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आरबीआई से छोटे नोट नहीं मिलना भी कैश किल्लत की बड़ी वजह 

Thu, 24 Nov 2016 04:08 AM IST
अखिलेश वार्ष्णेय, हाथरस 
अखिलेश वार्ष्णेय, हाथरस  Updated Thu, 24 Nov 2016 04:08 AM IST
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Small notes from RBI to meet cash shortage due
RBI

नोट बंदी के दौर में बैंकों की मुसीबत भी कम नहीं है। जिले में कई बैंक शाखाओं में कैश खत्म होने की समस्या सामने आ रही है। इसकी वजह है कि लोग बहुतायात में नई करेंसी की निकासी तो कर रहे हैं, लेकिन उसको जमा करने में कोताही बरत रहे हैं।

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गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद करेंसी एक्सचेंज में बैंकों ने अपने सड़े-गोल और बेहद पुराने छोटे नोट भी खपा दिए, फिर भी ग्राहकों की जरूरत पूरी नहीं कर सकीं। अब तक जिलेभर की बैंक साढ़े 300 करोड़ से अधिक की धनराशि जिले में वितरण हो चुका है, जबकि आरबीआई से हाथरस के बैंकों को दो हजार के नए नोटों के रूप में लगभग 100 करोड़ की धनराशि ही मिल सकी है। एलडीएम एके सक्सेना ने बताया कि जमा और निकासी में बहुत बड़ा अंतर आ गया है।
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बैंकों से लोग करेंसी निकाल तो रहे हैं, लेकिन जमा करने से हाथ पीछे खींच रहे हैं। जिलेभर की बैंक शाखाओें से अब तक साढ़े 300 करोड़ से अधिक की धनरशि डिस्ट्रीब्यूट हो चुकी है। जबकि आरबीआई से दो हजार के नए नोट के रूप में हाथरस जिले के बैंकों को सिर्फ 80 से सौ करोड़ की धनराशि ही मिल सकी है, जो कि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
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एलडीएम ने बताया कि आरबीआई से सौ, पचास, बीस आदि के नोटों की खेप अभी तक हाथरस को प्राप्त नहीं हुई है। इन नोटों के रूप में बैंकों के पास जो रकम पहले से ही मौजूद थी, उस रकम को बैंक ग्राहकों को बांटा जा चुका है।


 

प्राइवेट बैंकों में है कैश की किल्लत

Small notes from RBI to meet cash shortage due

इधर, दो हजार के नए नोट, दस, बीस, पचास और सौ के नोट को जमा करने में लोग कोताही बरत रहे हैं। इस वजह से भी जिले की अधिकांश बैंक शाखाएं कैश की किल्लत से जूझ रही हैं। इससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

24 हजार की जगह मिल रहे दो हजार 
नियम है कि एक व्यक्ति एक हफ्ते में अपने खाते से 24 हजार रुपये निकाल सकता है, लेकिन कैश की किल्लत से जूझ रहीं बैंक उसे सिर्फ दो हजार से चार हजार रुपये ही पकड़ा रही हैं। ऐसे में लोगों की नोक-झोंक होना आम बात हो गई है।

प्राइवेट बैंकों में है कैश की किल्लत 
कैश की किल्लत सरकारी बैंकों से अधिक प्राइवेट बैंकों के सामने अधिक आ रही है। प्राइवेट बैंक को कैश नहीं मिल पा रहा है, जिस वजह से इन बैंकों के खाताधारक काफी परेशान हैं। लोग बैंक प्रशासन पर ही अपना गुस्सा उतार रहे हैं, जबकि हकीकत यही है कि प्राइवेट बैंक को बड़ी मुश्किल से कैश मिल पा रहा है। 

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