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अच्छे दिन लंबा सफर है, चलते रहिए आता रहेगा: राठौड़
शशिधर पाठक, संजय मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 01 Jun 2017 06:38 PM IST
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राज्यवर्द्धन सिंह राठौड़
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सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर बड़ी बेबाकी से राय रखते हैं। निशानेबाजी में चैंपियन रहे राठौर सेना की पृष्ठभूमि से आते हैं। केन्द्र सरकार के कामकाज के तीन साल पूरे होने पर उन्होंने अमर उजाला के विशेष संवाददाता शशिधर पाठक और संजय मिश्र से विस्तार से चर्चा की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
केन्द्र सरकार ने कामकाज के तीन साल पूरे कर लिए। इसके लिए सादर बधाई। सरकार इसका जश्न मना रही है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: तीन साल का कार्यक्रम तो एक बहाना है। हम ऐसे अवसर ढूंढते रहते हैं। चाहे वह 15 अगस्त हो, गणतंत्र दिवस, संसद सत्र हो या बजट। हमारी कोशिश रहती है कि सरकार की योजना संवाद के जरिए जन-जन तक पहुंचे, ताकि देश का हर नागरिक इसका लाभ उठा सके। जन प्रतिनिधियों से देश की जनता का सीधा संवाद हो सके और सरकार को जनता की सीधी प्रतिक्रिया मिल सके। प्रधानमंत्री खुद मौजूदा सरकार को गरीबों की सरकार कहते हैं और सरकार खुद सीधे जनता के साथ संवाद कर रही है। इससे संवाद का क्रम नहीं टूटता।
यह तो ठीक है, लेकिन सरकार ने तीन सालों में जो काम किए हैं, उनमें तीन प्रमुख कौन से हैं। क्योंकि विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार केवल काम का ढिंढोरा पीट रही है। बेहतरी के नाम पर जमीन पर कहीं कुछ नहीं है?
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कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: कौन क्या कह रहा है, जनता समझती है। सरकार का इरादा नेक और जनता के प्रति जवाबदेह है। सत्ता में आने के बाद केन्द्र की मोदी सरकार ने भ्रष्ट्राचार पर नकेल कसी है। रुपये का विमुद्रीकरण, काले धन की जांच के लिए विशेषदल, करदाताओं का दायरा बढ़ाना, कालाधन बनने की रफ्तार धीमी करना सरकार का पहला मुख्य काम रहा है। सरकार का दूसरा लक्ष्य युवाओं को दिशा देना है। इस क्रम में शिक्षा, हुनर और अवसर सरकार का मोटो है। एम्स, आईआईएम जैसे नये संस्थान, युवाओं में हुनर के लिए सरकार के खर्च पर कौशल विकास और इसके लिए कौशल विकास मंत्रालय का गठन हुआ है। रहा सवाल अवसर का तो अब देश का गरीब रोजगार नहीं ढूंढ रहा है, बल्कि वह सरकार की मुद्रा योजना के तहत कम ब्याज का लोन लेकर लोगों को रोजगार दे रहा है। इसके अंतर्गत साढ़े तीन लाख करोड़ के ऋण बांटे जा चुके हैं।
सरकार का तीसरा मुख्य ध्यान गांव और गरीब पर है। गांव में साधन पहुंचाना, सिंचाई के लिए पानी, बिजली, यूरिया, मौसम से जुड़ी जानकारी, मंडी योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत गांव को मुख्य सडक़ से जोडऩा, महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखकर पांच करोड़ मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन का वादा और अब तक दो करोड़ कनेक्शन का बांटा जाना हमारे के प्रमुख कायों में है।
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केन्द्र सरकार ने कामकाज के तीन साल पूरे कर लिए। इसके लिए सादर बधाई। सरकार इसका जश्न मना रही है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: तीन साल का कार्यक्रम तो एक बहाना है। हम ऐसे अवसर ढूंढते रहते हैं। चाहे वह 15 अगस्त हो, गणतंत्र दिवस, संसद सत्र हो या बजट। हमारी कोशिश रहती है कि सरकार की योजना संवाद के जरिए जन-जन तक पहुंचे, ताकि देश का हर नागरिक इसका लाभ उठा सके। जन प्रतिनिधियों से देश की जनता का सीधा संवाद हो सके और सरकार को जनता की सीधी प्रतिक्रिया मिल सके। प्रधानमंत्री खुद मौजूदा सरकार को गरीबों की सरकार कहते हैं और सरकार खुद सीधे जनता के साथ संवाद कर रही है। इससे संवाद का क्रम नहीं टूटता।
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यह तो ठीक है, लेकिन सरकार ने तीन सालों में जो काम किए हैं, उनमें तीन प्रमुख कौन से हैं। क्योंकि विपक्ष लगातार आरोप लगा रहा है कि सरकार केवल काम का ढिंढोरा पीट रही है। बेहतरी के नाम पर जमीन पर कहीं कुछ नहीं है?
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कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: कौन क्या कह रहा है, जनता समझती है। सरकार का इरादा नेक और जनता के प्रति जवाबदेह है। सत्ता में आने के बाद केन्द्र की मोदी सरकार ने भ्रष्ट्राचार पर नकेल कसी है। रुपये का विमुद्रीकरण, काले धन की जांच के लिए विशेषदल, करदाताओं का दायरा बढ़ाना, कालाधन बनने की रफ्तार धीमी करना सरकार का पहला मुख्य काम रहा है। सरकार का दूसरा लक्ष्य युवाओं को दिशा देना है। इस क्रम में शिक्षा, हुनर और अवसर सरकार का मोटो है। एम्स, आईआईएम जैसे नये संस्थान, युवाओं में हुनर के लिए सरकार के खर्च पर कौशल विकास और इसके लिए कौशल विकास मंत्रालय का गठन हुआ है। रहा सवाल अवसर का तो अब देश का गरीब रोजगार नहीं ढूंढ रहा है, बल्कि वह सरकार की मुद्रा योजना के तहत कम ब्याज का लोन लेकर लोगों को रोजगार दे रहा है। इसके अंतर्गत साढ़े तीन लाख करोड़ के ऋण बांटे जा चुके हैं।
सरकार का तीसरा मुख्य ध्यान गांव और गरीब पर है। गांव में साधन पहुंचाना, सिंचाई के लिए पानी, बिजली, यूरिया, मौसम से जुड़ी जानकारी, मंडी योजना का लाभ दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सडक़ योजना के तहत गांव को मुख्य सडक़ से जोडऩा, महिलाओं के स्वास्थ्य का ध्यान रखकर पांच करोड़ मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन का वादा और अब तक दो करोड़ कनेक्शन का बांटा जाना हमारे के प्रमुख कायों में है।
अभी सरकार के दो साल बचे हैं। क्या है सरकार सभी योजनाओं को पूरा कर लेगी। आगे लक्ष्य क्या हैं, क्योंकि विपक्ष अच्छे दिन को लेकर लगातार तंज कस रहा है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: प्रधानमंत्री का लक्ष्य 2019 तक का नहीं है, इससे आगे का है। इसससे साबित होता है कि हम सभी योजनाओं को अगले दो साल में पूरा नहीं कर पाएंगे। अच्छे दिन एक सफर है। लंबा रास्ता है। जैसे-जैसे हमारे दिन अच्छे होते रहेंगे, हमें और अच्छे दिन की कामना रहेगी। सरकार उसको भी पूरा करेगी। हम एक थीम बनाकर सुनियोजित तरीके से काम कर रहे हैं और विश्वास दिलाते हैं कि जन आकांक्षाओं को पूरा भी करेंगे। सरकार हर क्षेत्र में नया कर रही है। ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तेल, गैस, वैकल्पिक ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा समेत सभी विकल्पों को अपना रही है। इसलिए अच्छे दिन का सफर लंबा चलेगा।
एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि सरकार नरेटिव चेंज कर रही है? विरोधी का काम है कि सरकार की खामियां गिनाना, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि वह कुछ ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा भरा है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: देखिए, विपक्ष ने 70 साल में जो काले कारनामे किए हैं, उसे धोने में समय लगता है। इन काले धब्बों को लगातार धोने की कोशिश जारी है और हम यकीन दिलाते हैं कि धब्बों को धोकर रहेंगे। मुद्रा योजना हो या सडक़ निर्माण की रफ्तार सरकार सांख्यिकी आंकड़ों के साथ आगे बढ़ रही है। एक अरब देश वासियों को लग रहा था इस देश में कुछ नहीं हो सकता और कहां एक सरकार और एक व्यक्ति(प्रधानमंत्री मोदी) ने इसे उनकी सकारात्मक सोच में बदल दिया है। लोगों को लगने लगा है कि बहुत कुछ हो सकता है। यही अपने आप में काफी बड़ी बात है।
हम फिर सवाल दोहराना चाहेंगे? सरकार जिस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक या फिर सीमापार सैनिकों की गोलीबारी की कार्रवाई को लेकर सामने आ रही है, कहा जा रहा है कि यह तो पहले भी होता था। आप सेना की पृष्ठभूमि से हैं, आपका क्या कहना है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: पहले और अब में बड़ा फर्क है। पहले सेना सैन्य आपरेशन को अपने रिस्क(दम) पर अंजाम देती थी। सीमापार की सैन्य कार्रवाई(सर्जिकल स्ट्राइक) के लिए जाने वाला सैनिक जान जोखिम पर लेकर जाता और देश की रक्षा करता था। आज पूरी केन्द्र सरकार राजनैतिक इच्छा शक्ति के साथ सेना के साथ खड़ी है। हर सैनिक को सरकार का भरोसा हासिल है कि वह जोखिम लेकर सैन्य आपरेशन पर जा रहा है और केन्द्र सरकार पूरी हिफाजत के साथ उसके वापस आने के लिए किए जाने वाले प्रयास के प्रति प्रतिबद्ध है। इसका सेना के मनोबल पर सीधा असर पड़ता है।
एक मुद्दा कश्मीर का भी है। काफी ज्वलंत मुद्दा है। कहा जा रहा है कि सरकार संतुलित नहीं पा रही है। आपकी क्या राय है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: पहले से अब में बदलाव आया है। एक सोशल मीडिया आ गया है। इसकी कोई सीमा नहीं है। कोई व्यक्ति कहीं से भी बैठकर अराजकता फैला सकता है। ऐसे ही टीवी देखिए तो लगता है कश्मीर में केवल पत्थरबाजी हो रही है,लेकिन ऐसा नहीं है। वहां स्थिति नियंत्रण में है। यह एक पुरानी समस्या और नेहरू के युग का काला धब्बा है। सरकार इसको भी धोकर रहेगी। केन्द्र सरकार कश्मीर समस्या पर बहुत सुनियोजित तरीके से रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है।
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: प्रधानमंत्री का लक्ष्य 2019 तक का नहीं है, इससे आगे का है। इसससे साबित होता है कि हम सभी योजनाओं को अगले दो साल में पूरा नहीं कर पाएंगे। अच्छे दिन एक सफर है। लंबा रास्ता है। जैसे-जैसे हमारे दिन अच्छे होते रहेंगे, हमें और अच्छे दिन की कामना रहेगी। सरकार उसको भी पूरा करेगी। हम एक थीम बनाकर सुनियोजित तरीके से काम कर रहे हैं और विश्वास दिलाते हैं कि जन आकांक्षाओं को पूरा भी करेंगे। सरकार हर क्षेत्र में नया कर रही है। ऊर्जा सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए तेल, गैस, वैकल्पिक ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा समेत सभी विकल्पों को अपना रही है। इसलिए अच्छे दिन का सफर लंबा चलेगा।
एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि सरकार नरेटिव चेंज कर रही है? विरोधी का काम है कि सरकार की खामियां गिनाना, लेकिन कहीं ऐसा तो नहीं कि वह कुछ ज्यादा नकारात्मक ऊर्जा भरा है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: देखिए, विपक्ष ने 70 साल में जो काले कारनामे किए हैं, उसे धोने में समय लगता है। इन काले धब्बों को लगातार धोने की कोशिश जारी है और हम यकीन दिलाते हैं कि धब्बों को धोकर रहेंगे। मुद्रा योजना हो या सडक़ निर्माण की रफ्तार सरकार सांख्यिकी आंकड़ों के साथ आगे बढ़ रही है। एक अरब देश वासियों को लग रहा था इस देश में कुछ नहीं हो सकता और कहां एक सरकार और एक व्यक्ति(प्रधानमंत्री मोदी) ने इसे उनकी सकारात्मक सोच में बदल दिया है। लोगों को लगने लगा है कि बहुत कुछ हो सकता है। यही अपने आप में काफी बड़ी बात है।
हम फिर सवाल दोहराना चाहेंगे? सरकार जिस तरह से सर्जिकल स्ट्राइक या फिर सीमापार सैनिकों की गोलीबारी की कार्रवाई को लेकर सामने आ रही है, कहा जा रहा है कि यह तो पहले भी होता था। आप सेना की पृष्ठभूमि से हैं, आपका क्या कहना है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: पहले और अब में बड़ा फर्क है। पहले सेना सैन्य आपरेशन को अपने रिस्क(दम) पर अंजाम देती थी। सीमापार की सैन्य कार्रवाई(सर्जिकल स्ट्राइक) के लिए जाने वाला सैनिक जान जोखिम पर लेकर जाता और देश की रक्षा करता था। आज पूरी केन्द्र सरकार राजनैतिक इच्छा शक्ति के साथ सेना के साथ खड़ी है। हर सैनिक को सरकार का भरोसा हासिल है कि वह जोखिम लेकर सैन्य आपरेशन पर जा रहा है और केन्द्र सरकार पूरी हिफाजत के साथ उसके वापस आने के लिए किए जाने वाले प्रयास के प्रति प्रतिबद्ध है। इसका सेना के मनोबल पर सीधा असर पड़ता है।
एक मुद्दा कश्मीर का भी है। काफी ज्वलंत मुद्दा है। कहा जा रहा है कि सरकार संतुलित नहीं पा रही है। आपकी क्या राय है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: पहले से अब में बदलाव आया है। एक सोशल मीडिया आ गया है। इसकी कोई सीमा नहीं है। कोई व्यक्ति कहीं से भी बैठकर अराजकता फैला सकता है। ऐसे ही टीवी देखिए तो लगता है कश्मीर में केवल पत्थरबाजी हो रही है,लेकिन ऐसा नहीं है। वहां स्थिति नियंत्रण में है। यह एक पुरानी समस्या और नेहरू के युग का काला धब्बा है। सरकार इसको भी धोकर रहेगी। केन्द्र सरकार कश्मीर समस्या पर बहुत सुनियोजित तरीके से रणनीति बनाकर आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
हम अपने अधिकार क्षेत्र वाले कश्मीर के बारे में पाकिस्तान पर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाते हैं। क्या यह हमारी कमजोरी नहीं उजागर करता?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: कश्मीर हमारा है लेकिन कश्मीर में आतंकवाद फैलाना, घुसपैठ कराना पाकिस्तान और उनके लोगों के वजूद(सरवाइवल) से जुड़ा है। जहां एक छोटे से क्षेत्र से एक देश का सरवाइवल जुड़ा हो वहां वह(पाकिस्तान) तो सबकुछ करेगा ही। रहा सवाल हमारा तो कश्मीर की टोपोग्रॉफी ही ऐसी है। वहां नदी, नाले, खोह, घने जंगल और घना क्षेत्र है। जहां इलेक्ट्रानिक निगरानी के तंत्र, मानव खुफिया तंत्र समेत सब फेल हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आप मामले को कैसे हल करना चाहते हैं। केन्द्र सरकार ने पाकिस्तान को भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि वार्ता होगी तो पहले आतंकवाद पर ही होगी। हम किसी तरह के दबाव में कोई वार्ता की मेज पर नहीं बैठने वाले हैं। वहीं कश्मीर के भीतर आतंकवादियों से सख्ती से निबट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बल अपने आपरेशन को अंजाम दे रहे हैं। पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया जा रहा है और सरकार पूरे हालात पर नजर बनाए है।
अभी आपने सोशल मीडिया का जिक्र किया। डिजिटल इंडिया का दौर है। सहारनपुर हो या कश्मीर सरकार को सोशल मीडिया पर बैन लगाना पड़ता है। क्या ऐसे में सोशल मीडिया पर निगरानी, नियंत्रण की भी कोई योजना है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: ऐसा कुछ भी नहीं है। सरकार को अपने देशवासियों पर पूरा भरोसा है। जिस माध्यम को देश के लोग इतना बढ़-चढक़र इस्तेमाल कर रहे हैं, उस पर रोक का सवाल ही नहीं है। हां, जहां अराजक तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, वहां कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है और जब हालात सामान्य हो जाते हैं तो नियंत्रण हटा लिया जाता है।
तीन साल अपने मंत्रालय की उपलब्धि पर कुछ कहना चाहेंगे?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: जब सरकार आई थी तो सवाल आया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है। इसे बंद कर देना चाहिए। मंत्री होने के नाते कहना चाहते हैं कि सरकार मीडिया की प्रतिद्वंदी नहीं है। सरकार जहां पर और बेहतर करना चाहते हैं, वहां प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए निजीकरण को ले आते हैं। हम अलग-अलग खबर चला सकते हैं, विचार भिन्न हो सकते हैं। यह लोकतंत्र में ही संभव है, लेकिन सरकार लगातार उत्थान के पक्ष में है। इसी उद्देश्य से स्पेक्ट्रम का उपयोग बढ़ाया गया, एफएम रेडियों को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 पर ले जाने का लक्ष्य रखा है। सबसे बड़ी बात यह कि सरकार खुद जनता के साथ संवाद कर रही है। नये-नये विचार लेकर आ रही है। जबकि पहले यह निजी क्षेत्र करता था।
मीडिया का जिक्र आया तो विपक्ष का तंज याद आया। वह मीडिया को चिढ़ाता है कि सरकार ने अघोषित आपातकाल लगा रखा है। क्या आप भी सहमत है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: बिल्कुल नहीं। विपक्ष के पास कहने की बाते इतनी सीमित हो गई हैं कि वह अपना नरेटिव खो चुका है। उसकी स्थिति पिजड़े में बंद पंख फडफ़ड़ाने वाले पक्षी की तरह हो गई है। ऊपर से जनता भी विपक्ष की धुलाई कर रही है।
लेकिन आगामी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष एकजुट हो रहा है। एक जुटता के साथ ही वह मोदी सरकार को चुनौती देने के मूड में है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: यह विडंबना देखिए। यह जनता के लिए भी सोचने वाली बात है कि एक दूसरे को फूटी आंख न देखने वाले विपरीत विचारधारा के राजनीतिक दल अब एकजुट हो रहे हैं। क्योंकि ऊपर से ओले बरस रहे हैं।
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: कश्मीर हमारा है लेकिन कश्मीर में आतंकवाद फैलाना, घुसपैठ कराना पाकिस्तान और उनके लोगों के वजूद(सरवाइवल) से जुड़ा है। जहां एक छोटे से क्षेत्र से एक देश का सरवाइवल जुड़ा हो वहां वह(पाकिस्तान) तो सबकुछ करेगा ही। रहा सवाल हमारा तो कश्मीर की टोपोग्रॉफी ही ऐसी है। वहां नदी, नाले, खोह, घने जंगल और घना क्षेत्र है। जहां इलेक्ट्रानिक निगरानी के तंत्र, मानव खुफिया तंत्र समेत सब फेल हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आप मामले को कैसे हल करना चाहते हैं। केन्द्र सरकार ने पाकिस्तान को भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि वार्ता होगी तो पहले आतंकवाद पर ही होगी। हम किसी तरह के दबाव में कोई वार्ता की मेज पर नहीं बैठने वाले हैं। वहीं कश्मीर के भीतर आतंकवादियों से सख्ती से निबट रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय सीमा तथा नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा बल अपने आपरेशन को अंजाम दे रहे हैं। पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया जा रहा है और सरकार पूरे हालात पर नजर बनाए है।
अभी आपने सोशल मीडिया का जिक्र किया। डिजिटल इंडिया का दौर है। सहारनपुर हो या कश्मीर सरकार को सोशल मीडिया पर बैन लगाना पड़ता है। क्या ऐसे में सोशल मीडिया पर निगरानी, नियंत्रण की भी कोई योजना है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: ऐसा कुछ भी नहीं है। सरकार को अपने देशवासियों पर पूरा भरोसा है। जिस माध्यम को देश के लोग इतना बढ़-चढक़र इस्तेमाल कर रहे हैं, उस पर रोक का सवाल ही नहीं है। हां, जहां अराजक तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, वहां कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया जाता है और जब हालात सामान्य हो जाते हैं तो नियंत्रण हटा लिया जाता है।
तीन साल अपने मंत्रालय की उपलब्धि पर कुछ कहना चाहेंगे?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: जब सरकार आई थी तो सवाल आया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की कोई भूमिका नहीं है। इसे बंद कर देना चाहिए। मंत्री होने के नाते कहना चाहते हैं कि सरकार मीडिया की प्रतिद्वंदी नहीं है। सरकार जहां पर और बेहतर करना चाहते हैं, वहां प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए निजीकरण को ले आते हैं। हम अलग-अलग खबर चला सकते हैं, विचार भिन्न हो सकते हैं। यह लोकतंत्र में ही संभव है, लेकिन सरकार लगातार उत्थान के पक्ष में है। इसी उद्देश्य से स्पेक्ट्रम का उपयोग बढ़ाया गया, एफएम रेडियों को 40 प्रतिशत से बढ़ाकर 65 पर ले जाने का लक्ष्य रखा है। सबसे बड़ी बात यह कि सरकार खुद जनता के साथ संवाद कर रही है। नये-नये विचार लेकर आ रही है। जबकि पहले यह निजी क्षेत्र करता था।
मीडिया का जिक्र आया तो विपक्ष का तंज याद आया। वह मीडिया को चिढ़ाता है कि सरकार ने अघोषित आपातकाल लगा रखा है। क्या आप भी सहमत है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: बिल्कुल नहीं। विपक्ष के पास कहने की बाते इतनी सीमित हो गई हैं कि वह अपना नरेटिव खो चुका है। उसकी स्थिति पिजड़े में बंद पंख फडफ़ड़ाने वाले पक्षी की तरह हो गई है। ऊपर से जनता भी विपक्ष की धुलाई कर रही है।
लेकिन आगामी राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष एकजुट हो रहा है। एक जुटता के साथ ही वह मोदी सरकार को चुनौती देने के मूड में है?
कर्नल (रिटा.) राज्यवर्धन सिंह राठौर: यह विडंबना देखिए। यह जनता के लिए भी सोचने वाली बात है कि एक दूसरे को फूटी आंख न देखने वाले विपरीत विचारधारा के राजनीतिक दल अब एकजुट हो रहे हैं। क्योंकि ऊपर से ओले बरस रहे हैं।