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सुप्रीम कोर्ट: सेबी को ‘बदनाम’ करने का कोई कारण नहीं, हिंडनबर्ग रिपोर्ट में किए गए दावे भी नहीं मान सकते सच

Sat, 25 Nov 2023 06:24 AM IST
यशोधन शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: यशोधन शर्मा Updated Sat, 25 Nov 2023 06:24 AM IST
सार

याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि इस मामले में सेबी की भूमिका कई कारणों से ‘संदिग्ध’ थी क्योंकि उसके पास बहुत सारी जानकारी 2014 में ही उपलब्ध थी।

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Supreme Court No reason to defame SEBI, claims made in Hindenburg report also cannot be accepted as true
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके पास अदाणी समूह के खिलाफ जांच करने वाले सेबी को ‘बदनाम’ करने का कोई कारण नहीं है। क्योंकि उसके सामने ऐसी कोई सामग्री नहीं है, जिससे सेबी पर संदेह किया जाए। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि वह हिंडनबर्ग रिपोर्ट में किए गए दावों को सच नहीं मान सकती। साथ ही सेबी से पूछा कि वह भविष्य में यह सुनिश्चित करने के लिए क्या करने का इरादा रखता है कि निवेशक शेयर बाजार में अस्थिरता या शॉर्ट-सेलिंग के कारण अपनी संपत्ति न खोएं। शीर्ष अदालत ने स्टॉक मूल्य में हेरफेर के आरोपों पर अदाणी-हिंडनबर्ग विवाद से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

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सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा, बिना किसी ठोस सामग्री के इस मामले में जांच के लिए अपनी तरफ से एसआईटी गठित करना उचित नहीं है। किसी वैधानिक नियामक को मीडिया में प्रकाशित होने वाली किसी भी दावे को ‘ईश्वरीय सत्य’ के रूप में लेने के लिए नहीं कहा जा सकता। पीठ ने कहा, हमें हिंडनबर्ग रिपोर्ट में जो बताया गया है उसे वास्तव में (स्वचालित रूप से) सच मानने की जरूरत नहीं है। इसीलिए हमने सेबी को जांच का निर्देश दिया।
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याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि इस मामले में सेबी की भूमिका कई कारणों से ‘संदिग्ध’ थी क्योंकि उसके पास बहुत सारी जानकारी 2014 में ही उपलब्ध थी। इस पर पीठ ने कहा, उन्होंने अपनी जांच पूरी कर ली है। वे कह रहे हैं कि यह अब उनकी अर्ध-न्यायिक शक्ति में है। क्या उन्हें कारण बताने के लिए नोटिस जारी करने से पहले जांच का खुलासा करना चाहिए। पीठ ने कहा हमारे सामने ऐसी कोई सामग्री कहां है जिसके तहत सेबी पर संदेह किया जाए। 
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आरोप लगाना बहुत आसान
पीठ ने भूषण के इस दावे को भी गंभीरता से लिया कि शीर्ष अदालत की नियुक्त विशेषज्ञ समिति के दो सदस्यों के बीच गंभीर हितों का टकराव है। पीठ ने कहा, लगाए जा रहे आरोपों के बारे में कुछ जिम्मेदारी होनी चाहिए। आपको भी बहुत सावधान रहना होगा। आरोप लगाना बहुत आसान है। हम यहां चरित्र प्रमाणपत्र नहीं दे रहे हैं। लेकिन साथ ही हमें निष्पक्षता के बुनियादी सिद्धांतों के बारे में भी सचेत रहना होगा।

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