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कश्मीरी पंडितों की वापसी में खलल: पूजा पाठ के लिए पहुंचे तो फिर डराने लगे आतंकी, मंत्रियों के दौरे और तालिबान से क्या है इसका कनेक्शन

Thu, 07 Oct 2021 04:50 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Thu, 07 Oct 2021 04:50 PM IST
सार

गृह मंत्री अमित शाह 23 से 25 अक्तूबर तक जम्मू कश्मीर के दौरे पर रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि वे आजादी के अमृत महोत्सव के प्रतिष्ठित समारोह में शामिल होने वाले हैं। लेकिन 48 घंटे में पांच हत्याएं होने से घाटी में भय और आतंक का माहौल बन गया है। आतंकियों की कायराना हरकतें जारी है।    

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Srinagar Terror attack what is the connection with Kashmiri Pandits returns in kashmir visit of ministers and taliban
कश्मीरी पंडित - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में आतंकियों का निर्दोष नागरिकों को शिकार बनाने का सिलसिला जारी है। आज श्रीनगर के ईदगाह इलाके में आतंकी हमले में प्रिंसिपल और टीचर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। आतंकियों ने स्कूल में घुसकर यह हत्या की। पिछले पांच दिनों में सात नागरिकों की हत्या की जा चुकी है। कहा जा रहा है कि कश्मीरी पंडितों की घाटी में फिर से बसाने और उनकी संपत्तियों से कब्जा हटाने की कवायद के कारण ही आतंकी एक बार फिर उन्हें निशाने पर लेने लगे हैं।
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केंद्र को चुनौती देने के समान
जम्मू-कश्मीर के हालत को समझने वाले जानकारों का कहना है कि 70 मंत्रियों और गृह मंत्री अमित शाह के दौरे से पहले ऐसी घटनाओं का बढ़ना एक तरह से केंद्र सरकार को चुनौती देने के समान है। क्योंकि केंद्र सरकार का यह कहना है कि वह विकास के रास्ते जम्मू-कश्मीर में शांति और अमन-चैन की बहाली की कोशिश कर रही है और कश्मीरी पंडितों की वापसी के लिए उन्हें सुरक्षा देने के वादे कर रही है। जानकार यह भी मानते हैं कि कहीं न कहीं जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव में हो रही देरी से भी आतंकियों के हौसले बुलंद होने लगे हैं।
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पांच अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को हटाने के बाद यह शाह की पहली यात्रा है। मिली जानकारी के मुताबिक अमित शाह के दौरे से पहले 70 केंद्रीय मंत्री केंद्र शासित क्षेत्र का दौरा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन मंत्रियों को निर्देश दिया है कि वे जनता में विश्वास बहाली के लिए दूर-दराज वाले इलाकों में जाएं और जनता से सीधा संपर्क साधे। मंत्रियों का यह दौरा सितंबर के महीने में शुरू हुआ था।
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बताया जाता है कि इस दौरे के दौरान मंत्रियों को इस बात की भी जांच करनी है कि केंद्र में विकास से जुड़े कितने कार्य पूरे हुए हैं। वहीं शाह जम्मू और श्रीनगर की दो दिवसीय यात्रा के दौरान सुरक्षा स्थिति और विकास संबंधी परियोजनाओं की समीक्षा करेंगे। सूत्रों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर जाने वाले सभी मंत्रियों को गृह मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय को रिपोर्ट देनी होगी। पिछले साल जनवरी में 36 मंत्रियों ने राज्य का दौरा किया था।
 

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श्रीनगर में स्कूल पर आतंकी हमला - फोटो : Amar Ujala Digital
मेजर जनरल ए जे बी जैनी (सेवानिवृत्त) का कहना है कि इस आतंकी हमले का सीधा सा कनेक्शन केंद्र सरकार को चुनौती देने जैसा है। राज्य को विशेष दर्जा देने वाले धारा 370 को खत्म करके सरकार ने जो उपलब्धि हासिल की, सीमा पार से होने वाले आतंक पर जिस तरह काबू पाया गया और अलगाववादियों की हिम्मत जिस तरह से टूटी है उस वजह से उनके अंदर एक छटपटाहट है, खासतौर पर कश्मीरी पंडितों के घाटी में लौटने की खबरों ने उन्हें बेचैन कर दिया है। इसलिए आंतकी संगठन गृह मंत्री के दौरे से पहले यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं उन्होंने अभी जम्मू-कश्मीर का चैप्टर बंद नहीं किया है।

तालिबान से भी हो सकता है तालमेल
वहीं मेजर जनरल एस वी पी सिंह (सेवानिवृत्त) को इन आतंकी हमलों के पीछे तालिबान का भी कुछ हाथ दिखता है। उनका कहना है कि अफगानिस्तान में तालिबान और हक्कानी ग्रूप शासन कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान को शह मिल गई है और इसलिए देखने में आ रहा है कि कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं बढ़ी हैं। कुछ दिनों पहले एक आतंकी पकड़ा भी गया। जिससे कई इनपुट भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि छह आतंकी और कल पकड़े गए हैं। इन सब बातों को जोड़कर देखकर ऐसा लग रहा है कि इन आतंकियों का तालिबान से तालमेल चल रहा है। इन हमलों में पाकिस्तान का जैश ए मोहम्मद और लश्कर ए तैयबा भी शामिल है।

उन्होंने बताया कि इस साल कश्मीर घाटी में 75 आतंकी घटनाएं हुई हैं, जिसमें से 15 16 श्रीनगर में ही हुए हैं। आतंकी जानबूझ कर श्रीनगर को टारगेट कर रहे हैं। आतंकियों में शिक्षित युवा भी शामिल हैं। वे इस तरह की घटनाओं को अंजाम देकर समाज को डराने की कोशिश कर रही है। आज जो घटना हुई है उसमें गैर मुस्लिम को लक्ष्य बनाया गया और वे ऐसा जानबूझ कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों को यह बेहद गंभीरता से लेनी चाहिए।

