सोशल मीडिया को हथियार बना अपने एजेंडे को कामयाब बनाने में लगे हैं कुछ लोग
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सोशल मीडिया एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो आपको लिखने की पूरी आजादी देता है। लेकिन कुछ लोग इसका गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। इस प्लेटफॉर्म पर पोस्ट होने वाले संदेशों की कोई जांच नहीं होती है, इसी का फायदा उठाकर कुछ लोग सोशल मीडिया को अपना हथियार बना रहे हैं। साथ ही अपने एजेंडे को कामयाब बनाने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं। ऐसे लोग कभी फर्जी वीडियो के माध्यम से पब्लिक को निशाना बनाते हैं तो कभी फर्जी आंकड़ों के जरिये लोगों को बहकाने का काम करते हैं।
यही नहीं ऐसे लोगों की सोशल मीडिया में अच्छी खासी तादाद है। बता दें कि इसी के चलते फेसबुक ने मई 2018 में 59 करोड़ फर्जी अकाउंट डिलीट किए हैं। आइए हम आपको दो ताजा खबरों के माध्यम से समझाने की कोशिश करते हैं कि ये लोग कैसे सोशल मीडिया में फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं।
मंदसौर रेप केस से जुड़े फर्जी संदेश
मध्यप्रदेश में पिछले महीने 8 साल की बच्ची के साथ हुए रेप की घटना ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। लेकिन कुछ लोगों ने इस घटना में भी तथ्यों के साथ खिलवाड़ कर मजे लेने और लोगों के भड़काने का काम किया। मंदसौर की घटना से संबंधित एक संदेश को तेजी से शेयर किया जा रहा है। हजारों यूजर्स ने इसे अपनी वॉल पर शेयर किया।
रेप विरोधियों को रेप समर्थक बताया
सोशल मीडिया में प्रसारित किए जा रहे इस संदेश में लिखा है कि मंदसौर की सड़कों पर रैली निकाली जा रही है। रैली निकालने वाले लोग मुस्लिम हैं जो की टोपी लगाए हुए हैं। वह मांग कर रहे हैं आरोपियों को रिहा किया जाए, क्योंकि उन्होंने रेप नहीं किया है। संदेश में लिखा गया कुरान में गैर-मुस्लिम महिलाओं से बलात्कार जायज है। इस संदेश को हजारों यूजर्स ने फेसबुक और ट्विटर पर शेयर किया है। लेकिन मामला बिलकुल इसके उलट है। मुसलमानों ने आरोपियों के पक्ष में नहीं बल्कि आरोपियों के विरोध में रैली निकाली थी।
असली फोटो के साथ छेड़छाड़ कर वायरल की तस्वीर
लोगों ने असली फोटो में कंप्यूटर के जरिये छेड़छाड़ कर इसे सोशल मीडिया में पोस्ट किया। जिसपर लिखा था 'कुरान में दूसरे धर्म की लड़कियों से बलात्कार जायज' 'इरफान को रिहा करो'। यह सब तख्तियों पर लिखा था। इन तस्वीरों को अब तक हजारों बार शेयर किया जा चुका गया। हालांकि ये तस्वीरें सही हैं लेकिन ये आरोपियों के पक्ष में नहीं बल्कि विरोध में किए गए प्रदर्शन की हैं। मालूम हो कि घटना के बाद हजारों मुसलमानों ने जुलूस निकालकर आरोपियों के खिलाफ प्रदर्शन किया था।
असली फोटे से की छेड़छाड़
इस संदेश में यह भी दावा किया गया कि आरोपियों के खिलाफ मुस्लिमों ने कोई रैली नहीं निकाली है बल्कि मुसलमान इनके समर्थन में उतरे हैं। संदेशों में इसे ऐसे प्रस्तुत किया गया कि असली खबर फेक लगे और फेक संदेश असली लगे। इस लेख में यह भी कहा गया कि मीडिया आपको गलत खबरें दिखा रहा है। आप मीडिया की खबरों पर विश्वास न करें क्योंकि ये झूठी खबरें हैं।
