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जम्मू-कश्मीर से लौट रहे जवानों की कहानी, होली-दिवाली-करवाचौथ पर नहीं हो पाई घर पर बात
Wed, 19 Aug 2020 10:17 PM IST
Rajeev Rai
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, नई दिल्ली
Published by: Rajeev Rai
Updated Wed, 19 Aug 2020 10:17 PM IST
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जम्मू-कश्मीर में तैनात एक जवान (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
पिछले साल अगस्त में जम्मू-कश्मीर से जब अनुच्छेद 370 हटाया गया तो वहां भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। एक समय ऐसा भी रहा, जब सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को मिलाकर कश्मीर घाटी में दो लाख से ज्यादा सुरक्षा कर्मी तैनात थे। चूंकि वहां इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी गई थी, इसलिए बहुत से जवानों को होली और दीवाली या करवाचौथ जैसे त्योहारों पर अपने परिजनों से बात करने का मौका नहीं मिल सका था। हर यूनिट में एक सेटेलाइट फोन उपलब्ध कराया गया, लेकिन वहां लंबी कतार लगी रहती थी। करवाचौथ जैसे त्योहार के दिन ड्यूटी पर तैनात जवानों के फोन खिलौना बना रहे। न कॉल आ सकती थी और न जा सकती थी।
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बता दें कि उस दौरान घाटी में विरोध प्रदर्शन, आतंकी हमलों और पथराव जैसी घटनाओं को रोकने के लिए संचार सेवाओं को बंद कर दिया गया था। कश्मीर घाटी में तैनात जवानों की हालत यह रहती थी कि वे शाम को या सुबह अपनी ड्यूटी खत्म कर सीधे फोन के पास पहुंचकर लाइन में लग जाते थे। वर्दी बदलनी हो या नहाना हो, ये सब काम बाद में होते थे। पहले हर जवान अपने घर बात करने के लिए लालायित रहता था। उस वक्त भी मुश्किल से बीस तीस फीसदी जवानों की बात हो पाती थी। किसी का फोन अगर बीच में कट गया तो उसे दोबारा से लाइन में लगना पड़ता था। ऐसे में वह लंबा इंतजार करता या अपनी बैरक में चला जाता था।
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अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर पहुंचे सीआरपीएफ के एक अधिकारी बताते हैं कि उस वक्त जवान बड़े परेशान भी रहते थे। उसका कारण ड्यूटी नहीं थी, बल्कि फोन था। वे ड्यूटी के दौरान भी इस प्रयास में लगे रहते थे कि कहीं से किसी लैंडलाइन फोन का जुगाड़ हो जाए। अगर वे किसी सरकारी भवन के आसपास तैनात होते, तो वहां लैंड लाइन फोन चल रहा है या नहीं, ये सबसे पहले पूछते थे। यूनिट में जो फोन मुहैया कराए गए थे, उन पर नंबर आने में कई घंटे लग जाते थे। रेंज की समस्या भी बनी रहती थी। बातचीत के दौरान फोन कटना सामान्य बात थी। इन सबके बावजूद जवानों ने बहादुरी से अपनी ड्यूटी को अंजाम दिया।
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अब हो सकता है कि पिछले साल अगस्त में यहां आए जवानों को रोक लिया जाए। उनकी बजाए पहले से तैनात जवानों को जम्मू-कश्मीर से रवाना किया जाए।अभी सीआरपीएफ की 40, बीएसएफ की 20, एसएसबी की 20 और सीआईएसएफ की 20 कंपनी वापस बुलाई जा रही है।