फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Advocate on record alias AoR Signing Authority Case Filing Responsibility

Supreme Court: 'आपका काम साइन करना नहीं, क्या मुकदमा दाखिल हो रहा इसकी भी जवाबदेही'; SC की वकीलों पर टिप्पणी

Fri, 01 Dec 2023 08:35 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति भास्कर Updated Fri, 01 Dec 2023 08:35 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अदालत में दाखिल हो रहे मुकदमों की जवाबदेबी तय करने को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा कि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (AoR) का काम केवल साइन करना नहीं है। क्या मुकदमा दाखिल हो रहा है, इसकी जवाबदेही भी उनकी है।

विज्ञापन
Supreme Court Advocate on record alias AoR Signing Authority Case Filing Responsibility
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट की तरफ से बनाए गए नियमों के अनुसार, केवल एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) के रूप में नामित वकील ही शीर्ष अदालत में किसी पक्ष की पैरवी कर सकते हैं। एक मुकदमे की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड सिर्फ हस्ताक्षर करने वाला प्राधिकारी नहीं हो सकता। अदालत ने साफ किया कि वकीलों (AoR) को शीर्ष अदालत में जो भी दाखिल किया जाता है उसकी जिम्मेदारी लेनी होगी।

विज्ञापन


जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा, अदालत की प्राथमिक चिंता यह है कि एओआर अपने कर्तव्यों का ठीक तरीके से पालन करे। कोर्ट मुकदमों के दाखिल करने पर किसी वकील के गैर-जिम्मेदाराना तरीके से हस्ताक्षर करने की इस प्रणाली को रोकना चाहता है। संविधान के अनुच्छेद 20 और 22 को 'अधिकारातीत भाग 3' घोषित करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दलीलों के समय एओआर से संबंधित कुछ मुद्दे शीर्ष अदालत के समक्ष उठे। 
विज्ञापन


शीर्ष अदालत ने बीते 31 अक्तूबर को अपने आदेश में कहा था, कोर्ट इस तथ्य से परेशान है कि इस अदालत के एक मान्यता प्राप्त एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AoR) ने ऐसी याचिका पर हस्ताक्षर किए होंगे। कोर्ट ने कहा था कि वकील गौरव अग्रवाल भी हमारी सहायता करेंगे। अदालत ने गौरव से जानना चाहा था कि एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड की ऐसी प्रणाली कैसे विकसित की जा सकती है, जहां ऐसे वकील केवल मुकदमों पर हस्ताक्षर करने / अग्रेषित करने वाले प्राधिकारी बनकर नहीं रह जाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन


बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण से संबंधित है। वहीं, अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण से जुड़ा है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 20 और 22 को अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) सहित कुछ अन्य अनुच्छेदों का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की गई है। 


इससे पहले बीते 23 अक्तूबर को इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि अनुच्छेद 20 और 22 को संविधान का उल्लंघन करने वाला घोषित करने के लिए याचिका कैसे दायर की जा सकती है। इस बारे में बताने के लिए कोर्ट ने एक एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (एओआर) सहित दो वकीलों को कोर्ट के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed