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जज ने कहा, राजनीतिक प्रतिशोध का दावा करके ब्रिटेन में नहीं रह सकता विजय माल्या
Sun, 20 Jan 2019 10:25 AM IST
अजय सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अजय सिंह
Updated Sun, 20 Jan 2019 10:25 AM IST
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विजय माल्या
विशेष जज एमएस आजमी ने विजय माल्या के उस बयान को खारिज कर दिया है जिसमें उसने कहा था कि केंद्र सरकार ने उसके खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध छेड़ा हुआ है। इसी वजह से उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई और जांच शुरू की हुई है। जज ने ब्रिटेन में रहने के पीछे दिए इस आधार को नकार दिया है।
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अपने 55 पन्नों के आदेश में आजमी ने माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया। उन्होंने कहा, 'इस संबंध में तर्क देकर खुद को कानून का पालन करने वाले नागरिक के तौर पर पेश करना कपोल कल्पना मात्र है। अभियोजन पक्ष ने उनके खिलाफ जो बयान दिया है वह किसी राजनीतिक कारणों है, इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित नहीं किया जाना चाहिए।'
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विशेष अदालत ने 5 जनवरी को माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया था और कहा था कि उसकी संपत्तियों को जब्त करने के आदेश पर 5 फरवरी को फैसला लिया जाएगा। यह पहला मौका था जब नए धनशोधन रोकथाम कानून (पीएमएलए) कानून के अतंर्गत किसी के खिलाफ ऐसा आदेश पारित किया गया है। प्रवर्तन निदेशायल ने इस कानून के तहत विशेष अदालत में याचिका दायर की थी।
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विशेष अदालत में माल्या के वकील ने दावा किया था कि वह मार्च 2016 में एक निर्धारित बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत से बाहर गया था। वह गुप्त, अवैध या गिरफ्तारी से बचने के लिए जल्दबाजी में देश से बाहर नहीं गया था। हालांकि कोर्ट ने इस बात को माना कि उस समय तक उसके खिलाफ मामला दर्ज हो चुका था। इसपर उसके वकील ने कहा कि वह भारत से बाहर एक पूर्व निर्धारित बैठक में हिस्सा लेने के लिए गया था और वह कानून का पालन करने वाला नागरिक है। उसने अपनी यात्रा के बारे में संबंधित अधिकारियों को बताया था। ब्रिटेन की एक अदालत ने दिसंबर में माल्या के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी।
विशेष न्यायाधीश ने कहा कि माल्या ने इस बाते के संबंध में कोई सबूत पेश नहीं किए हैं जिससे यह साबित होता हो कि उसपर आरोप लगाकर कौन सा राजनीतिक फायदा मिल रहा है या उसे क्यों अपराधी बनाया जा रहा है। यह बयान केवल कल्पना के आधार पर हैं। इससे पहले बीते साल 26 दिसंबर को कोर्ट ने फैसला 5 जनवरी तक के लिए सुरक्षित कर दिया था। वहीं माल्या ने अदालत को बताया था कि वह आर्थिक भगोड़ा नहीं है। साथ ही उसने कहा था कि वह मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध में भी शामिल नहीं है।