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दागियों को चुनाव से दूर रखा जाना चाहिए या नहीं, संविधान पीठ करेगी फैसला

Fri, 06 Jan 2017 09:38 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 06 Jan 2017 09:38 AM IST
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Supreme court to set up larger bench for banning tainted leaders from polls

दागियों को चुनाव से दूर रखा जाना चाहिए या नहीं, इस मसले के परीक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट जल्द ही पांच सदस्यीय संविधान पीठ का गठन करेगा। संविधान पीठ तय करेगी कि क्या गंभीर अपराधों में मुकदमा झेल रहे लोगों के चुनाव लड़ने पर रोक लगनी ही चाहिए या नहीं? साथ ही मुकदमे के किस चरण पर सांसद या विधायकों को अयोग्य ठहराया जाना चाहिए? पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शीर्ष अदालत की यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है।

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चीफ जस्टिस जेएस खेहड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि यह महत्वपूर्ण मामला है। हम अगले चुनाव तक इस मसले को स्पष्ट कर देना चाहते हैं जिससे कि लोग कानून से अवगत हों। पीठ ने कहा कि हम जल्द ही संविधान पीठ का गठन करेंगे और तमाम मसलों का निपटारा करेंगे। 
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इससे पहले याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने पीठ के समक्ष याचिका पर जल्द सुनवाई की गुहार करते हुए कहा कि कई ऐसे लोग हैं जो गंभीर अपराधों में शामिल हैं और ट्रायल झेल रहे हैं। संभव है कि ऐसे व्यक्ति चुनाव लड़े और वे चुनाव जीत भी सकते हैं। ऐसे में इन कानूनी सवालों का हल निकालने की जरूरत है। इस पर पीठ ने कहा कि हम तत्काल तो इन सवालों का जवाब नहीं दे सकते क्योंकि चुनाव के वक्त फर्जी और गलत मुकदमा दायर करने का भी डर होता है लेकिन हम भी यह समझते हैं कि इन सवालों का हल निकलना चाहिए। 
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विकास सिंह ने यह भी कहा कि जल्द से जल्द इन मसलों का समाधान निकाला जाना चाहिए क्योंकि कई खतरनाक अपराधी ऐसे हैं, जिन पर अदालत ने आरोप भी तय कर दिए हैं और वह आने वाले विधानसभा चुनाव लडने की योजना बना रहे हैं।


गत वर्ष आठ मार्च को तीन सदस्यीय पीठ ने अश्विनी उपाध्याय समेत अन्य द्वारा इस संबंध में दाखिल याचिकाओं को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। वर्तमान व्यवस्था के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में सजायाफ्ता लोगों के चुनाव लड़ने पर पाबंदी है और वहीं आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने पर सांसद या विधायक तत्काल प्रभाव से अयोग्य हो जाते हैं। जबकि आरोप तय होने के बाद भी व्यक्ति चुनाव लड़ सकता है। अश्विनी उपाध्याय के अलावा पूर्व चुनाव आयुक्त जेएम लिंगदोह सहित अन्य ने भी इस संबंध में जनहित याचिका दायर की है।

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