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WEF: बोर्ड ऑफ पीस के मंच पर ट्रंप-शहबाज की फुसफुसाहट, ग्रीनलैंड विवाद के बाद नाटो प्रमुख भी इस तरह आए नजर

Thu, 22 Jan 2026 08:14 PM IST
हिमांशु चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्न
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बर्न Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 22 Jan 2026 08:14 PM IST
सार

दावोस में बोर्ड ऑफ पीस की साइनिंग के दौरान ट्रंप और शहबाज शरीफ की कानाफूसी चर्चा का विषय बनी। शहबाज मंच पर थे, जबकि सेना प्रमुख मुनीर ऑडिएंस में बैठे दिखे। दोनों नेताओं ने ऑडिएंस की ओर उंगली भी दिखाई। आइए, इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं।

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shehbaz sharif nato chief Mark Rutte Trump Whisperer after Greenland diplomacy with donald Trump
डोनाल्ड ट्रंप, शहबाज शरीफ - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

बोर्ड ऑफ पीस की साइनिंग सेरेमनी में एक अजीबो-गरीब स्थिति देखने को मिली। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच मंच पर कानाफूसी होती दिखी। कार्यक्रम के दौरान शहबाज शरीफ मंच पर मौजूद थे, जबकि पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर ऑडिएंस में बैठे नजर आए।

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सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान आर्थिक बदहाली के बावजूद ट्रंप के बनाए बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हुआ है। इस बोर्ड का मकसद गाजा के पुनर्निर्माण को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है। बोर्ड की सदस्यता के लिए एक अरब डॉलर की प्रतिबद्धता की बात भी सामने आई है। साइनिंग सेरेमनी के दौरान शहबाज शरीफ मंच पर अकेले दिखाई दिए, जबकि यह जगजाहिर है कि पाकिस्तान में असली सत्ता सेना प्रमुख के हाथ में मानी जाती है।
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कानाफूसी और इशारे
जैसे ही शहबाज शरीफ मंच पर पहुंचे, वे कुछ असहज और नर्वस नजर आए। उन्होंने ट्रंप के कान में कुछ कहा। इसके बाद ट्रंप ने भी उनसे कुछ सवाल किया। इसके तुरंत बाद दोनों ने ऑडिएंस की ओर उंगली दिखाकर मुस्कुराना शुरू कर दिया। कैमरे में साफ नहीं दिखा, लेकिन संकेत साफ थे कि दोनों ऑडिएंस में बैठे मुनीर की ओर इशारा कर रहे थे। यह दृश्य पाकिस्तान की आंतरिक सत्ता खींचतान की झलक देता नजर आया।
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नाटो प्रमुख की भूमिका
इसी दावोस मंच पर नाटो के महासचिव मार्क रूटे की कूटनीतिक भूमिका भी चर्चा में रही। ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच बने तनाव को कम करने में रूटे को अहम भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है। ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर रूटे के साथ भविष्य के समझौते का ढांचा तय होने की बात कही। इसके बाद रूटे को ट्रंप व्हिस्परर कहा जाने लगा है।

इशारों में राजनीति
दावोस की इस पूरी घटना ने साफ कर दिया कि बोर्ड ऑफ पीस सिर्फ शांति का मंच नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का नया अखाड़ा भी बन रहा है। शहबाज शरीफ का मंच पर होना और मुनीर का नीचे बैठना पाकिस्तान की मजबूरी और सत्ता संतुलन दोनों को उजागर करता है। वहीं ट्रंप की बॉडी लैंग्वेज और रूटे की कूटनीति यह संकेत देती है कि आने वाले समय में वैश्विक फैसले सिर्फ मंच से नहीं, बल्कि इशारों और कानाफूसी में भी तय होंगे।

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