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शिंदे गुट ने SC से कहा: शिवसेना संकट राजनीति के दायरे में आता है, न्यायपालिका को फैसला सुनाने नहीं कहा जा सकता

Thu, 02 Mar 2023 11:00 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।
पीटीआई, नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Thu, 02 Mar 2023 11:00 PM IST
सार

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट के विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से कहा कि अदालत को अनुमानों पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए।

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Shinde faction tells SC Shiv Sena crisis falls within realm of politics, judiciary cannot asked to adjudicate
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे। - फोटो : ANI (फाइल फोटो)

विस्तार

शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे के गुट ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि जून, 2022 महाराष्ट्र राजनीतिक संकट से जुड़ी याचिकाएं राजनीति के क्षेत्र के तहत आती हैं और न्यायपालिका से इस संकट पर फैसला देने को नहीं कहा जा सकता है।

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महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उनके गुट के विधायकों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने मुख्य न्यायाधीश धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ से कहा कि अदालत को अनुमानों पर आगे नहीं बढ़ना चाहिए। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ जून 2022 में महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
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न्यायमूर्ति चन्द्रचूड़, न्यायमूर्ति एमआर शाह, न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी, न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ को साल्वे ने बताया कि इस रास्ते पर आगे बढ़ना इस अदालत के लिए बहुत जोखिम भरा होगा। उद्धव ठाकरे ने इस्तीफा दे दिया है। राज्यपाल ने मौजूदा मुख्यमंत्री से बहुमत साबित करने को कहा। ऐसा नहीं हुआ। आपको कैसे पता कि कौन किसका समर्थन करता? तब क्या होता अगर उनके गठबंधन सहयोगियों में से कोई कह देता कि हम समर्थन नहीं करना चाहते? हमें नहीं पता है।
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साल्वे ने बेंच से कहा कि हम हम वकीलों के लिए यह तय करने का मुद्दा नहीं है। यह राजनीति के दायरे में आता है। ऐसे में माननीय से इन अनुमानों का खतरा मोल लेने के लिए कैसे अनुरोध किया जा सकता है। यह दलील देते हुए कि शीर्ष अदालत में दायर सभी याचिकाओं में लिखी बातें सिर्फ ‘अकादमिक’ हैं, साल्वे ने कहा कि ठाकरे ने कभी बहुमत साबित नहीं किया।

साल्वे ने कहा कि देखें, जब शिंदे विधानसभा में बहुमत साबित करने आए तो क्या हुआ। ठाकरे के कट्टर समर्थक 13 लोग मतदान से अनुपस्थित थे। राजनीति में ऐसी चीजें होती हैं। बेहद तेजी से बदलते ये राजनीतिक परिदृश्य हर मोड़ पर अपना रूख बदल लेते हैं। हम इनका अनुमान नहीं लगा सकते हैं।

यह स्वीकार करते हुए कि 10वीं अनुसूची पूरी तरह से त्रुटिमुक्त नहीं है, उसमें कई खामियां हैं जिन्हें दूर करने की आवश्यकता है, साल्वे ने कहा कि वर्तमान मामले में सबकुछ सिर्फ ‘अकादमिक’ है और अदालतों को एक हद से आगे नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीति के अपराधीकरण, चुनावी फंडिंग, चुनाव में खर्च आदि की समस्या है। समस्याएं हैं लेकिन हम एक हद से आगे नहीं बढ़ सकते हैं।


शिंदे गुट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने भी तर्क दिया कि विधायक दल और मूल राजनीतिक दल के बीच एक कृत्रिम अंतर पैदा करने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार बहुमत खो चुकी है और एक धड़ा आकर कहता है कि हमारे पास बहुमत है तो राज्यपाल ने शिंदे गुट को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने के लिए बुलाकर क्या गलती की है? मामले में सुनवाई अधूरी रही और 14 मार्च को होली की छुट्टी के बाद फिर से शुरू होगी।

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