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सुप्रीम कोर्ट: रिक्तियों को देखते हुए डीआरटी व डीएआरटी में दाखिल होने वाली याचिकाओं पर विचार करें हाईकोर्ट, जानिए पूरा मामला 

Thu, 16 Dec 2021 05:57 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 16 Dec 2021 05:57 PM IST
सार

चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा, 'इस समस्या को हल करने के लिए फिलहाल हम हाईकोर्ट से डीआरटी व डीआरएटी के समक्ष दायर किए जाने वाले आवेदनों पर विचार करने का अनुरोध करते हैं।'

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Supreme Court: High Court Will Consider the petitions filed in DRT and DART in view of the vacancies Latest News Update
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कई राज्यों में ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) और ऋण वसूली अपीलीय न्यायाधिकरण (डीआरएटी) के रिक्तियों के कारण संचालन में कमी को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट से एक अंतरिम उपाय के रूप में रिट क्षेत्राधिकार के तहत सरफेसी के तहत दायर किए गए आवेदनों पर विचार करने का अनुरोध किया है।

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चीफ जस्टिस एनवी रमण, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एल नागेश्वर राव की पीठ ने कहा, 'इस समस्या को हल करने के लिए फिलहाल हम हाईकोर्ट से डीआरटी व डीआरएटी के समक्ष दायर किए जाने वाले आवेदनों पर विचार करने का अनुरोध करते हैं।' पीठ ने साथ ही यह भी कहा कि एक बार न्यायाधिकरण(ट्रिब्यूनल) संचालन की आने में स्थिति में हाईकोर्ट से सभी मामले उनके पास वापस आ जाएंगे। पीठ ने केंद्र सरकार से इस बीच नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी कहा है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने एक राज्य के डीआरटी के अधिकारक्षेत्र को दूसरे राज्य के डीआरटी को सौंपे जाने के कारण उत्पन्न कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया। मध्य प्रदेश की बार काउंसिल ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हुए कहा था कि डीआरटी जबलपुर के अधिकारक्षेत्र को डीआरटी लखनऊ (यूपी) में स्थानांतरित करने से वादियों और वकीलों को भारी कठिनाई हो रही है।
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मध्यप्रदेश बार काउंसिल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील निधेश गुटपा ने पीठ का ध्यान केरल हाईकोर्ट द्वारा पारित एक फैसले की ओर आकर्षित किया जिसमें कहा गया था कि डीआरटी के अधिकार क्षेत्र को दूसरे राज्य में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मार्च 2021 में पारित उस फैसले को चुनौती नहीं दी है। गुप्ता ने बताया कि केरल हाईकोर्ट ने सुझाव दिया था कि यदि कोई अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं है तो राज्य के भीतर अन्य न्यायाधिकरणों को अधिकार क्षेत्र दिया जाना चाहिए।

भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि सुनवाई वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रही है और इसलिए अधिकार क्षेत्र के हस्तांतरण में कठिनाई नहीं हो सकती है। जवाब में गुप्ता ने कहा कि वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग की सुनवाई प्रभावी नहीं है क्योंकि दूसरे राज्य के मामलों के लिए केवल तारीखें दी जाती हैं। कोई ठोस सुनवाई नहीं होती है।

मध्य प्रदेश की समस्या के संबंध में अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जबलपुर में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण(कैट) से डीआरटी क्षेत्राधिकार लेने का अनुरोध किया गया था लेकिन कैट ने कार्यभार का हवाला देते हुए अनुरोध को ठुकरा दिया। गुप्ता ने सुझाव दिया कि जबलपुर में औद्योगिक ट्रिब्यूनल, एएफटी, रेलवे ट्रिब्यूनल आदि जैसे ट्रिब्यूनल पर काम का बोझ कम हैं।

इस पर जस्टिस राव ने कहा, 'गुप्ता का कहना हैं कि वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग में अन्य राज्यों के मामलों को कोई मौका नहीं दिया जाता है, केवल तारीखें दी जाती हैं। यह न्याय प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन है।' पीठ ने चयन समिति से नियुक्तियों में तेजी लाने और हाईकोर्ट को इन आवेदनों पर विचार करने का आदेश दिया।


वहीं सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओए से पेश अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया कि दिसंबर के अंत तक आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण में 22 नियुक्तियां हो जाएंगी। वेणुगोपाल ने बताया कि अन्य छह नामों के संबंध में कुछ आपत्तियां हैं। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह में आपत्तियों को लेकर प्रासंगिक रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा है।

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