्ति सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुसार, राज्य द्वारा गठित खोज समिति को चांसलर को इंजीनियरिंग विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित लोगों के बीच कम से कम तीन उपयुक्त व्यक्तियों के पैनल की सिफारिश करनी चाहिए थी। इसने केवल डॉ. राजश्री एमएस का नाम भेजा।
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
दोषी की मौत की सजा कम की
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2013 में मध्य प्रदेश में चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के बाद उसकी हत्या करने वाले व्यक्ति की मौत की सजा के अपने पूर्व के फैसले में शुक्रवार को संशोधन कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अब दोषी को सभी अपराधों के लिए 20 साल जेल की सजा काटने के बाद रिहा किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 19 अप्रैल के अपने फैसले में दोषी मोहम्मद फिरोज की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2013 में मध्य प्रदेश में चार साल की बच्ची के यौन उत्पीड़न के बाद उसकी हत्या करने वाले व्यक्ति की मौत की सजा के अपने पूर्व के फैसले में शुक्रवार को संशोधन कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अब दोषी को सभी अपराधों के लिए 20 साल जेल की सजा काटने के बाद रिहा किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने 19 अप्रैल के अपने फैसले में दोषी मोहम्मद फिरोज की मौत की सजा को उम्रकैद में बदल दिया था।