एस वी पी सिंह यह भी मानते हैं कि कश्मीरी पंडितों को घाटी में फिर से बसाने और नया कश्मीर बनाने की केंद्र सरकार की कोशिश के कारण भी आतंकी इस तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 2014 में जब से भाजपा की सरकार आई है तब से कश्मीर पंडितों को यह उम्मीद थी कि अब वे घर वापसी कर सकते हैं।

उनकी यह उम्मीद और बढ़ गई जब अनुच्छेद 370 हटाया गया। सरकार उन्हें बसाने की कोशिश कर रही है जबकि आतंकी नहीं चाहते कि वे दोबारा बसें। वहीं वे कश्मीर में होने वाले विकास परियोजनाओं को देखकर भी बौखला रहे हैं कि यदि इससे राज्य में रोजगार बढ़ा तो आतंकियों को पनाह देने वाले कम हो जाएंगे। साथ ही वे परिसीमन की प्रक्रिया को भी बाधित करना चाहते है।
 

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श्रीनगर में नृत्य करते कश्मीरी पंडित - फोटो : पीटीआई
हमले का मकसद कश्मीर पंडितों में भय पैदा करना 
कश्मीर के एक स्थानीय पत्रकार ने नाम नहीं लिखे जाने की शर्त पर यह बताया कि मंत्रियो के दौरों के साथ-साथ इन आतंकी घटनाओं के पीछे कश्मीरी पंडितों और सरकार में डर पैदा करना है। कोरोना के बाद बड़ी संख्या में कश्मीर पंडित देश के अलग-अलग हिस्सों से अपने घर आए। उन्होंने अपने घर और कई मंदिरों में पूजा पाठ किए। जनमाष्टमी में बड़े-बड़े हवन हुए हैं। लगभग तीन हजार कश्मीरी पंडित, जो 1990 के दशक में घाटी में उग्रवाद के बाद पलायन कर गए थे,  अगस्त को मध्य कश्मीर के गांदरबल में खीर भवानी मंदिर के वार्षिक उत्सव में शामिल हुए थे। 

उनका कहना है क सरकार ने कश्मीरी पंडितों के जमीन पर कब्जा छुडाने के लिए एक पोर्टल बनाया है, जिसका बहुत अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। जगह-जगह हिन्दुस्तान के झंडे लहरा रहे हैं। ये सारे कदम कश्मीरी पंडितों और वहां की अवाम में शांति और सुरक्षा का माहौल पैदा करने के लिए उठाए गए लेकिन आतंकी नहीं चाहते कि कश्मीरी पंडित फिर घाटी में लौटें इसिलए वे 90 के दशक वाले हालात पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। कश्मीरी पंडितों मे आतंक पैदा करने के लिए ऐसी घटनाएं हो रही है।

स्थानीय पत्रकार का यह भी मानना है कि जम्मू-कश्मीर में चुनाव नहीं होने से वहां की राजनीतिक पार्टियों के साथ-साथ अवाम में भी बेचैनी है। केंद्र सरकार बेशक हाइवेज, टनल्स जैसे बुनियादी विकास कर रही है, भ्रष्टाचार दूर करने की कोशिश कर रही है, लेकिन चुनाव प्रक्रिया का इंतजार सबको है और ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार की तरफ से जनता से सीधा संवाद नहीं हो रहा। 

 

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जम्मू-कश्मीर में तैनात सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
जैनी भी मानते हैं कि केंद्र सरकार को जल्द से जल्द राज्य में सामान्य हालत की बहाली करनी होगी, मतलब कि देश के लोकतांत्रिक सेटअप को बनाए रखने के लिए जल्द विधानसभा चुनाव कराने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि पाकिस्तान का अस्तित्व हेड इंडिया एंड ब्लीड इंडिया अवधारणा से है। अब पाकिस्तान में समस्या यह हो रही है कि वहां आंतरिक अशांति पैदा हो रही है और दूसरी तरफ तालिबान उसे दबा रहा है। वे पाकिस्तान की आम जनता का ध्यान बंटाने की कोशिश कर रहे हैं। 

कई आतंकी कैंप सक्रिय
एस वी पी सिंह बताते हैं कि सर्दियों में इस तरह की घटनाएं और भी बढ़ सकती हैं इसलिए सारी सुरक्षा एजेंसियों को और चौकन्ना होना पड़ेगा। उनका यह भी कहना है कि पीओके में कई आतंकी कैंप फिर से सक्रिय हो चुके हैं। जब इस तरह से आतंकी सक्रिय हो रहे हैं तो हमारी सरकार को बिना देर किए इन आतंकी कैंपों को नष्ट कर देना चाहिए।  यदि यह कैंप चलते रहें तो निश्चित तौर पर हमें नुकसान पहुंचाएंगे। वैसे सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हैं और उन्होंने कई आतंकी संगठनों की गाड़िया भी जब्त की हैं। 

सर्दियों में बढ़ सकती है इस तरह की घटनाएं
वहीं जैनी भी मानते हैं कि  सुरक्षाबलों को सीमापार और सतर्कता बढ़ानी होगी क्योंकि सर्दियों में इस तरह की घटनाएं और बढ़ेंगी। आतंकी संगठनों में एक चलन देखा गया है कि वे वे चाहते हैं कि सर्दी से पहले उनके लोग घाटी में आ जाएं। ताकि सर्दियों के वक्त वे अपनी खुराफात कर सकें। इसलिए सुरक्षा एजेंसियों को और सख्ती बरतनी होगी। 

 
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