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सुप्रीम कोर्ट तय करेगा ‘बयान बहादुरों’ के लिए लक्ष्मण रेखा

Wed, 29 Mar 2017 10:08 PM IST
amarujala.com- presented by : अभिषेक मिश्रा
amarujala.com- presented by : अभिषेक मिश्रा Updated Wed, 29 Mar 2017 10:08 PM IST
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supreme court have to decide limit of deponent
supreme court

सुप्रीम कोर्ट ने ‘बयान बहादुरों’ के लिए लक्ष्मण रेखा तय करने का निर्णय लिया है। वह यह तय करेगा कि जन सेवा से जुडे़ प्रतिनिधि और अधिकारी किस हद तक बयान दे सकते हैं। इस मसले पर अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और वरिष्ठ वकील फली एस नरीमन के बाद अब एक और वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को अदालत की मदद करने को कहा गया है।

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न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि बोलने और अभिव्यक्ति के अधिकार पर किस हद तक आजादी है। क्या इस अधिकार पर जीने और स्वच्छंदता के मूल अधिकार का भी प्रभाव पड़ता है? मालूम कि बुलंदशहर गैंगरेप मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री आजम खान द्वारा दिए बयान के बाद सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल उठाया था।
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हालांकि बाद में आजम खान ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस बात का परीक्षण करने का निर्णय लिया था कि पब्लिक ऑफिस में बैठा व्यक्ति किस हद तक बयान दे सकता है।

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अभिव्यक्ति की आजादी असीम नहीं है- SC

supreme court have to decide limit of deponent
सुप्रीम कोर्ट

बुधवार को अमाइकस क्यूरी फली एस नरीमन ने कहा कि बोलने व अभिव्यक्ति के अधिकार और जीवन जीने के अधिकार के बीच बैलेंस को देखने के लिए उन्हें और वक्त चाहिए। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी असीम नहीं है। अनुच्छेद - 19 (2) इस पर पाबंदी लगाता है। पीठ नेे कहा कि क्या ऐसे बयान की इजाजत दी जा सकती है जिससे पीड़ित की प्रतिष्ठा या गरिमा प्रभावित होती हो।

वहीं अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इस तरह की टिप्पणी पर आपराधिक अभियोजन का प्रावधान नहीं है। इस पर पीठ ने कहा कि कानून नहीं है तो क्या कोई कुछ भी टिप्पणी कर सकता है। पीठ ने कहा कि यह मामला सिर्फ किसी के बोलने की आजादी का अधिकार ही नहीं बल्कि पीड़ित के संरक्षण और निष्पक्ष ट्रायल के अधिकार का भी मसला है।

पीठ ने सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष में मौजूद वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे को भी अदालत की मदद करने को कहा है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

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