फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Subhas Chandra Bose jayanti 2023, 74-year-old official History of INA remains shrouded in mystery

Subhas Chandra Bose: नेताजी के जीवन से जुड़े रहस्य का होगा खुलासा? 74 साल पुरानी अप्रकाशित किताब आई सामने

Mon, 23 Jan 2023 09:41 AM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 23 Jan 2023 09:41 AM IST
सार

 नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जिंदगी के आसपास के रहस्यों में से एक और रहस्य 1949-50 में रक्षा मंत्रालय के लिए 'आईएनए के इतिहास' पर लिखी गई एक पुस्तक के रूप में सामने आया है। जो कि अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

विज्ञापन
Subhas Chandra Bose jayanti 2023, 74-year-old official History of INA remains shrouded in mystery
सुभाष चंद्र बोस(फाइल) - फोटो : Twitter/Adv.Vivekanand Gupta

विस्तार

पूरे देश में आज महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती मनाई जा रही है। लोग उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ उनकी वीरगाथा को याद कर रहे हैं। आज के दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।  लेकिन इन सब के बीच नेताजी की जिंदगी के आसपास के रहस्यों में से एक और रहस्य 1949-50 में रक्षा मंत्रालय के लिए 'आईएनए के इतिहास' पर लिखी गई एक पुस्तक के रूप में सामने आया है। जो कि अब तक प्रकाशित नहीं हो सकी है।

विज्ञापन


दिवंगत  प्रोफेसर प्रतुल चंद्र गुप्ता के नेतृत्व में इतिहासकारों की एक टीम द्वारा संकलित पांडुलिपि को बोस पर शोधकर्ताओं द्वारा जनता के लिए जारी करने का प्रयास केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया गया था कि वह इसे 2011 के जुलाई के अंत तक प्रकाशित कर देगी। लेकिन यह संभव नहीं हो सका।
विज्ञापन


लेकिन अब इसकी प्रति सामने आई है जिसे टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रे ने समाचार एजेंसी पीटीआई से साझा किया है। हालांकि इसमें कितनी सच्चाई है इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। इसमें कहा गया है कि पांडुलिपि के प्रकाशन से इस क्षेत्र में किसी भी देश के साथ भारत के संबंधों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन नेताजी बोस की मृत्यु से संबंधित पृष्ठ (186-191) अधिक विवादास्पद होने की संभावना है। लेकिन इस प्रति में भी यही लिखा है कि सुभाष चंद्र बोस विमान दुर्घटना से जीवित बच गए हों। हालांकि पूरी किताब के प्रकाशन के बाद ही रहस्य का खुलासा हो सकेगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन


टीएमसी सांसद ने कहा कि उनके साथी, आबिद हसन सहित चश्मदीद गवाहों ने गवाही दी है कि बोस की मृत्यु 18 अगस्त, 1945 को ताइपे में एक हवाई दुर्घटना में हुई थी, हालांकि कुछ लोगों को इस पर संदेह है, जिसमें जांच के तीन आधिकारिक आयोगों में से एक शामिल है। रे ने कहा कि मैंने जनवरी 2021 में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी को यह सब इंगित करते हुए लिखा था और पुस्तक के विमोचन की गुहार लगाई थी। आज तक कोई समाधान नहीं हुआ है।उन्होंने यह भी बताया कि निष्कर्ष में यह कथित नोट यह भी कहता है कि  विदेश मंत्रालय को इस तरह के प्रकाशन के लिए राजनीतिक दृष्टिकोण से कोई आपत्ति नहीं हो सकती है।
 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed