BJP: 'तिरुप्परनकुंड्रम पर रोजाना नमाज नहीं', सुप्रीम कोर्ट का फैसला; भाजपा बोली- कटघरे में विपक्ष की राजनीति
सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के तिरुप्परनकुंड्रम कार्तिगई दीपम विवाद में मुस्लिम पक्ष को रोजाना नमाज की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस पर भाजपा ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह विपक्ष की हिंदू विरोधी राजनीति को करारा झटका है।
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सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद तमिलनाडु में धार्मिक राजनीति गरमा सकती है। सर्वोच्च अदालत ने तमिलनाडु के कार्तिगई दीपम विवाद में मुस्लिम पक्ष को पहाड़ी पर रोज नमाज की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा है कि मुस्लिम पक्ष तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी के नेल्लूथप्पू क्षेत्र में केवल रमजान और बकरीद पर नमाज अदा कर सकता है। अदालत ने इस मामले में किसी सक्षम अदालत द्वारा कोई निर्णय लेने तक यहां पशुओं की बलि देने, मांस भोजन लाने और परोसने पर भी रोक लगाई है। अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए इसमें दखल देने से इनकार कर दिया।
भाजपा ने इस फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह निर्णय विपक्ष की हिंदू विरोधी राजनीति को करारा झटका है। विपक्ष ने इस मामले में हाईकोर्ट के उस न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग लाने का काम किया था जिन्होंने कार्तिगई दीपम विवाद में हिंदू पक्ष को दीपक जलाने की अनुमति दी थी।
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तमिलनाडु की राजनीति में यह विवाद बहुत चर्चा में रहा है। राज्य की सत्तारूढ़ डीएमके सरकार ने पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम के लिए हिंदुओं को दीपक जलाने पर रोक लगा दी थी। इस पर आम जनता और प्रशासन के बीच गंभीर टकराव हुआ था। इस मामले में न्यायिक दखल बढ़ने के बाद हाईकोर्ट ने तिरुप्परनकुंड्रम पहाड़ी के कार्तिगई दीपम स्तंभ पर दीपक जलाने की अनुमति दे दी थी। लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इस निर्णय के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। अब सर्वोच्च न्यायालय से इस निर्णय के बाद सरकार और मुस्लिम पक्ष को करारा झटका लगा है।
भाजपा ने किया स्वागत
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि विपक्ष हिंदू विरोध की राजनीति करता है। वह केवल मुस्लिम तुष्टिकरण ही नहीं करता, बल्कि इसके विरोध में वह हिंदुओं का विरोध करने लगता है। कार्तिगई दीपम में हिंदुओं को पूजा का अधिकार देने वाले न्यायमूर्ति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाकर विपक्ष ने यह साफ कर दिया था कि वह अल्पसंख्यक तुष्टिकरण में किसी भी सीमा को पार कर सकता है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय ने एक बार फिर डीएमके, कांग्रेस, सपा और अन्य दलों की कथित हिंदू विरोधी राजनीति को करारा झटका दिया है। उन्होंने कहा कि अदालत के इस निर्णय से हिंदुओं के अधिकारों की रक्षा हुई है।
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