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'एक्सप्रेसवे मौत का गलियारा ना बने': सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, नई गाइडलाइन बनाने के दिए आदेश

Sun, 19 Apr 2026 01:31 PM IST
Shubham Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shubham Kumar Updated Sun, 19 Apr 2026 01:31 PM IST
सार

देश में बढ़ते हादसों पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि एक्सप्रेसवे लापरवाही से मौत के गलियारे न बनें। आंकड़ों में सामने आया कि सिर्फ 2% हाईवे पर 30% मौतें होती हैं। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, NHAI और राज्यों को सख्त सुरक्षा कदम लागू करने के निर्देश दिए हैं।

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Supreme Court issues pan-India directions for road safety says expressways should not become corridor of peril
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

देश में बढ़ते सड़क हादसों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश के लिए नई गाइडलाइन जारी की हैं। कोर्ट ने साफ कहा है कि एक्सप्रेसवे मौत के गलियारे नहीं बनने चाहिए और छोटी-छोटी लापरवाहियों की वजह से जान नहीं जानी चाहिए।

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मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस जेके महेश्वरी और एएस चांदुरकर की बेंच ने बताया कि देश की कुल सड़कों में राष्ट्रीय राजमार्ग सिर्फ 2% हैं, लेकिन यहां करीब 30% सड़क हादसों में मौतें होती हैं, जो बेहद चिंताजनक है। कोर्ट ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सभी राज्यों को सड़क सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
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क्या-क्या बड़े निर्देश दिए गए-

  • अब नेशनल हाईवे पर भारी या कमर्शियल वाहनों को सड़क या किनारे खड़ा करने पर रोक होगी, सिर्फ तय जगहों पर ही पार्किंग होगी।

  • हाईवे के किनारे नए ढाबे, दुकान या कोई भी अवैध निर्माण तुरंत रोक दिए जाएंगे।

  • 60 दिनों के अंदर ऐसे सभी अवैध निर्माण हटाने का आदेश दिया गया है।

  • हर जिले में हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स बनाई जाएगी, जो सड़क सुरक्षा पर नजर रखेगी।

  • हाईवे पर कैमरे, स्पीड मॉनिटर और इमरजेंसी सिस्टम (एटीएमएस) लगाए जाएंगे।

  • पुलिस और प्रशासन को नियमित गश्त और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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कोर्ट ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिए
कोर्ट ने कहा कि जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21) सिर्फ जीने का हक नहीं, बल्कि सुरक्षित माहौल में जीने की गारंटी भी है। अगर लापरवाही से किसी की जान जाती है, तो यह सरकार की जिम्मेदारी में कमी मानी जाएगी। यह फैसला 2025 में राजस्थान और तेलंगाना में हुए बड़े सड़क हादसों के बाद लिया गया, जिनमें कई लोगों की जान चली गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने सभी एजेंसियों को 60 दिनों के भीतर इन निर्देशों को लागू करने को कहा है और 75 दिनों के अंदर रिपोर्ट भी मांगी है। कोर्ट ने साफ किया कि सड़क सुरक्षा में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।


 

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