नहीं मान रहे उद्धव ठाकरे, बोले- जो शाह-फडणवीस के साथ बैठक में तय हुआ, उससे न कम चाहिए न ज्यादा
- उद्धव ठाकरे ने दी भाजपा को चेतावनी।
- शिवसेना नेता ने कहा कि हमारी सबसे पहली मांग मुख्यमंत्री पद की है।
- एनसीपी बोली हम विपक्ष में बैठेंगे
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विस्तार
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने साफ और कड़े लहजे में महाराष्ट्र में अपनी सहयोगी भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा है, "लोकसभा चुनाव में अमित शाह और देवेंद्र फडणवीस के साथ जो तय हुआ था, उससे न कम और नहीं ज्यादा चाहिए।" उससे एक कण भी अधिक मुझे नहीं चाहिए। हालांकि, शिवसेना ने उप मुख्यमंत्री पद पर अभी पत्ते नहीं खोले हैं।
महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर भाजपा और शिवसेना में फंसे पेच के बीच मातोश्री में नव निर्वाचित विधायकों की बैठक के बाद शिवसेना के प्रताप सरनाईक ने कहा कि हमारी सबसे पहली मांग मुख्यमंत्री पद की है। उपमुख्यमंत्री पद हमारे लिए बाद का विषय है। उन्होंने कहा कि चुनाव में सीट बंटवारे में किन्हीं कारणों से 50-50 फार्मूला लागू नहीं हो पाया था लेकिन सत्ता के बंटवारे में ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की बात भाजपा को हर हाल में माननी होगी।
बताया जा रहा है कि दोनों दलों के नेता दिवाली के बाद इस बारे में मिलेंगे। केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता राव साहेब दानवे ने कहा है कि भाजपा-शिवसेना ने सरकार बनाने की बात दिवाली के बाद करने का फैसला किया है। इस मुद्दे पर केवल उद्धव और अमित शाह मिलकर निर्णय लेंगे। 288 सदस्यीय महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा को 105, शिवसेना को 56, राकांपा को 54, कांग्रेस को 44 और अन्य को 29 सीटें मिली हैं।
तब भाजपा ने रखी थी 50-50 की शर्त
सत्ता में 50-50 का फॉर्मूला नया नहीं है। 1999 में भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे ने यह फॉर्मूला शिवसेना को दिया था, मगर तब शिवसेना राजी नहीं हुई थी। ऐसे में गठबंधन सरकार नहीं बन पाई थी। इस बार 50-50 की यह शर्त शिवसेना की ओर से रखी गई है और अब भाजपा इस पर सहमत नहीं दिख रही है।
'गेंद अब भाजपा के पाले में है'
वहीं, शिवसेना के लिए विकल्प खुले रखने की बात कहने वाले कांग्रेस नेता और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता विजय वाडेत्तिवार ने कहा, गेंद भाजपा के पाले में है। शिवसेना को फैसला लेना है कि क्या वह अपना पांच साल का सीएम चाहती है या ढाई साल के सीएम की मांग पर भाजपा की प्रतिक्रिया का इंतजार करेगी। अगर सेना हमें कोई प्रस्ताव देती है तो हम उस पर अपने आलाकमान के साथ बात करेंगे।
एनसीपी बोली हम विपक्ष में बैठेंगे
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उनकी पार्टी के सामने महाराष्ट्र में सरकार गठन करने का विकल्प नहीं है, लिहाजा वे जनादेश के मुताबिक विपक्ष में बैठेंगे। सरकार गठन करने के लिए शिवसेना का समर्थन करने के सवाल पर पवार ने कहा, हमारे पास ऐसा कोई विकल्प नहीं है। लोगों ने हमें विपक्ष में बैठने का आदेश दिया है। हम जनादेश को स्वीकार करते हैं।
एनसीपी प्रमुख ने शनिवार को बारामती में अपने निवास पर महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रमुख बाला साहेब थोराट से मुलाकात की। इस दौरान एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले और कर्जत जामखेड़ से विधायक बने रोहित पवार भी मौजूद रहे। वहीं, एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने साफ किया है कि वह शिवसेना के साथ जाने के बजाय विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।
30 को भाजपा विधायकों की बैठक
महाराष्ट्र में भाजपा के नव निर्वाचित विधायकों की बैठक 30 अक्तूबर को होगी प्रदेश भाजपा प्रमुख चंद्रकांत पाटिल ने शनिवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, यह बैठक 30 अक्तूबर को दोपहर एक बजे विधान भवन में होगी। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस समर्थन के लिए निर्दलीय और छोटी पार्टियाें के 15 विधायकों के संपर्क में हैं।
हरियाणा में 10 सीटों वाला उप मुख्यमंत्री, महाराष्ट्र में तो 56 सीटें!
शिवसेना में चर्चा जोरों पर है कि जब भाजपा हरियाणा में 10 सीटों वाली पार्टी को उप मुख्यमंत्री पद दे सकती है तो महाराष्ट्र में उनके पास 56 सीटें हैं। अत: भाजपा को मुख्यमंत्री पद के बंटवारे में क्या समस्या होनी चाहिए? शिवसेना मान रही है कि तकनीकी रूप से भले ही भाजपा-शिवसेना को राज्य में बहुमत मिलता नजर आ रहा है मगर विधानसभा में पार्टीवार स्थिति हरियाणा की तरह त्रिशंकु ही है। जनता ने किसी एक दल को बहुमत नहीं दिया है।
कौन बनेगा विपक्ष का नेता
भाजपा-शिवसेना की सरकार बनने पर इस बार एनसीपी के पास सदन में विपक्ष के नेता का पद रहेगा। एनसीपी के साथ गठबंधन में लड़ने वाली कांग्रेस की 44 सीटें आई हैं। ऐसे में विपक्ष के नेता के नाम पर चर्चा शुरू हो गई है। एनसीपी की तरफ से अजित पवार, धनंजय मुंडे, जितेंद्र आहवाड़, जयंत पाटिल, दिलीप वलसे और छगन भुजबल के नाम रेस में हैं मगर कुर्सी उसे ही मिलेगी, जिसे पार्टी प्रमुख शरद पवार चाहेंगे।