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एनआरसी मसौदे में जिनके नाम नहीं, वह भी कर सकेंगे वोट
Tue, 12 Mar 2019 11:39 AM IST
तिवारी अभिषेक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: तिवारी अभिषेक
Updated Tue, 12 Mar 2019 11:39 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
असम में जिन 40 लाख लोगों के नाम राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के मसौदे में शामिल नहीं हैं, उनके डर को दूर करते हुए चुनाव आयोग ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ किया कि इससे मौजूदा आम चुनाव में इन लोगों के मतदान के अधिकार पर कोई असर नहीं पड़ेगा बशर्ते उनके नाम मतदाता सूची में शामिल हों।
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दरअसल, सर्वोच्च अदालत ने चुनाव आयोग से यह साफ करने को कहा था कि यदि किसी व्यक्ति का नाम 31 जुलाई को प्रकाशित होने वाली अंतिम एनआरसी में शामिल नहीं हुआ लेकिन मतदाता सूची में हुआ तो ऐसी स्थिति में क्या होगा। आयोग की ओर से अदालत में पेश हुए आयोग के सचिव ने बताया कि एनआरसी में नाम शामिल नहीं हो पाने की वजह से संबंधित लोगों के मत देने का अधिकार प्रभावित नहीं होगा। आयोग की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील विकास सिंह ने बताया कि आयोग ने 2014 में भी यह स्पष्ट कर चुका है।
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बता दें कि शीर्ष अदालत ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आठ मार्च को आयोग के सचिव को कोर्ट में हाजिर होने का निर्देश दिया था। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कई श्रेणियों के लोगों कों इस लोकसभा चुनाव में मतदान के अधिकार से वंचित किया जा रहा है।
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अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि सर्वोच्च अदालत को गोपाल सेठ और सुशांत सेन की याचिका पर विचार नहीं करना चाहिए क्योंकि दावों से उलट उनके नाम पिछले तीन साल में कभी भी मतदाता सूची से काटे नहीं गए। याचिका पर अगली सुनवाई 28 मार्च को होगी।
मतदाता सूचियों से निकाले गए नामों का आंकड़ा तलब
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने चुनाव आयोग से यह भी कहा कि वह जनवरी, 2017, 2018 और 2019 के लिए संशोधित मतदाता सूचियों में शामिल किए गए या निकाले गए नामों का आंकड़ा 28 मार्च तक उपलब्ध कराए।