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सीएम फडणवीस को झटका, फिर खुलेगा चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने का मामला
Tue, 01 Oct 2019 02:03 PM IST
Trainee Trainee
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Trainee Trainee
Updated Tue, 01 Oct 2019 02:03 PM IST
सार
- चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों का जिक्र न करने को लेकर अब झेलना पड़ेगा मुकदमा।
- सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट से फडणवीस को मिली राहत के फैसले को पलटा
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देवेंद्र फडणवीस (फाइल फोटो)
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विस्तार
महाराष्ट्र चुनाव से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष कोर्ट ने मंगलवार को फडणवीस के खिलाफ 2014 चुनावों के दौरान हलफनामे में दो आपराधिक मामले छिपाने का आरोप लगाने वाली याचिका को पुनर्जीवित करने का फैसला सुनाया। साथ ही शीर्ष कोर्ट ने निचली अदालत को आदेश किया कि इस मामले को एक नई याचिका के रूप में दायर कर इस पर सुनवाई करे। हालांकि कोर्ट के इस फैसले से फडणवीस के आगामी चुनाव लड़ने में कोई बाधा नहीं होगी।
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सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस मामले में 3 मई 2018 को आए बॉम्बे हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें फडणवीस को राहत देते हुए कहा गया था कि उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125ए तहत कार्रवाई का मामला नहीं बनता। पीठ वकील सतीश उइके की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें फडणवीस के खिलाफ आपराधिक मामले छिपाने का आरोप लगाया गया था और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।
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जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की सदस्यता वाली पीठ ने कहा, इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि फडणवीस को उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी थी और इसके बावजूद उन्होंने हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया। पीठ इस निष्कर्ष पर पहुंची कि हाईकोर्ट ने गलत फैसला करते हुए निचली अदालत के आदेश को रद्द किया। इस लिए हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया जाता है। पीठ ने अपने 28 पन्नों के फैसले में निचली अदालत को उइके की याचिका पर फिर से सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया।
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छह साल की सजा का है प्रावधान
जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 125ए के तहत चुनावी हलफनामे में जानकारी छिपाने के दोषी पाये जाने पर छह साल की सजा, जुर्माना या फिर दोनों का प्रावधान है। फडणवीस को इससे पहले निचली अदालत और बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्लीन चिट देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत मामला नहीं बनता।
ये थे दो मामले
देवेंद्र फडणवीस के खिलाफ नागपुर में दो आपराधिक मामले दर्ज हैं इनमें एक 1996 में मानहानि का है और दूसरा 1998 में धोखाधड़ी और ठगी का है। हालांकि इन मामलों में फडणवीस के खिलाफ आरोप तय नहीं हुए हैं।
फडणवीस इस्तीफा दें, चुनाव लड़ने का अधिकार नहीं : एनसीपी
मुंबई। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एनसीपी ने सीएम फडणवीस से इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि उन्हें चुनाव लड़ने का कोई अधिकार नहीं है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में 21 अक्तूबर को चुनाव हैं और देवेंद्र फडणवीस को भाजपा ने नागपुर दक्षिण पश्चिम सीट से टिकट दिया है। एनसीपी प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से तय है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नियमों की अनदेखी की है।
हम कोर्ट के इस फैसले का सम्मान करते हैं। उन्हें अब राजनीति में रहने का कोई अधिकार नहीं है। मलिक ने कहा, उन्हें तत्काल सीएम पद और राजनीति से इस्तीफा दे देना चाहिए। वहीं दूसरे प्रवक्ता महेश तपासे ने कहा, मुख्यमंत्री झूठ बोलते हैं, ऐसे में सच और उच्च सिद्धांतों का दावा करने वाली भाजपा को फडणवीस की उम्मीदवारी को तुरंत खारिज कर देना चाहिए।
फडणवीस के चुनाव लड़ने से रोक नहीं : सीएमओ
महाराष्ट्र मुख्यमंत्री कार्यालय ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तुरंत बात बयान जारी कर कहा कि फैसले में यह कहीं नहीं कहा गया है कि फडणवीस अब चुनाव नहीं लड़ सकते। सीएमओ ने देवेंद्र फडणवीस का बचाव करते हुए दावा किया कि यह कहना पूरी तरह से गलत और अवमाननापूर्ण है कि सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी हलफनामे में आपराधिक मामलों को छिपाने के मामले में मुख्यमंत्री के अभियोजन की अनुमति दी है। बल्कि सीएमओ ने कहा कि शीर्ष कोर्ट ने मुकदमा चलाने के लि फिर से सुनवाई के लिए कहा है जिसमें तय किया जाएगा कि अभियोजन के लिए कोई मामला बनता है या नहीं।