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Agriculture: खेती को फायदे का सौदा बनाने के लिए शिवराज ने किसानों को दिया फॉर्मूला, लैब-टू-लैंड पर दी जानकारी
Wed, 26 Mar 2025 07:21 PM IST
राहुल कुमार
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: राहुल कुमार
Updated Wed, 26 Mar 2025 07:21 PM IST
सार
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों को खेती में फायदा कामने के लिए एक छह सूत्रीय रणनीति बताई है। चौहान ने कहा, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। किसान अन्नदाता है, सब्जी दाता है, फलदाता है। किसान जीवन दाता है।
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लोकसभा में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान
- फोटो : X / @ChouhanShivraj
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विस्तार
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को राजधानी दिल्ली में एक समारोह में कहा कि,खेती को फायदे का सौदा बनाने की हमारी 6 सूत्रीय रणनीति है। पहली, प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाना। नंबर दो, उत्पादन लागत घटाना। नंबर तीन, उत्पाद का उचित मूल्य देना। नंबर चार, यदि कोई आपदा आ जाएं, तो नुकसान की भरपाई करना। नंबर पांच, कृषि का विविधीकरण और नंबर छह, धरती की सेहत का ख्याल रखना।
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केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि, उत्पादन बढ़ाने के लिए पिछले वर्ष बीजों की 109 नई किस्में जारी की है। आज हमारा फोकस है कि टेक्नालॉजी को लैब टू लैंड तक पहुंचाएं, लेकिन हमारी सीमाएं भी हैं। दूसरे देश जीएम सीड से बंपर उत्पादन करते हैं, लेकिन हम मंजूरी नहीं देते है। दूसरे देशों में उत्पादन बहुत होता है, लेकिन हमारे यहां कम है। क्योंकि हमें प्रकृति के साथ खिलवाड़ नहीं करना है। अच्छे बीज, मेकेनाइजेशन, किसान के पास लगाने के लिए पूंजी भी हो। हमने केसीसी की राशि की सीमा 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपए की है। लागत घटाने के लिए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भी है।
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राजधानी के पूसा स्थित ए.पी.शिंदे सभागार में माही नेशनल को-आपरेटिव फेडरेशन आफ FPO’s द्वारा आयोजित "Strengthening FPOs - Empowering Farmers" कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसान उसकी आत्मा। किसान अन्नदाता है, सब्जी दाता है, फलदाता है। किसान जीवन दाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों की सेवा करने का विनम्र प्रयास हम कर रहे हैं। हम सब एक विशिष्ट लक्ष्य की पूर्ति के लिए काम कर रहे हैं।
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अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री चौहान ने कहा कि, हमारे यहां छोटी जोत के आकर होते हैं। दुनियाभर में अगर देखें तो 5 से से 10 हजार एकड़ के फार्म एक किसान के पास हैं, जबकि हमारे यहां 86 प्रतिशत से ज्यादा छोटे व सीमांत किसान हैं, जिनके लिए आजीविका की गाड़ी चलाना मुश्किल होता है।
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उन्होंने बताया कि फर्टिलाइजर पर सब्सिडी पिछले साल 2 लाख 54 हजार करोड़ रुपए थी। मोदी सरकार ने तय किया है कि डीएपी की बोरी 1350 रुपए में ही मिलेगी और 266 रुपए में यूरिया की बोरी मिलेगी। एफपीओ का प्रयोग उत्पादन की लागत घटाने का ही उपक्रम है।'संघे शक्ति कलियुगे', एफपीओ का मूलमंत्र है। खाद-बीज खरीदना हो, उत्पाद बेचना, प्रोसेसिंग करना, ये अकेला किसान नहीं, किसानों का संगठन कर सकता है। देशभर में 10 हजार नए एफपीओ बन चुके हैं, जिनमें से कई बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि, किसानों को ठीक दाम मिलना भी आवश्यक है। उत्पाद के ठीक दाम देने के लिए एमएसपी की व्यवस्था की है। टमाटर, आलू, प्याज के लिए हमने योजना बनाई है। छोटे शहरों में उत्पाद सस्ता बिकता है, ऐसे में नाफेड या राज्य की एजेंसी, किसान के साथ मिलकर काम करते हुए उनके उत्पाद दूसरे शहर में आएंगे, तो ट्रांसपोर्ट का खर्च सरकार उठाएगी। सब्जियों के रेट यदि पिछले साल से 10 प्रतिशत गिर गए तो बाजार हस्तक्षेप मूल्य तय करेंगे। एवरेज प्राइज़ आईसीएआर तय करेगा। उसमें और मार्केट रेट में जितना अंतर है, उसे डीबीटी के माध्यम से किसान के खाते में डालेंगे। इसमें 50 प्रतिशत केंद्र और 50 प्रतिशत राज्य सरकार देगी।
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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्याज पर 40 प्रतिशत एक्सपोर्ट ड्यूटी थी, उसे घटाकर 20 प्रतिशत की और अब 1 अप्रैल से 0 प्रतिशत कर दी है। सोयाबीन की इम्पोर्ट ड्यूटी 0 प्रतिशत थी, उसे हमने 27.5% कर दिया, ताकि हमारे किसान को बेहतर दाम मिले। इसी तरह, बासमती चावल के निर्यात पर एक्सपोर्ट ड्यूटी हमने 0 प्रतिशत कर दी। चौहान ने कहा कि एफपीओ के लिए लाइसेंस नीति सरल व आसान हो, इस पर हम काम करेंगे। केसीसी कार्ड के बारे में भी विचार करेंगे। जहां समस्याएं है, वहां जूझेंगे। किसान-खेती बची रहे, उसके लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।