{"_id":"68ac14c738f2534e5200044a","slug":"supreme-court-says-death-sentence-can-be-challenged-under-article-32-on-ground-breach-of-procedural-safeguard-2025-08-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Supreme Court: 'मौत की सजा को अनुच्छेद 32 के तहत चुनौती दी जा सकती है', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Supreme Court: 'मौत की सजा को अनुच्छेद 32 के तहत चुनौती दी जा सकती है', सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
Mon, 25 Aug 2025 01:16 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नितिन गौतम
Updated Mon, 25 Aug 2025 01:16 PM IST
सार
पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत प्रावधान है कि अगर मौत की सजा देते हुए मनोज बनाम मध्य प्रदेश मामले में दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है तो मौत की सजा के मामले पर फिर से सुनवाई की जा सकती है।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मौत की सजा पाए एक दोषी की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मौत की सजा को भी प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों के उल्लंघन के आधार पर चुनौती दी जा सकती है। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने वसंत संपत दुपारे की याचिका पर यह टिप्पणी की। दुपारे को अप्रैल 2008 में चार साल की एक बच्ची से दुष्कर्म करने और निर्ममता से उसकी हत्या करने के मामले में मौत की सजा सुनाई गई थी। दुपारे ने बच्ची को चॉकलेट देने के बहाने बुलाया और दुष्कर्म के बाद पत्थर से उसका सिर कुचलकर हत्या कर दी थी।
मनोज बनाम मध्य प्रदेश मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी
सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दुपारे की याचिका को अनुच्छेद 32 के तहत दायर करने की अनुमति दे दी। पीठ ने माना कि दुपारे के मामले में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हुआ। पीठ ने कहा कि साल 2022 में मनोज बनाम मध्य प्रदेश के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश तय किए थे, जिनके तहत सत्र अदालत आरोपी को मौत की सजा देने से पहले उसकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट का भी मूल्यांकन करे। पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत प्रावधान है कि अगर मौत की सजा देते हुए मनोज बनाम मध्य प्रदेश मामले में दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है तो मौत की सजा के मामले पर फिर से सुनवाई की जा सकती है।
ये भी पढ़ें- SC: हिमाचल में 'पारिस्थितिकी असंतुलन' पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, सुनवाई के लिए न्याय मित्र नियुक्त करने का फैसला
विज्ञापन
राष्ट्रपति भी खारिज कर चुकी हैं दुपारे की दया याचिका
हालांकि पीठ ने ये भी कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत सामान्य मामलों पर फिर से सुनवाई शुरू नहीं की जाएगी और सिर्फ घोर उल्लंघन की स्थिति में ही सुनवाई होगी। पीठ ने दुपारे की दोषसिद्धि को अभी बरकरार रखा है और अब मामले को मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाएगा। मुख्य न्यायाधीश नई पीठ का गठन करेंगे और याचिका पर फिर से सुनवाई होगी। दुपारे की मौत की सजा को साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था, जिसके बाद उसने महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी क्रमश 2022 और 2023 में उसकी दया याचिकाएं खारिज हो गईं।
विज्ञापन
मनोज बनाम मध्य प्रदेश मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी
सोमवार को जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दुपारे की याचिका को अनुच्छेद 32 के तहत दायर करने की अनुमति दे दी। पीठ ने माना कि दुपारे के मामले में प्रक्रियात्मक सुरक्षा उपायों का उल्लंघन हुआ। पीठ ने कहा कि साल 2022 में मनोज बनाम मध्य प्रदेश के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिशा-निर्देश तय किए थे, जिनके तहत सत्र अदालत आरोपी को मौत की सजा देने से पहले उसकी मानसिक और मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट का भी मूल्यांकन करे। पीठ ने कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत प्रावधान है कि अगर मौत की सजा देते हुए मनोज बनाम मध्य प्रदेश मामले में दिए गए दिशा निर्देशों का पालन नहीं किया गया है तो मौत की सजा के मामले पर फिर से सुनवाई की जा सकती है।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें- SC: हिमाचल में 'पारिस्थितिकी असंतुलन' पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, सुनवाई के लिए न्याय मित्र नियुक्त करने का फैसला
विज्ञापन
राष्ट्रपति भी खारिज कर चुकी हैं दुपारे की दया याचिका
हालांकि पीठ ने ये भी कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत सामान्य मामलों पर फिर से सुनवाई शुरू नहीं की जाएगी और सिर्फ घोर उल्लंघन की स्थिति में ही सुनवाई होगी। पीठ ने दुपारे की दोषसिद्धि को अभी बरकरार रखा है और अब मामले को मुख्य न्यायाधीश के सामने रखा जाएगा। मुख्य न्यायाधीश नई पीठ का गठन करेंगे और याचिका पर फिर से सुनवाई होगी। दुपारे की मौत की सजा को साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था, जिसके बाद उसने महाराष्ट्र सरकार और राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी क्रमश 2022 और 2023 में उसकी दया याचिकाएं खारिज हो गईं।