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Dr. Joshi: शॉर्ट फिल्म ए सन ऑफ हिमालय देगी जल-जंगल-हवा बचाने का संदेश, पर्यावरणविद् पर आधारित 40 मिनट की फिल्म

Fri, 12 Jan 2024 06:20 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 12 Jan 2024 06:20 AM IST
सार

फिल्म का मकसद आज की पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। डॉ. जोशी ने पर्यावरण पारिस्थितिकी और ग्राम विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया और नदियों को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया।

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Short film A Son of Himalaya based on Dr Joshi will give the message of saving water, forest and air
Water (File Photo) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हिमालयन पर्यावरण अध्ययन एवं संरक्षण संस्थान (हैस्को) के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के जीवन पर आधारित 40 मिनट की ‘ए सन ऑफ हिमालय’ फिल्म बनी है जो पर्यावरण संरक्षण को लेकर चलाए जा रहे आंदोलन की कहानी है। फिल्म यह संदेश देती है कि मानव जीवन को बचाने के लिए हवा, मिट्टी, जल और जंगल कितना महत्वपूर्ण है। इस फिल्म की निर्देशक आदित्रि राय ने बड़ी खूबसूरती से इसे पर्दे पर उतारा है।

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फिल्म का मकसद आज की पीढ़ी को पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है। डॉ. जोशी ने पर्यावरण पारिस्थितिकी और ग्राम विकास से जुड़े मुद्दों पर काम किया और नदियों को बचाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाया। बृहस्पतिवार को ‘ए सन ऑफ हिमालय’ फिल्म की स्क्रीनिंग मुंबई के सहारा स्टार में हुई। फिल्म में दर्शाया गया है कि उनका जीवन हिमालय के एक गांव से शुरू हुआ, जहां प्रकृति, पर्यावरण, वन और जल उनके जीवन का अटूट हिस्सा था। फिल्म में दिखाया गया है कि डॉ. प्रकाश ने कैसे जलस्रोतों को विकसित कर मृतप्राय नदी को पुनर्जीवित किया। उन्होंने उत्तराखंड से पलायन को रोकने के लिए भी काम किया।

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विकास की कल्पना करना बेमानी 
डॉ. जोशी फिल्म में बताते हैं कि पर्यावरण का संरक्षण क्यों जरूरी है। वह कहते हैं कि लोगों को सांस की कीमत नहीं पता। प्राणवायु हमारे लिए कितना महत्वपूर्ण है। भारत की आत्मा गांवों में बसती है और जब तक गांवों का उत्थान नहीं होगा तब तक सही मायने में विकास की कल्पना करना बेमानी है। डॉ. जोशी धीरे-धीरे गांवों में हो रहे पर्यावरण के नुकसान को लेकर चिंतित है। वह कहते हैं कि देश की मिट्टी, पानी, जंगल और हवा पैदा करने वाले का संरक्षण गांवों में ही होता है लेकिन वहां भी इसका संकट खड़ा होने लगा है। पृथ्वी को बचाना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए जो पर्यावरण संरक्षण से ही संभव है।

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