असली खबर को उलट दिया
जबकि सच्चाई यह है कि इस घटना के बाद मुस्लिम समाज ने एकजुट होकर इसका विरोध किया था। और कहा कि हम कब्रिस्तान में भी आरोपियों को दफनाने के लिए जगह नहीं देंगे। यही नहीं आरोपी की मां ने भी कहा कि अगर मेरे बेटे ने ऐसा किया है तो उसे उसकी सजा मिलनी चाहिए।
कांग्रेस के खिलाफ चलाया अभियान
वायरल संदेशों में यह भी बताया गया कि कांग्रेस बलात्कार के आरोपियों के पक्ष में खड़ी है। ज्योतिरादित्य सिंधिया की एक तस्वीर भी वायरल की गई जिस पर लिखा था कि मंदसौर रेप केस की सीबीआई जांच हो क्योंकि इरफान बेगुनाह भी हो सकता है। जबकि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने खुद अपनी एक तस्वीर ट्वीट की जिसमें वह आरोपियों को फांसी की सजा की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया में यह सब कुछ व्यक्ति विशेष नहीं बल्कि कुछ समाचार पोर्टल भी ऐसा करके संप्रदायिकता को बढ़ावा दे रहे हैं।
एनसीआरबी की रिपोर्ट बताकर फर्जी खबर वायरल की
एनसीआरबी के तथ्यों के साथ किया खिलवाड़
अपने निजी स्वार्थों के तहत काम कर रहे कुछ लोगों ने राष्ट्रीय आपराधिक रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट बताकर एक फर्जी खबर को वायरल किया। रिपोर्ट में दावा किया गया कि भारत में 2016 में 95 प्रतिशत मुसलमान बलात्कार के लिए जिम्मेदार हैं। बताया गया कि 2016 में कुल 84,784 बलात्कार हुए जिसमें से 81 हजार बलात्कार मुसलमानों ने किए हैं।
रेप पीड़िताओं को हिंदू बताया
वायरल की गई खबर में यह भी दावा किया गया कि इनमें 96 फीसदी महिलाएं गैर मुस्लिम हैं यानी कि हिंदू हैं। कहा गया कि जैसे ही इनकी संख्या बढ़ती जाएगी वैसे ही भारत में बलात्कारों की संख्या भी बढ़ती जाएगी। इस फर्जी रिपोर्ट को सोशल मीडिया में खूब वायरल किय गया। हजारों लोगों ने इसे फेसबुक पर शेयर किया और ट्विटर पर ट्वीट किया। जबकि सच्चाई यह है कि एनसीआरबी कभी भी धर्म और जाति के आधार पर कोई डेटा ही नहीं देती है।
बिना जांच पड़ताल के आगे फॉर्वर्ड कर देते हैं लोग
एनसीआरबी के आंकड़ों को गलत तरीके से पेश किया गया। कई बार अच्छे खासे पढ़े-लिखे और जिम्मेदार लोग भी बिना जांच पड़ताल के ऐसे संदेशों को वायरल कर देते हैं। कुछ लोग उनका हवाला देतें हैं या ऐसे ही आगे फॉरवर्ड कर देते हैं। जिससे लोग उन पर विश्वास करने लगते हैं। बता दें कि कुछ लोगों ने ऐसे ही फर्जी संदेश वायरल करके लोगों को भड़काने का काम किया है। जिसके बाद कई बार हिंसा फैली है और दंगे हुए हैं, इसके चलते ही अब बहुत लोगों की जान जा चुकी है। हिंसा भड़काने के लिए कुछ लोग भीड़ का सहारा लेते हैं। वह व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर एक साथ सैंकड़ों लोगों को अपना वीडियो या मैसेज साझा कर देते हैं और अपने मंसूबों में कामयाब हो जाते हैं।