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2014 के बाद सबसे ज्यादा चुने गए विधायक भाजपा के, दूसरे नंबर पर कांग्रेस

Mon, 11 Mar 2019 01:12 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 11 Mar 2019 01:12 PM IST
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since 2014 BJP dominated in assembly elections and send most MLAs in comparison to congress
विधायकों की संख्या मे कांग्रेस से आगे रही भाजपा (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

पिछले पांच सालों के दौरान भाजपा का विधानसभा चुनावों में दबदबा देखने को मिला है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने मुश्किल से जीत हासिल की है। यदि सभी राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखा जाए तो हर तीन में से एक विधायक भाजपा का है जबकि हर चार में से एक विधायक कांग्रेस का है। वहीं अन्य पार्टियां जिन्होंने इन दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के साथ गठबंधन किया है उनके पास आधी सीटे हैं।

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इस विश्लेषण में 2014 लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनाव से लेकर पिछले साल दिसंबर तक हुए चुनाव को शामिल किया गया है। इन चुनावों में सभी राज्यों के साथ-साथ दिल्ली और पुड्डुचेरी की कुल 4,230 विधानसभा सीटें थीं। जिसमें से भाजपा ने 1,281 पर जीत हासिल की। वहीं कांग्रेस के खाते में केवल 938 सीटे थीं। दोनों पार्टियों के बीच का अतंर ज्यादा बड़ा नहीं है।
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12 राज्यों में इन दो पार्टियों के सामने लेफ्ट ने 138 सीटों पर जीत हासिल की। जिसमें से सबसे ज्यादा सीटें केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा की थीं। लेफ्ट ने 9 अन्य राज्यों में भी कम से कम एक सीट पर जीत हासिल की है। वहीं क्षेत्रीय पार्टियों को 1,873 सीटों पर जीत मिली जो भाजपा द्वारा जीती गई सीटों से डेढ़ गुना ज्यादा है।
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इन क्षेत्रीय पार्टियों में से कुछ का भाजपा के साथ गठबंधन था। जिसमें आंध्र प्रदेश में तेलुगू देशम पार्टी के साथ और बिहार में उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तान आवाम पार्टी और राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के साथ भाजपा का गठबंधन था। वहीं कांग्रेस का केरल में मुस्लिम लीग के साथ और बिहार में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइडेट के साथ गठबंधन था।


हालांकि चुनाव के बाद बदली परिस्थितियों के कारण अब टीडीपी, आरएलएसपी, हम और जेडीयू ने अपने साझेदार बदल लिए हैं। इनके अलावा क्षेत्रीय दलों की बात करें तो तमिलनाडु में एआईएडीएमके, ओडिशा में बीजू जनता दल, महाराष्ट्र में शिवसेना और आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस एक बड़े दल के तौर पर उभरी हैं। इन पार्टियों ने विधानसभा चुनाव में किसी भी राष्ट्रीय पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया था। इस विश्लेषण से पता चलता है कि नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है। 

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