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सुप्रीम कोर्ट: स्वशासित ट्रस्टों पर राज्य का व्यापक नियंत्रण नहीं हो सकता, प्रदेश का हित यह सुनिश्चित करना है कि उनकी संपत्ति बर्बाद न हो  

Sun, 30 Jan 2022 05:21 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sun, 30 Jan 2022 05:21 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक ट्रस्ट निर्णय अच्छी तरह से सूचित होते हैं और प्रासंगिक विचारों पर आधारित होते हैं, तब तक ट्रस्ट के हित उसके सदस्यों द्वारा परिभाषित किए जाते हैं।

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Supreme Court Said State cannot have wide control over self-governing trusts
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक ट्रस्टों पर राज्य का व्यापक नियंत्रण नहीं हो सकता है और सरकारी तंत्र यह तय नहीं कर सकते कि ऐसे ट्रस्टों के संदर्भ में क्या निर्णय लिए जा सकते हैं और क्या नहीं? जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस एस रवींद्र भट और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने कहा कि सार्वजनिक दान और ट्रस्टों के मामले में सार्वजनिक नियंत्रण का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ट्रस्ट कुशलतापूर्वक और सुचारु रूप से संचालित हो।

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पीठ ने कहा,  जब तक ट्रस्ट निर्णय अच्छी तरह से सूचित होते हैं और प्रासंगिक विचारों पर आधारित होते हैं, तब तक ट्रस्ट के हित उसके सदस्यों द्वारा परिभाषित किए जाते हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि संपत्तियों के हस्तांतरण के विशिष्ट संदर्भ में राज्य का हित यह सुनिश्चित करना है कि सार्वजनिक ट्रस्टों की मूल्यवान संपत्ति बर्बाद न हो।
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दरअसल मध्य प्रदेश लोक न्यास अधिनियम, 1951 (अधिनियम) के तहत रजिस्ट्रार ने अपीलकर्ता, पारसी अंजुमन, महू ट्रस्ट द्वारा ट्रस्ट संपत्ति के निपटान के लिए मंजूरी की मांग वाले आवेदन को खारिज कर दिया था। दिसंबर 2014 में ट्रस्ट की प्रबंध समिति ने सर्वसम्मति से पांच अचल संपत्तियों को बेचने का निर्णय लिया था।
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एसोसिएशन की स्वतंत्रता का अधिकार कम करने का प्रयास न हो
शीर्ष अदालत ने कहा है कि कानून में व्यक्त शर्तों के माध्यम से अधिनियमित सार्वजनिक नियंत्रण के किसी भी उपाय को इस हद तक विस्तारित नहीं किया जाना चाहिए कि संविधान के अनुच्छेद- 19 (1) (सी) के तहत एसोसिएशन की स्वतंत्रता का अधिकार कम हो जाए। शीर्ष अदालत ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ के उस फैसले के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने एकलपीठ के फैसले की पुष्टि की थी।

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