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याचिका खारिज: राज्यों को नहीं मिला सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग घोषित करने का अधिकार
Fri, 02 Jul 2021 04:24 AM IST
देव कश्यप
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 02 Jul 2021 04:24 AM IST
सार
- 102वें संविधान संशोधन से जुड़े फैसले के खिलाफ केंद्र की पुनर्विचार याचिका खारिज
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Supreme Court
- फोटो : ANI
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें 5 मई को 102वें संविधान संशोधन से जुड़े फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत ने उस फैसले में कहा था कि राज्यों के पास सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग की पहचान करने का अधिकार नहीं है।
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जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एल नागेश्वर राव, जस्टिस एस अब्दुल नजीर, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एस रविंदर भट की पीठ ने कहा, केंद्र ने पुनर्विचार याचिका में जो आधार दिए हैं, उन पर पहले ही गौर किया जा चुका है। ऐसे में 5 मई के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं बनता। पीठ ने पुनर्विचार याचिका पर ओपन कोर्ट में सुनवाई की केंद्र की मांग भी ठुकरा दी। पीठ ने 28 जून को अपने चैंबरों में इस याचिका पर विचार किया था।
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दरअसल 5 मई को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने बहुमत (3-2) के फैसले में कहा था कि 102वें संशोधन के बाद राज्यों के पास सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान करने का अधिकार खत्म हो गया है। किसी समुदाय को पिछड़ा वर्ग सूची में डालना या निकालना, राष्ट्रपति का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने 5 मई को मराठा आरक्षण के महाराष्ट्र सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया था और यह उसी फैसले का हिस्सा है।
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