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राहत: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- विकास कार्यों पर जनहित याचिका के लिए जमा करवाएं 10 लाख रुपये
Sun, 08 Aug 2021 02:52 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 08 Aug 2021 02:52 AM IST
सार
- नियम : विकास परियोजनाओं के खिलाफ ‘मोटिवेटेड-जनहित याचिकाएं’ रोकने के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट का नियम है कि याचिका के साथ परियोजना की एख प्रतिशत राशि जमा करवानी होती है
- राहत : सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के पार्षद की याचिका पर कहा, परियोजनाएं मुकदमों में उलझने से रोकने का हाईकोर्ट का इरादा सही, लेकिन संतुलन बनाना होगा ताकि न्याय पाने की संभावना खत्म न हो
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
सीधे जनता से जुड़ी विकास परियोजनाएं रोकने या धीमी करने के लिए ‘मोटिवेटेड जनहित याचिकाएं’ न दायर हों, इसके लिए बॉम्बे हाईकोर्ट जनहित याचिका नियमावली 2010 के तहत याचिका के साथ परियोजना की कुल लागत की एक प्रतिशत राशि याचिकाकर्ता को जमा करवानी होती है। पुणे महानगर निगम की 390 करोड़ रुपये की एक परियोजना के खिलाफ एक पार्षद द्वारा की याचिका पर इस नियम के तहत 3.90 करोड़ रुपये हाईकोर्ट में जमा करवाने के बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर यह राशि 10 लाख रुपये पर सीमित कर दी है।
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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच ने अपने आदेश में कहा कि ‘बॉम्बे हाईकोर्ट का नियम बेशक ध्यान में रखा जाना चाहिए, लेकिन यह देखना भी जरूरी है कि एक संतुलन कायम हो ताकि इस नियम की वजह से न्याय पाने की संभावना ही खत्म न हो जाए।’ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 3.90 करोड़ रुपये जमा करवाने का आदेश हाईकोर्ट ने निश्चित तौर पर यह पक्का करने के लिए दिया कि जनहित के प्रोजेक्ट बिना वजह मुकदमों में न फंस कर रह जाएं। लेकिन कुछ मामलों में परियोजना की एक प्रतिशत राशि बहुत भारी हो सकती है।
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यह है मामला
पुणे महानगर निगम ने शहरी सीमा में नए शामिल 11 गांवों में सीवेज नेटवर्क, ट्रीटमेंट प्लांट, रखरखाव आदि का 390 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला। अरविंद तुकाराम शिंदे सहित शहर के पांच पार्षदों इस पर आपत्ति की। शिंदे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि बिना विकास योजना, ड्राफ्ट या अंतरिम योजना यह टेंडर निकाले गए जो महाराष्ट्र नगर नियोजन अधिनियम के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने उन्हें नियम के तहत 3.90 करोड़ रुपये याचिका के साथ जमा करवाने को कहा।
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आदेश
हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित राशि को बेहद कठोर मानते हुए इसे कम करवाने के लिए शिंदे ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली। यहां 19 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट को उनकी याचिका रद्द न करने और 10 लाख रुपये हाईकोर्ट रजिस्ट्री में जमा करवाने के अंतरिम आदेश दिए। ताजा आदेश में यही रकम याचिका के लिए जमा करवाने के लिए कहा गया।