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Supreme Court: 'तकनीक व AI के कारण मनी लॉन्ड्रिंग देश की अर्थव्यवस्था के लिए असली खतरा', अदालत की बड़ी टिप्पणी

Mon, 20 Nov 2023 09:28 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Mon, 20 Nov 2023 09:28 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने तकनीकी विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कारण मनी लॉन्ड्रिंग को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए असली खतरा करार दिया है। अदालत ने कहा कि ऐसे जटिल मामलों की जांच भी बेहद चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।

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Supreme Court Money Laundering Real Threat Advent of Technology Artificial Intelligence
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि उन्नत तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विकल्पों की मौजूदगी के कारण देश की  अर्थव्यवस्था के लिए असली खतरा मनी लॉन्ड्रिंग है। शक्ति भोग फूड्स लिमिटेड के कर्मचारी की जमानत याचिका खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि देश की वित्तीय व्यवस्था के लिए आर्थिक अपराध असली खतरा बन गए हैं।
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जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप वाली जमानत याचिका खारिज कर दी। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश के विकास पर आर्थिक अपराध की घटनाओं का बड़ा प्रभाव होता है। तकनीक के विकास और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी चीजों के कारण मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराधों की जांच भी चुनौतीपूर्ण हो गई है। देश के वित्तीय सिस्टम पर खतरे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जांच एजेंसी ऐसी आपराधिक घटनाओं में जटिल लेनदेन और इसमें शामिल लोगों को पकड़ने में चुनौतियों का सामना करती हैं।
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आर्थिक अपराध के मामलों में जमानत पर दूसरे दृष्टिकोण से विचार
अदालत ने कहा कि निर्दोष आदमी पर मामला दर्ज न हो, इस बात का ध्यान रखने के लिए जांच एजेंसी को काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ के अनुसार, यह भी ध्यान रखना पड़ता है कि कोई भी गुनाहगार कानून की गिरफ्त से छूट न जाए। शीर्ष अदालत के मुताबिक आर्थिक अपराध के मामलों में जमानत याचिका पर अलग नजरिए से विचार किए जाने की जरूरत है। आर्थिक अपराध में बेहद गहरी साजिश होती है, जिसका देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ता है। ऐसे में इसे काफी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। जब अदालतें आरोपी की हिरासत जारी रखने का फैसला करती हैं तो जांच एजेंसियों को भी ट्रायल तर्कसंगत समयसीमा के भीतर पूरा करना चाहिए। इसका मकसद संविधान के आर्टिकल 21 के तहत मिले त्वरित सुनवाई के अधिकार की सुरक्षा है।
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ED ने सीबीआई की शिकायत पर दर्ज किया मामला
सु्प्रीम कोर्ट के मुताबिक आरोपी तरुण कुमार को पहली नजर में यह साबित करना होगा कि उसका कथित अपराध से कोई सरोकार नहीं है और जमानत पर रहने के दौरान भी वह कोई अपराध नहीं करेगा। बता दें कि मनी लॉन्ड्रिंग का मामला शक्ति भोग फूड्स लिमिटेड के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दर्ज किया है। यह मामला सीबीआई की प्राथमिकी से जुड़ा है जिसमें केंद्रीय जांच ब्यूरो ने साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। 


भारतीय स्टेट बैंक की शिकायत पर CBI की एफआईआर 
सीबीआई ने शक्तिभोग फूड्स लिमिटेड पर एफआईआर भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की शिकायत पर दर्ज की है। एसबीआई की कंप्लेन के अनुसार पब्लिक फंड के दुरुपयोग के लिए कंपनी के निदेशकों ने फर्जी खातों और दस्तावेजों का सहारा लिया। 24 साल पुरानी यह कंपनी गेहूं, आटा, चावल, बिस्कुट जैसी चीजों का कारोबार करती है। 2008 में इस कंपनी का टर्नओवर 1411 करोड़ रुपये था। केवल छह साल में कंपनी का टर्नओवर छह हजार करोड़ जा पहुंचा।
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