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Firecracker Ban: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पटाखों पर प्रतिबंध किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, जान की कीमत पर उत्सव मनाने की इजाजत नहीं

Thu, 28 Oct 2021 02:24 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 28 Oct 2021 02:24 PM IST
सार

Supreme Court: शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उत्सव की आड़ में नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दे सकता है।

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Supreme court says firecracker ban not against any community
supreme court, सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर बनी धारणा को दूर करते हुए कहा कि यह किसी विशेष समूह या समुदाय के खिलाफ नहीं है। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह उत्सव की आड़ में नागरिकों के अधिकारों के उल्लंघन की अनुमति नहीं दे सकता है। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की पीठ ने स्पष्ट किया कि वह अपने आदेशों का पूर्ण कार्यान्वयन चाहती है। उत्सव की आड़ में आप (निर्माता) नागरिकों के जीवन के साथ नहीं खेल सकते। हम किसी खास समुदाय के खिलाफ नहीं हैं। पीठ ने कहा कि हम कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि हम यहां नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए हैं।

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प्रतिबंध का आदेश विस्तृत कारण बताते हुए पारित किया गया था: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि पटाखों पर पहले प्रतिबंध का आदेश विस्तृत कारण बताते हुए पारित किया गया था। सभी पटाखों पर प्रतिबंध नहीं था। यह व्यापक जनहित में था। एक खास छाप बन रही है। यह अनुमान नहीं लगाया जाना चाहिए कि इसे विशेष उद्देश्य के लिए प्रतिबंधित किया गया था। पिछली बार हमने कहा था कि हम भोग के रास्ते में नहीं आ रहे हैं लेकिन हम लोगों के मौलिक अधिकारों के आड़े नहीं आ सकते।
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हर कोई जानता है कि दिल्ली के लोग किससे पीड़ित हैं: सुप्रीम कोर्ट 
शीर्ष अदालत ने कहा कि अधिकारियों को कुछ जिम्मेदारी सौंपी जानी चाहिए जिससे कि इस आदेश को लागू किया जा सके। पीठ ने कहा कि आज भी पटाखे बाजार में खुलेआम उपलब्ध हैं। हम यह संदेश देना चाहते हैं कि हम यहां लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए हैं। हमने पटाखों पर शत प्रतिशत प्रतिबंध नहीं लगाया है। हर कोई जानता है कि दिल्ली के लोग किससे पीड़ित हैं।
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रोजगार की आड़ में जीवन के अधिकार का उल्लंघन करने नहीं दे सकते
इससे पहले शीर्ष अदालत ने छह निर्माताओं को यह कारण बताने का आदेश दिया था कि उनके आदेशों की अवमानना के लिए उन्हें दंडित क्यों नहीं किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह पटाखों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार करते हुए रोजगार की आड़ में अन्य नागरिकों के जीवन के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकता है और इसका मुख्य फोकस निर्दोष नागरिकों के जीवन का अधिकार है।

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