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चीन-पाक से निपटने के लिए वायुसेना ने परखी ‘गगनशक्ति’, सुखोई-30 ने पश्चिमी समुद्री तट बरसाए बम

Sun, 15 Apr 2018 05:42 AM IST
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Updated Sun, 15 Apr 2018 05:42 AM IST
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Sukhoi-30 flies by the eastern base and bombs on several bases of the western seashore
Sukhoi SU-30

हिंद महासागर और उससे आगे काफी दूर तक हमले की क्षमताओं को परखने के लिए वायुसेना ने शनिवार को पश्चिमी तट पर अपने हवाई संचालन का अभ्यास किया। इस दौरान सुखोई-30 लड़ाकू विमान ने पूर्वी तट पर स्थित एयरबेस से उड़ान भरकर पश्चिमी समुद्री तटों पर कई टॉरगेट पर हमला किया। विमान ने 2,500 किलोमीटर की उड़ान भरी। इसके बाद सुखोई दक्षिणी एयरबेस पर उतरा। कुल मिलाकर सुखोई ने एक मिशन में 4,000 किमी की दूरी तय की। 

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वायुसेना के मुताबिक, ऐसा आईएल-78 रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट के चलते संभव हो सका, क्योंकि हवा में ही ईंधन भरने के बाद ही इतनी लंबी दूरी को कवर करना संभव है। 8 से 22 अप्रैल तक चलने वाले ‘गगनशक्ति’ युद्धाभ्यास को हाल के दशकों का सबसे बड़ा युद्धाभ्यास माना जा रहा है।
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दरअसल, वायुसेना ने अपनी युद्ध की तैयारियों को परखने के लिए एक बड़ा युद्धाभ्यास शुरू किया है। इसमें चीन और पाकिस्तान की ओर से होने वाले हरसंभव खतरे से निपटने पर विशेष ध्यान रखा गया है। वायुसेना की ओर से जारी एक बयान के अनुसार, गगनशक्ति के तहत पश्चिम में समुद्री सीमा पर हवाई क्षमता के संचालन को परखा गया। ये अभ्यास वायुसेना के प्रभाव का प्रदर्शित करने और भारतीय उपमहाद्वीप में अपने हितों के लिए काफी आगे तक जाकर हमला करने की क्षमता को परखने के लिए किया गया। 
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इस दौरान रक्षा सचिव संजय मित्रा और वाइस चीफ ऑफ एयर स्टॉफ एयर मार्शल एसबी देव ने हरियाणा के सिरसा एयरबेस का दौरा किया और इस अभ्यास का जायजा लिया। दोनों ने सुखोई लड़ाकू विमान में उड़ान भी भरी।


नेवी की भी ली जा रही मदद
इस अभ्यास में नौसेना के निगरानी विमान पी-8आई और वायुसेना के टोही विमान अवॉक्स की मदद ली गई। अधिकारियों ने बताया कि दो सप्ताह के इस अभ्यास का मकसद वायुसेना की पूरी ताकत को परखना है। इसमें लड़ाकू विमानों के बेड़े शामिल हैं। साथ ही वायुसेना की युद्ध क्षमता को परखने के लिए दिन रात की ड्रिल की जा रही है। 

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