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जावड़ेकर ने दो बार फोन किया, फिर भी मंत्रालय नहीं पहुंची स्मृति, आखिर क्यों?
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Jul 2016 10:13 AM IST
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स्मृति ईरानी
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मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल में कुर्सी गंवाने और पर कतरे जाने वाले मंत्रियों का दर्द छिपाए नहीं छिप रहा है। कुर्सी गंवाने वाले तीन मंत्री तो पहले ही सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जता चुके हैं, वहीं सियासी कद छोटा किए जाने वाले मंत्री अपने अपने तरीके से नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
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इस क्रम में स्मृति ईरानी बृहस्पतिवार को प्रकाश जावड़ेकर के मानव संसाधन विकास मंत्रालय का कार्यभार ग्रहण करने के दौरान उपस्थित रहने की परंपरा से दूर रहीं। बताया जाता है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय से इस्पात मंत्रालय भेजे गए चौधरी बीरेंद्र सिंह भी नाराज हैं।
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सूत्रों के मुताबिक कार्यभार ग्रहण करने से पूर्व जावड़ेकर के यहां से स्मृति के यहां दो बार फोन कर समय की जानकारी दी गई थी। कार्यभार ग्रहण करने का समय भी 10 बजे से 10.30 बजे कर दिया गया। इसके बावजूद स्मृति के नहीं आने पर जावड़ेकर ने उनकी अनुपस्थिति में ही कार्यभार ग्रहण कर लिया।
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बताते हैं कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय से हटाकर कपड़ा मंत्री बनाई गईं स्मृति की नाराजगी दूर करने के लिए ही खुद जावड़ेकर बुधवार को उनसे मुलाकात कर चुके थे।
संगठन में दी जा सकती है जिम्मेदारी
गौरतलब है कि जनजातीय मामलों के राज्यमंत्री का पद छिने जाने के बाद गुजरात के आदिवासी सांसद मनसुख भाई वासवा ने राज्य की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पर साजिश रचने का आरोप लगाया था। इसके बाद उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों पर सवालिया निशान लगाए।
पंचायती राज राज्य मंत्री का पद छिन जाने के बाद निहाल चंद ने भी खुलकर नाराजगी जताई थी। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहे रामशंकर कठेरिया ने मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद समर्थकों में गहरी नाराजगी की बात कही थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इस फैसले से बसपा को लाभ मिलेगा।
जिन पांच मंत्रियों को मंत्रिमंडल से निकाला गया है उनमें से दो-तीन मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस क्रम में कठेरिया का संगठन में आना पक्का है, जबकि वासवा और कुंदरिया के लिए केंद्रीय या राज्य संगठन में भूमिका तय किए जाने पर मंथन जारी है। हालांकि जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर मल जाट और निहाल चंद मेघवाल को संगठन में लाने की संभावना कम ही है।
पंचायती राज राज्य मंत्री का पद छिन जाने के बाद निहाल चंद ने भी खुलकर नाराजगी जताई थी। मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री रहे रामशंकर कठेरिया ने मंत्रिमंडल से हटाए जाने के बाद समर्थकों में गहरी नाराजगी की बात कही थी। उन्होंने यह भी दावा किया था कि इस फैसले से बसपा को लाभ मिलेगा।
जिन पांच मंत्रियों को मंत्रिमंडल से निकाला गया है उनमें से दो-तीन मंत्रियों को संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस क्रम में कठेरिया का संगठन में आना पक्का है, जबकि वासवा और कुंदरिया के लिए केंद्रीय या राज्य संगठन में भूमिका तय किए जाने पर मंथन जारी है। हालांकि जल संसाधन राज्य मंत्री सांवर मल जाट और निहाल चंद मेघवाल को संगठन में लाने की संभावना कम ही है।