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सुप्रीम कोर्ट ने गर्भपात के लिए दिशा-निर्देश पर सरकार से मांगा जवाब
एजेंसी/ नई दिल्ली
Updated Sun, 15 Oct 2017 09:46 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने कुछ विशेष मामलों में गर्भवती महिला का 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने के लिए स्थायी तंत्र बनाने के वास्ते दिशा-निर्देश बनाने पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।
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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पीठ ने स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा परिषद को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
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बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन से इनकार करते हुए कहा कि यह विधायी क्षेत्र का मामला है। इस कानून में 20 सप्ताह के बाद गर्भपात कराने पर रोक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक की अनुषा रविंद्र की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
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पढ़ें- सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की 26 सप्ताह के गर्भ को गिराने की याचिका
याचिकाकर्ता ने रेप पीड़िता और गर्भ में असामान्य भ्रूण रखने वाली महिलाओं के 20 सप्ताह से ज्यादा के भ्रूण को गिराने के लिए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट 1971 में संशोधन की मांग की है।
अनुषा ने एडवोकेट अभिनव रामकृष्ण के जरिए दायर याचिका में 20 सप्ताह से अधिक के गर्भ को गिराने स्थायी तंत्र बनाने के लिए समिति के गठन की भी अपील की है।