डीबीटी अपनाने और इसे आधार से जोड़ने पर राज्य सहमत
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जल्द ही केंद्र सरकार की तरह राज्यों की ओर से भी मिलने वाली सभी तरह की सहायता, पेंशन जैसी सुविधाओं का लाभ प्रत्यक्ष नगद हस्तांतरण (डीबीटी) के जरिये ही हासिल हो पाएगा। शनिवार को अंतरराज्यीय परिषद की बैठक में सभी राज्यों ने केंद्र सरकार के डीबीटी का इस्तेमाल करने और इसके लिए आधार को पहचान पत्र बनाने संबंधी प्रारूप पर अपनी सहमति दे दी।
सभी राज्य अपनी तमाम योजनाओं का भुगतान चरणबद्ध तरीके से डीबीटी के माध्यम से करने पर राजी हो गए हैं। गौरतलब है कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, आंध्र प्रदेश सहित आधा दर्जन राज्यों ने अपनी सब्सिडी से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत डीबीटी से जोड़ा था। इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों ने भी सब्सिडी देने के लिए यही रास्ता अपनाया था।
दर्जन भर राज्यों ने चरणबद्ध तरीके से डीबीटी अपनाने पर सहमति दी
बैठक में प्रधानमंत्री ने डीबीटी के लाभ गिनाते हुए इन राज्यों को भ्रष्टाचार पर नकेल कसने में मिली मदद और लाखों की संख्या में फर्जी नाम से लाभ हासिल करने वालों की पहचान होने का हवाला दिया था। बैठक में डीबीटी को पायलट प्रोजेक्ट की तर्ज पर अपनाने वाले आधा दर्जन राज्यों ने सभी लाभ पहुंचाने वाली योजनाओं को डीबीटी से तत्काल जोड़ने पर सहमति दी।
जबकि बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल सहित दर्जन भर राज्यों ने चरणबद्ध तरीके से डीबीटी अपनाने पर सहमति दी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अपनी 17 येाजनाओं और रसोई गैस की सब्सिडी को डीबीटी से जोड़ने के कारण 36500 करोड़ रुपये की बचत का दावा किया है। इस क्रम में हरियाणा को केरोसीन हासिल करने वाले 6 लाख नकली परिवारों, 40 फीसदी फर्जी छात्रवृत्ति और डेढ़ लाख फर्जी पेंशन से निजात मिली।