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'मिशन आगमन': देश का पहला निजी रॉकेट 'विक्रम-1' लॉन्च को तैयार, जानें कब भरेगा उड़ान और क्या है इसकी खासियत
Fri, 03 Jul 2026 07:07 AM IST
अमन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमन तिवारी
Updated Fri, 03 Jul 2026 07:07 AM IST
सार
हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस का विक्रम-1 रॉकेट 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच पहली ऑर्बिटल उड़ान भर सकता है। यह भारत का पहला निजी कक्षीय रॉकेट है। 'आगमन' नाम के इस मिशन का उद्देश्य रॉकेट की तकनीक और प्रदर्शन को परखना है।
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'मिशन आगमन' के साथ इतिहास रचेगा विक्रम-1
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हैदराबाद की निजी अंतरिक्ष कंपनी स्काईरूट एयरोस्पेस ने बृहस्पतिवार को घोषणा की कि उसके विक्रम-1 रॉकेट का पहला परीक्षण प्रक्षेपण 12 जुलाई से 4 अगस्त के बीच कभी भी हो सकता है। यह भारत का पहला निजी क्षेत्र में विकसित कक्षीय (ऑरबिटल) रॉकेट है। हालांकि, अंतिम प्रक्षेपण तिथि श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में रॉकेट की अंतिम तैयारी, सभी परीक्षण, मौसम, सुरक्षा मंजूरी और लॉन्च रेंज की उपलब्धता के आधार पर तय की जाएगी। कंपनी ने इस मिशन का नाम ‘आगमन’ रखा है।
इस उड़ान का उद्देश्य रॉकेट के उड़ान भरने से लेकर अंतरिक्ष की ओर बढ़ने के हर चरण के प्रदर्शन का आकलन करना है। इसके जरिये प्रणोदन प्रणाली (प्रोप्लशन सिस्टम)विभिन्न चरणों के अलग होने की प्रक्रिया, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण प्रणाली और रॉकेट के समग्र प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा कि रॉकेट के वास्तविक प्रदर्शन को पूरी तरह जमीन पर किए गए परीक्षणों से नहीं समझा जा सकता। उड़ान के दौरान मिलने वाले आंकड़े रॉकेट की डिजाइन को परखने और भविष्य में और बेहतर प्रक्षेपण यान विकसित करने में मदद करेंगे।
सात मंजिला ऊंचा है रॉकेट
करीब सात मंजिला ऊंचा विक्रम-1 बहु-चरणीय (मल्टी स्टेज) रॉकेट है। इसका ढांचा पूरी तरह कार्बन मिश्रित सामग्री से तैयार किया गया है। इसमें कंपनी की ओर से विकसित प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिसमें थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक से बने इंजन और अधिक क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर शामिल हैं। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को पृथ्वी से लगभग 450 किमी ऊंची निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करने में सक्षम होगा।
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विक्रम-एस का सफल प्रक्षेपण कर चुकी है कंपनी : यह स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है। इससे पहले 18 नवंबर 2022 को कंपनी ने विक्रम-एस का सफल उप-कक्षीय प्रक्षेपण किया था, जो भारत की धरती से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था।
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इस उड़ान का उद्देश्य रॉकेट के उड़ान भरने से लेकर अंतरिक्ष की ओर बढ़ने के हर चरण के प्रदर्शन का आकलन करना है। इसके जरिये प्रणोदन प्रणाली (प्रोप्लशन सिस्टम)विभिन्न चरणों के अलग होने की प्रक्रिया, मार्गदर्शन, नेविगेशन, नियंत्रण प्रणाली और रॉकेट के समग्र प्रदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाए जाएंगे। स्काईरूट एयरोस्पेस के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पवन कुमार चंदाना ने कहा कि रॉकेट के वास्तविक प्रदर्शन को पूरी तरह जमीन पर किए गए परीक्षणों से नहीं समझा जा सकता। उड़ान के दौरान मिलने वाले आंकड़े रॉकेट की डिजाइन को परखने और भविष्य में और बेहतर प्रक्षेपण यान विकसित करने में मदद करेंगे।
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सात मंजिला ऊंचा है रॉकेट
करीब सात मंजिला ऊंचा विक्रम-1 बहु-चरणीय (मल्टी स्टेज) रॉकेट है। इसका ढांचा पूरी तरह कार्बन मिश्रित सामग्री से तैयार किया गया है। इसमें कंपनी की ओर से विकसित प्रणोदन प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिसमें थ्री-डी प्रिंटिंग तकनीक से बने इंजन और अधिक क्षमता वाले ठोस ईंधन रॉकेट बूस्टर शामिल हैं। यह रॉकेट 350 किलोग्राम तक वजन वाले छोटे उपग्रहों को पृथ्वी से लगभग 450 किमी ऊंची निचली कक्षा (लो अर्थ ऑर्बिट) में स्थापित करने में सक्षम होगा।
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विक्रम-एस का सफल प्रक्षेपण कर चुकी है कंपनी : यह स्काईरूट एयरोस्पेस का दूसरा अंतरिक्ष मिशन है। इससे पहले 18 नवंबर 2022 को कंपनी ने विक्रम-एस का सफल उप-कक्षीय प्रक्षेपण किया था, जो भारत की धरती से अंतरिक्ष तक पहुंचने वाला पहला निजी रॉकेट बना था।