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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने दिया अहम फैसला, कहा- अविवाहित महिला को भी गर्भपात का अधिकार
Thu, 21 Jul 2022 05:12 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Thu, 21 Jul 2022 05:12 PM IST
सार
इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अविवाहित महिला को 23 हफ्तों का गर्भ गिराने की इजाजत देने में आपत्ति जताई थी।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में अविवाहित महिला को 24 हफ्ते के गर्भ को गिराने की इजाजत दे दी है। जस्टिस चंद्रचूड़ की बेंच ने दिल्ली हाई कोर्ट फैसले को पलटते हुए कहा कि अदालत का काम अपनी बुद्धि और विवेक का इस्तेमाल करना है। अदालत कोई कंप्यूटर नही है कि सिर्फ मशीनी फैसला दे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाहित महिलाओं की तरह कुंआरी लड़कियों को भी गर्भपात का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में महिला के विवाहित और अविवाहित होने का मुद्दा उठाया गया था। याचिका में कहा गया था कि कानून अविवाहित महिला के मामले में कुछ नहीं कहता है।
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पति की जगह पार्टनर के जिक्र का दिया हवाला
जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि गर्भपात से सिर्फ इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि महिला अविवाहित है। बेंच ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी ऐक्ट में 2021 के संशोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें पति की जगह पार्टनर का जिक्र है। अदालत ने कहा यह बात ही कानून की मंशा को दर्शाती है कि यह अविवाहित महिलाओं को भी दायरे में रखता है।
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इससे पहले मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अविवाहित महिला को 23 हफ्तों का गर्भ गिराने की इजाजत देने में आपत्ति जताई थी। कोर्ट ने कहा था कि ऐसा करना भ्रूण की हत्या के समान होगा। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि कानून अविवाहित महिलाओं को मेडिकल प्रक्रिया के जरिए गर्भपात के लिए समय देता है। विधायिका ने आपसी सहमति से संबंध को किसी मकसद से ही उन मामलों की श्रेणी से बाहर रखा है जहां 20 हफ्तों से 24 हफ्तों के बीच गर्भपात की इजाजत है।
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चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह टिप्पणी गर्भपात की इजाजत के लिए महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने सुझाव दिया था कि याचिकाकर्ता को तब तक कहीं सुरक्षित जगह पर रखा जा सकता है, जब तक कि वह बच्चे को जन्म न दे दे। बाद में वह उसे गोद लेने के लिए छोड़ सकती है।