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अमर उजाला पोल : निजी कंपनियों को #MeToo पर बनाने चाहिए कड़े नियम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 04 Nov 2018 08:07 PM IST
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लगातार आ रही खबरों के बीच अब सवाल उठने लगा है कि क्या निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम बनाने चाहिए। बता दें कि मीटू के ज्यादातर मामले निजी कंपनियों के कर्मचारियों के ही सामने आए हैं। मीटू अभियान के तहत रोज नए नए खुलासे हो रहे हैं।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम बनाने चाहिए?' इस पोल में 2543 लोगों ने हिस्सा लिया।
पोल के जवाब में 80.81 फीसदी पाठकों ने माना कि निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम बनाने चाहिए, जबकि 19.19 फीसदी पाठकों ने कहा कि निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम नहीं बनाने चाहिए।
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इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'क्या निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम बनाने चाहिए?' इस पोल में 2543 लोगों ने हिस्सा लिया।
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पोल के जवाब में 80.81 फीसदी पाठकों ने माना कि निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम बनाने चाहिए, जबकि 19.19 फीसदी पाठकों ने कहा कि निजी कंपनियों को #MeToo पर कड़े नियम नहीं बनाने चाहिए।
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