{"_id":"675006c616fddfb7a00003a0","slug":"supreme-court-to-consider-modifying-orders-that-barred-high-courts-from-hearing-coal-block-allocation-cases-2024-12-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: कोल ब्लॉक आवंटन पर सुनवाई कर सकें हाईकोर्ट, इसके लिए आदेश में सुधार करेगा सुप्रीम कोर्ट","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: कोल ब्लॉक आवंटन पर सुनवाई कर सकें हाईकोर्ट, इसके लिए आदेश में सुधार करेगा सुप्रीम कोर्ट
Wed, 04 Dec 2024 01:07 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 04 Dec 2024 01:07 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 से 2017 के बीच दो आदेश जारी किए थे, जिसके जरिए आरोपियों के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचने पर रोक लगा दी गई थी। तब सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ सिर्फ उसके पास ही याचिका लगाई जा सकती है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि वह अपने अपने उस आदेश में सुधार करेगा, जिसकी वजह से हाईकोर्ट अवैध कोल ब्लॉक आवंटन के मामलों पर सुनवाई नहीं कर सकतीं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या था तर्क?
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 से 2017 के बीच दो आदेश जारी किए थे, जिसके जरिए आरोपियों के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचने पर रोक लगा दी गई थी। तब सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ सिर्फ उसके पास ही याचिका लगाई जा सकती है।
तब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मकसद सुनवाइयों में होने वाली देरी पर रोक लगाना था। इसके साथ ही कोर्ट राहत की मांग के जरिए आरोपियों की कार्यवाहियों को रोकने की कोशिशों पर लगाम लगाना चाहती थी।
विज्ञापन
हालांकि, अब चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने कहा है कि वह अपने पिछले आदेश में सुधार करने पर विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिकाएं भी दायर हुई थीं, जिनमें कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट के आदेश आने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट को भी कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में सुनवाई की छूट दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग पक्षों ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की तरफ से केसों को देख रहे विशेष सरकारी अभियोजक आरएस चीमा से पूछा कि क्या यह सीबीआई का पक्ष है कि कोयला घोटाले से जुड़े सारे केस हमारे पास आने चाहिए? बेंच ने कहा कि हम चाहते हैं कि इन मामलों में हमें दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से जारी आदेशों का भी फायदा मिले।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाईकोर्ट को ऐसे मामलों में अपील और याचिकाओं की सुनवाई से नहीं रोका जाना चाहिए। दूसरी तरफ एनजीओ कॉमन कॉज की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आदेश इसलिए पारित किए गए थे, ताकि ट्रायल कोर्ट की तरफ से जारी आदेशों पर आरोपी हाईकोर्ट जाकर रोक न लगा सकें।
इन तर्कों के बाद सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने कहा कि चूंकि हाईकोर्ट में सुनवाई रोकने का आदेश तीन जजों की बेंच की तरफ से दिया गया था, इसलिए मामले पर 15 जनवरी 2025 के बाद तीन जजों की पीठ ही विचार करेगी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का क्या था तर्क?
सुप्रीम कोर्ट ने 2014 से 2017 के बीच दो आदेश जारी किए थे, जिसके जरिए आरोपियों के ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचने पर रोक लगा दी गई थी। तब सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही के खिलाफ सिर्फ उसके पास ही याचिका लगाई जा सकती है।
विज्ञापन
तब सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश का मकसद सुनवाइयों में होने वाली देरी पर रोक लगाना था। इसके साथ ही कोर्ट राहत की मांग के जरिए आरोपियों की कार्यवाहियों को रोकने की कोशिशों पर लगाम लगाना चाहती थी।
विज्ञापन
हालांकि, अब चीफ जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की बेंच ने कहा है कि वह अपने पिछले आदेश में सुधार करने पर विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर याचिकाएं भी दायर हुई थीं, जिनमें कहा गया था कि ट्रायल कोर्ट के आदेश आने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट को भी कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में सुनवाई की छूट दी जानी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग पक्षों ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की तरफ से केसों को देख रहे विशेष सरकारी अभियोजक आरएस चीमा से पूछा कि क्या यह सीबीआई का पक्ष है कि कोयला घोटाले से जुड़े सारे केस हमारे पास आने चाहिए? बेंच ने कहा कि हम चाहते हैं कि इन मामलों में हमें दिल्ली हाईकोर्ट की तरफ से जारी आदेशों का भी फायदा मिले।
दूसरी तरफ याचिकाकर्ता की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि हाईकोर्ट को ऐसे मामलों में अपील और याचिकाओं की सुनवाई से नहीं रोका जाना चाहिए। दूसरी तरफ एनजीओ कॉमन कॉज की तरफ से वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह आदेश इसलिए पारित किए गए थे, ताकि ट्रायल कोर्ट की तरफ से जारी आदेशों पर आरोपी हाईकोर्ट जाकर रोक न लगा सकें।
इन तर्कों के बाद सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने कहा कि चूंकि हाईकोर्ट में सुनवाई रोकने का आदेश तीन जजों की बेंच की तरफ से दिया गया था, इसलिए मामले पर 15 जनवरी 2025 के बाद तीन जजों की पीठ ही विचार करेगी।