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आंबेडकर का जन्मस्थान महाराष्ट्र बताकर ट्रोल हुए शिवसेना सांसद संजय राउत
Sat, 02 Nov 2019 05:35 PM IST
अमित मंडल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमित मंडल
Updated Sat, 02 Nov 2019 05:35 PM IST
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संजय राउत (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
शिवसेना के वरिष्ठ नेता, प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हो रहे हैं। राउत महाराष्ट्र में सरकार के गठन और राष्ट्रपति शासन पर पार्टी की ओर से बयान दे रहे थे। बातों ही बातें में उन्होंने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र वो जमीन है जहां बाबा साहेब आंबेडकर का जन्म हुआ था और जो संविधान सभा के अध्यक्ष थे। इस वजह से उनके रग-रग में संविधान के प्रति सम्मान भरा हुआ है।
इस बयान के बाद राउत सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे। अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर कई यूजर्स ने राउत को सामान्य ज्ञान दुरुस्त करने की नसीहत भी दी।
उल्लेखनीय है कि डॉक्टर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां भीमाबाई थीं। वो बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि थे लेकिन जातीय छुआछूत की वजह से उन्हें प्रारंभिक शिक्षा लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। स्कूल में उनका उपनाम उनके गांव के नाम के आधार पर आंबडवेकर लिखवाया गया था। स्कूल के एक टीचर को भीमराव से बड़ा लगाव था और उन्होंने उनके उपनाम आंबडवेकर को सरल करते हुए उसे आंबेडकर कर दिया।
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मुंबई की एल्फिंस्टन रोड पर स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ाई के बाद 1913 में वे अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए चले गए थे। वहां से उन्होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया था। 1916 में उन्हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया था।
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इस बयान के बाद राउत सोशल मीडिया पर ट्रोल होने लगे। अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर कई यूजर्स ने राउत को सामान्य ज्ञान दुरुस्त करने की नसीहत भी दी।
उल्लेखनीय है कि डॉक्टर डॉक्टर भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में हुआ था। उनके पिता का नाम रामजी मालोजी सकपाल और मां भीमाबाई थीं। वो बचपन से ही कुशाग्र बुद्धि थे लेकिन जातीय छुआछूत की वजह से उन्हें प्रारंभिक शिक्षा लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। स्कूल में उनका उपनाम उनके गांव के नाम के आधार पर आंबडवेकर लिखवाया गया था। स्कूल के एक टीचर को भीमराव से बड़ा लगाव था और उन्होंने उनके उपनाम आंबडवेकर को सरल करते हुए उसे आंबेडकर कर दिया।
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मुंबई की एल्फिंस्टन रोड पर स्थित सरकारी स्कूल में पढ़ाई के बाद 1913 में वे अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए चले गए थे। वहां से उन्होंने राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन किया था। 1916 में उन्हें एक शोध के लिए पीएचडी से सम्मानित किया गया था।