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SC ने कहा- 23 वर्षों से बंद JMK के पूर्व कमांडर पर नहीं हो सकता विचार
अमर उजाला ब्यूरो/नई दिल्ली
Updated Tue, 30 Aug 2016 11:47 PM IST
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supreme court of india
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सुप्रीम कोर्ट ने हत्या मामले में 23 वर्षों से जेल में बंद जमायत-उल-मुजाहिद्दीन (जेएम) के पूर्व कमांडर आशिक हुसैन फकतू की दोष सिद्धि और उम्रकैद की सजा को रद्द करने से इनकार कर दिया है। फकतू मानवाधिकार आयोग कार्यकर्ता हृदयनाथ वांचू की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहा है।
न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा तय करने के बाद फकतू की रिट (संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत) याचिका पर विचार नहीं जा सकता। फकतू की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने इस बात को चुनौती दी थी कि क्या टाडा के तहत दर्ज इकबालिया बयान के आधार पर किसी को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दी जा सकती है? साथ ही उनका कहना था कि रिट याचिका के जरिये गलत फैसले को चुनौती दी जा सकती है।
उनका कहना था कि रिट याचिका पर इसलिए विचार किया जाना चाहिए क्योंकि फकतू को दोषी ठहराये जाने का निर्णय न्याय को निष्फल बनाना था। लेकिन तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि फकतू सिर्फ उस स्थिति में यह मांग कर सकता है जब बिना नोटिस जारी कर अदालत ने आदेश पारित किया हो या तब जब फैसले से लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा कम होने की आशंका हो। पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि फैसला सही नहीं है, इस आधार पर रिट याचिकाकर्ता मामले को दोबारा खुलवाने की बात नहीं कर सकता।
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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा तय करने के बाद फकतू की रिट (संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत) याचिका पर विचार नहीं जा सकता। फकतू की पैरवी करने वाले वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी ने इस बात को चुनौती दी थी कि क्या टाडा के तहत दर्ज इकबालिया बयान के आधार पर किसी को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा दी जा सकती है? साथ ही उनका कहना था कि रिट याचिका के जरिये गलत फैसले को चुनौती दी जा सकती है।
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उनका कहना था कि रिट याचिका पर इसलिए विचार किया जाना चाहिए क्योंकि फकतू को दोषी ठहराये जाने का निर्णय न्याय को निष्फल बनाना था। लेकिन तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि फकतू सिर्फ उस स्थिति में यह मांग कर सकता है जब बिना नोटिस जारी कर अदालत ने आदेश पारित किया हो या तब जब फैसले से लोगों का न्यायिक व्यवस्था पर भरोसा कम होने की आशंका हो। पीठ ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि फैसला सही नहीं है, इस आधार पर रिट याचिकाकर्ता मामले को दोबारा खुलवाने की बात नहीं कर सकता।
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हिरासत में रहते हुए पीएचडी की
Supreme Court hearing
- फोटो : Getty Images
करीब 23 सालों से श्रीनगर सेंट्रल जेल में बंद फकतू को वर्ष 2001 में जम्मू की अदालत ने बरी कर दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश को पलट दिया था और फकतू को दोषी ठहराया था।
हालांकि बाद में शीर्ष अदालत फकतू की सजा पर फिर से विचार करने के लिए तैयार हो गई थी। फकतू एकमात्र ऐसा कश्मीरी आतंकवादी है जिसने हिरासत में रहने के दौरान पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। फकतू ने वर्ष 1990 में अपने से पांच साल बड़ी अलगाववादी नेता सईदा आशिया अंदराबी से शादी की थी। इनका बच्चा भी तीन वर्ष तक माता-पिता के साथ जेल में रह चुका है।
हालांकि बाद में शीर्ष अदालत फकतू की सजा पर फिर से विचार करने के लिए तैयार हो गई थी। फकतू एकमात्र ऐसा कश्मीरी आतंकवादी है जिसने हिरासत में रहने के दौरान पीएचडी की डिग्री हासिल की थी। फकतू ने वर्ष 1990 में अपने से पांच साल बड़ी अलगाववादी नेता सईदा आशिया अंदराबी से शादी की थी। इनका बच्चा भी तीन वर्ष तक माता-पिता के साथ जेल में रह चुका है।