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निजी कर्मचारियों की पेंशन में बढ़ोतरी का रास्ता साफ, हाईकोर्ट का फैसला बरकरार
Wed, 03 Apr 2019 02:40 AM IST
गौरव द्विवेदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव द्विवेदी
Updated Wed, 03 Apr 2019 02:40 AM IST
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EPFO (file)
सुप्रीम कोर्ट ने निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए उनकी पेंशन में बढ़ोतरी का रास्ता साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की याचिका को खारिज करते हुए केरल हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को उनके पूरे वेतन के हिसाब से पेंशन देने का आदेश दिया था। फिलहाल ईपीएफओ की ओर से 15 हजार रुपये के बेसिक वेतन की सीमा के आधार पर पेंशन की गणना की जाती है।
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चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने ईपीएफओ की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी कि इसमें कोई योग्यता नहीं है। पीठ के फैसले के बाद अब कर्मचारियों को उनके वेतन के 30 से 50 फीसदी के बराबर पेंशन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। दरअसल, निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को ईपीएफओ की 1995 में लाई गई ईपीएस योजना के तहत पेंशन दी जाती है। इसमें पेंशन पाने के लिए कर्मचारी के वेतन में से 8.33 फीसदी की दर से अंशदान कटता है, लेकिन यह कटौती केवल 15 हजार रुपये पर होती है। भले ही कर्मचारी का वेतन कितना भी हो।
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वर्ष 2014 तक यह सीमा केवल 6500 रुपये थी, लेकिन तब एक संशोधन कर सीमा को 15 हजार रुपये कर दिया गया। हालांकि इस संशोधन के साथ शर्त यह भी थी कि पेंशन की गणना आखिरी पांच वर्षों के औसत मासिक वेतन के आधार पर होगी। जबकि उससे पहले आखिरी वेतन के आधार पर गणना होती थी। इस वजह से यह कटौती न के बराबर होती थी। इसी संशोधन के खिलाफ कर्मचारियों ने केरल हाईकोर्ट में मुकदमा दायर किया था। हाईकोर्ट ने पिछले साल अक्तूबर में ईपीएफओ को कर्मचारियों के पूरे वेतन (मूल व महंगाई भत्ता मिलाकर) से अंशदान काटने का आदेश दिया था।
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