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लक्ष्मी गौतम का सवाल, 'अगर सब समान हैं तो मैं 'विधवा' क्यों कहाऊं'

Thu, 09 Mar 2017 03:55 PM IST
amarujala.com, Submitted By: विकास जांगड़ा
amarujala.com, Submitted By: विकास जांगड़ा Updated Thu, 09 Mar 2017 03:55 PM IST
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Social media campaign has started,it demands to dropping the word widow from dictionary

आगरा में महिला दिवस से एक नए अभियान की शरूआत हो गई है। नारी शक्ति पुरस्कार की विजेता डॉ. लक्ष्मी गौतम ने लैंगिक समानता की बात करते हुए पूछा है कि अगर हम सब समान हैं तो 'विधवा' क्यों कहा जाता है ?. लक्ष्मी गौतम कहती हैं कि जिन महिलाओं के पति गुजर जाते हैं उन्हें 'विधवा' नहीं कहा जाना चाहिए। उन्हें भी बराबरी का का अधिकार और सम्मान मिलना चाहिए। 

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डॉ गौतम ने कहा कि जब हम बदलते समय के साथ बदल रहें है तो क्या अभी भी इस भेदभाव को बढ़ाने वाले शब्द को हमें लेकर चलना चाहिए ? मेरा मानना है की जो शब्द भेदभाव को बढ़ाता है उस शब्द को शब्दकोश से ही हटा देना सही रहेगा'। जिनके पति मर जाते है उन्हें हमें सम्मान के साथ देखना चाहिए ना कि उनमें भेदभाव करना चाहिए।
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मीडिया से बात करते हुए डॉ. गौतम ने बताया की जिस महिला का पति मर गया हो उसके लिए विधवा शब्द बहुत ही पीड़ा पहुंचाने वाला शब्द होता है। यहां तक की कुछ लोग अभी भी विधवा को 'अशुभ' जैसी संज्ञा देते हैं। इन सभी नाम का असर उस महिला पर पड़ता है। जिसके कारण उनकी जल्दी मौत भी देखी जाती है, इस सबसे बचने के लिए आवश्यक है कि जिनके पति मर गऐ हों तो उन्हे कोई अलग संज्ञा नहीं दी जानी चाहिए , उन्हे भी उतना ही सम्मान मिलना चाहिए, जितना और महिलाओं को मिलता है।
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अभी भी कुछ जगहों पर देखने के लिए मिल जाता है कि विधवा महिला को शादियों में नहीं जाने दिया जाता यहां तक की विधवाओं को अपने बच्चों के विवाह में शामिल होने भी नहीं दिया जाता, क्योंकि उन्हें अशुभ समझा जाता है। यह सब गलत है हमें इस बात को समझना होगा कि किसी के पति के मर जाने से वह अशुभ नहीं हो जाती। उन्होंने कहा, "जिन महिलाओं की पति मरते हैं उन्हें मां और बहनों के अधिकार के साथ अपना जीवन जीना चाहिए।


डॉ. गौतम ने बताया कि उनका एनजीओ कनक धार फाउंडेशन इस अभियान को चला रहा है। यहां तक कि इस अभियान में महिला और बाल विकास मंत्रालय ने भी पूर्ण सहयोग देने की बात की है।

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