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11 मिनट में 12 किलोमीटर का सफर तय करने वाले एक 'दिल' की कहानी

Thu, 02 Jun 2016 05:10 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 02 Jun 2016 05:10 PM IST
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story of a heart that moves 12 km in 11 minutes
बेंगलुरु पुलिस ने ग्रीन कॅारिडोर बनाकर सिर्फ 11 मिनट में एक अस्पताल में पहुंचाया 'दिल'

बेंगलुरु पुलिस ने एक अस्पताल से सिर्फ एक घंटे पहले मिली सुचना पर ग्रीन कॅारिडोर बनाकर सिर्फ 11 मिनट में 'दिल' पहुंचाकर एक और मानदण्ड स्थापित कर दिया है। जिस वक्त इस ग्रीन कॅारिडोर की मांग आयी थी , बेंगलुरु की सड़कों पर उस समय यातायात काफी व्यस्त था।

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विक्टोरिया अस्पताल से 12 किलोमीटर दूर एमएस रमैया नारायण अस्पताल तक इस ग्रीन कॅारिडोर को बनाने में लगभग 35 ट्रैफिक पुलिस लगे। इस ग्रीन कॅारिडोर के जरिए सिर्फ 11 मिनट में एमएस रमैया नारायण अस्पताल में भर्ती एक 47 वर्षीय महिला को हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए हार्ट पहुंचाया गया।

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बेंगलुरु के रामानगर में रहने वाले आटो चालक अभिषेक बीतें 29 मई को एक दुर्घटना का शिकार हो गए थे जिससे उनके सिर में गहरी चोटें आयी थी। इस दुर्घटना के बाद उन्हें PMSSY अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां डॅाक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। अभिषेक को उसके बाद विक्टोरिया अस्पतास के ट्रामा सेंटर में शिफ्ट किया गया। इसके बाद उनके परिजनों ने उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को दान करने का फैसला किया। अस्पताल ने तुरंत इसकी सुचना चमराजपेट इलाके के पुलिस को दी।

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चमराजपेट इलाके के यातायात पुलिस इंसपेक्टर ने इसकी सुचना कंट्रोल रुम को दी और तुरंत ग्रीन कॅारिडोर बनाने में जुट गये। यातायात डीसीपी एस गिरीश ने बताया कि, "ग्रीन कॅारिडोर बनाने के लिए हमें सिर्फ एक घंटे दिए गए थे। बेंगलुरु की सड़को पर उस समय यातायात काफी व्यस्त रहता है। हमने तुरंत छह ट्रैफिक इंसपेक्टर सहित करीब 35 पुलिस वालों को इस काम पर लगाया"। अभिषेक का 'दिल' लेकर ऐबुंलेस विक्टोरिया अस्पताल से 10:35 पर निकली और ग्रीन कॅारिडोर होते ह्ए सिर्फ 11 मिनट में 10:46 पर एमएस रमैया नारायण अस्पताल पहुंच गयी।



47 साल की महिला जिन्हें अभिषेक का दिल दिया गया, डायलेटेड कार्डियो मायपथी बीमारी से जुझ रहीं थी। उनके बेटे ने बताया कि, "पिछले दो वर्षों से मेरी मां बीमार है, उन्हें दिल की बीमारी है। वे चल नहीं सकती क्योंकि इनकी सांस रुक जाती है। मैं खुश हूं कि अब वह सामान्य जीवन जी सकेंगी। अभिषेक के परिजनों और बेंगलुरु यातायात पुलिस के वजह से उनकी जान बच सकी, मैं उनका कर्जदार हूं"।

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