फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court strict on mining activities without forest clearance in Odisha

Supreme Court: ओडिशा में अवैध खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, हाईकोर्ट को छह महीने में निपटारा करने का निर्देश

Mon, 06 Jun 2022 10:34 PM IST
निर्मल कांत अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Mon, 06 Jun 2022 10:34 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, हाईकोर्ट से यथास्थिति के आदेश की आड़ में वन मंजूरी (अधिकारियों से) लिए बिना खनन कैसे जारी रखा जा सकता है। बिना वन मंजूरी के जो भी खोदाई की गई है वह अवैध है।

विज्ञापन
Supreme Court strict on mining activities without forest clearance in Odisha
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा में कुछ फर्मों द्वारा यथास्थिति आदेशों की आड़ में वन मंजूरी (एफसी) के बिना जारी अवैध खनन पर कड़ी नाराजगी जताई। साथ ही शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट को छह महीने के भीतर इस तरह के सभी मामलों का निपटारा करने का निर्देश दिया।
विज्ञापन

 
जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने पूछा, हाईकोर्ट से यथास्थिति के आदेश की आड़ में वन मंजूरी (अधिकारियों से) लिए बिना खनन कैसे जारी रखा जा सकता है। बिना वन मंजूरी के जो भी खोदाई की गई है वह अवैध है। आपको वन मंजूरी के बिना खनिजों की खोदाई या निष्कर्षण जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। पीठ ने कहा, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाईकोर्ट यथास्थिति के ऐसे आदेश पारित कर रहे हैं और खनन कार्य को जारी रखने की अनुमति दे रहे हैं।
विज्ञापन


पीठ ने ओडिशा के मेसर्स बालासोर अलॉयज लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। इस कंपनी ने अपने पक्ष में यथास्थिति के आदेश को जारी रखने से उच्च न्यायालय के इनकार करने के खिलाफ याचिका दायर की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने कहा, हमने...वकील को सुना है। विवाद यह नहीं है कि याचिकाकर्ता के पास इस स्तर पर वन मंजूरी नहीं है। केवल इसलिए कि वन मंजूरी के लिए आवेदन लंबित है, इसे वन मंजूरी प्राप्त करने के लिए याचिकाकर्ता को खनन गतिविधियों को जारी रखने की अनुमति के रूप में नहीं माना जा सकता है। इस आदेश से पहले हम हाईकोर्ट को हर हाल में छह महीने के भीतर इस तरह की सभी लंबित मामलों का निपटारा करने का निर्देश देते हैं। पीठ ने रजिस्ट्री से ओडिशा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को इस आदेश से अवगत कराने का निर्देश दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed