समाजवादी साइकिल पंचर होने से पहले कांग्रेस में भी 'खूब लड़े पंजे'
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समाजवादी पार्टी में जारी दंगल के पहले भी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस में चुनाव चिह्न को लेकर घमासान मच चुका है। कई सालों तक कांग्रेस पार्टी कवर करते रहे पत्रकार राशिद किदवई बताते हैं कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के दौर में कांग्रेस के पास कंधे पर जुआ रखकर जाते दो बैलों के जोड़े का चुनाव चिह्न था। लेकिन नेहरू के देहांत और लाल बहादुर शास्त्री की विवादास्पद मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने पार्टी में बड़े बदलाव किए, जिसके चलते पार्टी में मतभिन्नता हो गई और साल 1969 में पार्टी टूट गई।
पार्टी के कई सीनियर नेताओं से मिलकर बना एक खेमा कहलाया कांग्रेस(ओ) और दूसरा खेमा, जिसमें इंदिरा गांधी के समर्थक थे, कहलाया कांग्रेस(आर)। लेकिन यहां बड़ा विवाद पार्टी के चिह्न को लेकर था और दोनों गुट नेहरू के पार्टी चिह्न पर अपना दावा ठोक रहे थे। बाद में चुनाव आयोग ने इस चिह्न को फ़्रीज कर दिया। इसके बाद कांग्रेस(ओ) ने 'सूत कातती महिला' को अपना चुनाव चिह्न बनाया। वहीं इंदिरा गांधी को लंबे विचार विमर्श के बाद 'गाय और बछड़े' को कांग्रेस(आर) का चुनाव चिह्न बनाना पड़ा।
बताया जाता है कि जनता में नए चुनाव चिह्न को कांग्रेस(आर) और अपनी पहचान बनाने के लिए इंदिरा गांधी को बहुत मेहनत करनी पड़ी, जिसके लिए इंदिरा को देशव्यापी कैंपेन भी चलाना पड़ा। 1977 में इंमरजेंसी के बाद कराए गए आम चुनाव में कांग्रेस(आर) को बुरी हार का मुंह देखना पड़ा। पार्टी में विरोध के सुर सुनाई देने लगे थे। जगजीवन राम जैसे कई सीनियर नेताओं ने तो पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया था।
चुनाव चिह्न की इंदिरा और संजय से होने लगी तुलना
समाजवादी पार्टी के 1 जनवरी, 2017 को लखनऊ में बुलाए गए आपात आधिवेशन की ही तरह जनवरी, 1978 में भी इंदिरा गांधी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं काकन्वेंशन बुलाया था। इसका आयोजन दिल्ली के संसद मार्ग स्थित मावलंकर हॉल में किया गया था।
इस बारे में सोनिया के जीवनीकार राशिद किदवई लिखते हैं कि यह इंदिरा के लिए सबसे खराब दौर था। वो अल्पमत में थीं।
लोग उनके चुनाव चिह्न 'गाय और बछड़ा' की तुलना 'इंदिरा और संजय गांधी' से करने लगे थे।
आज की कांग्रेस आई का जन्म 1980 में हुआ था
साल 1980 में कांग्रेस(आर) को तोड़कर कांग्रेस(आई) बनाई गई, जिसमें कांग्रेस से जुड़ा 'आई' इंदिरा के नाम के पहले अक्षर से लिया गया और पार्टी को चुनाव चिह्न के तौर पर 'हाथ' का निशान मिला।
किदवई कहते हैं, "समाजवादी पार्टी के संभावित विघटन में अखिलेश खेमे की हालत इंदिरा गांधी से बहुत बेहतर है। उनके पास बहुमत है। ऐसे में आगामी चुनाव में यूपी की जनता के बीच व्यापक भ्रम पैदा न हो, इसके लिए चुनाव आयोग को समाजवादी पार्टी की 'साइकिल' को जब्त नहीं करना चाहिए।"
बहरहाल, चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक़ इंदिरा ने चुनाव चिह्न 'हाथ' के लिए समाजवादी पार्टी के चिह्न 'साइकिल' और दलितों की सबसे बड़ी पार्टी कहे जाने वाली बहुजन समाज पार्टी के चिह्न 'हाथी' को नकार दिया था।
किदवई ये भी बताते हैं कि इंदिरा गांधी को लगा था कि कांग्रेस के लिए 'हाथी' निशान शुभ नहीं होगा। लेकिन इसी चुनाव चिह्न 'हाथी' की आज अमरीका में 'रिपब्लिकन सरकार' है। और बसपा के 'हाथी' को भी यूपी के चुनावी दंगल में प्रबल दावेदार माना जा रहा है।