फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   so that is why there is a controversy on sectin 35 a

...तो इसलिए है अनुच्छेद 35ए पर इतना विवाद, सुप्रीम कोर्ट में सोमवार से शुरू होने वाली है सुनवाई

Sun, 05 Aug 2018 04:16 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 05 Aug 2018 04:16 AM IST
विज्ञापन
so that is why there is a controversy on sectin 35 a
supreme court

कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 35ए की वैधता पर सुप्रीम कोर्ट में सोमवार से शुरू होने वाली सुनवाई से पहले घाटी का माहौल गर्म हो गया है। पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस ने सोमवार को बंद का आह्वान किया है और सुप्रीम कोर्ट से सुनवाई मुल्तवी करने की अपील की है। लेकिन आखिर अनुच्छेद 35ए  है क्या? कहां से आया, इसका अनुच्छेद 370 से क्या संबंध है और इसे चुनौती किसने और क्यों दी है?

विज्ञापन


दिल्ली स्थित एक गैर-सरकारी संस्था ‘वी, द सिटीजंस’ ने इस अनुच्छेद की वैधता को इसलिए चुनौती दी है क्योंकि इस संस्था के लोगों के मुताबिक, यह पूरी तरह असंवैधानिक है और संविधान के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
विज्ञापन


देश में संविधान 26 जनवरी 1951 को लागू हुआ। इसमें अनुच्छेद 370 भी था जो जम्मू कश्मीर को एक विशेष दर्जा देता था। लेकिन 1954 में इसी अनुच्छेद में एक उपबंध के रूप में अनुच्छेद 35ए जोड़ दिया गया। यह मूल संविधान का हिस्सा ही नहीं है बल्कि परिशिष्ट में रखा गया है। इसीलिए कई सालों तक इसका पता ही नहीं चला। संस्था की वरिष्ठ सदस्य आभा खन्ना के अनुसार अनुच्छेद 35ए को न तो लोकसभा और न ही राज्यसभा में कभी पेश किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसे सिर्फ राष्ट्रपति के आदेश (प्रेसिडेंशियल आर्डर) के जरिए अनुच्छेद 370 में जोड़ दिया गया। संविधान के अनुच्छेद 368 के मुताबिक, चूंकि यह संसद से पारित नहीं हुआ, इसलिए यह एक अध्यादेश की तरह छह महीने से ज्यादा लागू नहीं रह सकता।

क्या कहता है अनुच्छेद 35ए 

राज्य से बाहर के लोग यहां संपत्ति नहीं खरीद सकते। कश्मीर की महिला यदि किसी गैर-कश्मीरी से विवाह करे तो वह रोजगार और संपत्ति के अधिकार के वंचित हो जाएगी। उसे न तो पिता की संपत्ति मिलेगी और न ही पति की।

2002 से पहले तो वे राज्य की नागरिकता ही खो बैठती थीं लेकिन अब उन्हें स्थायी नागरिकता तो मिल जाती है लेकिन बिना किसी अधिकार के। वहीं, गैर-कश्मीरी से विवाह करने के बाद भी कश्मीरी पुरुष के सभी अधिकार सुरक्षित रहते हैं। यह समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

बंटवारे के दौरान पाकिस्तान से आकर राज्य में बसे हुए लोग यहां के स्थायी निवासी तो हैं लेकिन उन्हें संपत्ति, शिक्षा और रोजगार का अधिकार नहीं है। पंजाब से ले जाकर बसाए गए सफाईकर्मियों के परिवारों को भी शिक्षा, संपत्ति और रोजगार के अधिकार नहीं हैं। ऐसे लोगों की संख्या तीन लाख से ज्यादा है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed