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एससीओ मिलिट्री मेडिसिन सम्मेलन में पहले दिन शामिल नहीं हुआ पाकिस्तान, आज भेजेगा प्रतिनिधि
Fri, 13 Sep 2019 04:00 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Fri, 13 Sep 2019 04:00 AM IST
सार
- एससीओ के तहत दो दिवसीय मिलिट्री मेडिसिन कांफ्रेंस का भारतीय रक्षा मंत्रालय ने किया आयोजन
- एससीओ रक्षा सहयोग योजना 2019-20 के तहत भारत की मेजबानी में पहला सैन्य सहयोग कार्यक्रम
- आमंत्रण के बावजूद पहले दिन शामिल नहीं हुआ पाकिस्तान
- सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान सम्मेलन के दूसरे दिन हो सकता है शामिल
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एससीओ मीटिंग में खाली पड़ी पाकिस्तान की बेंच
- फोटो : ANI
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विस्तार
सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में उत्कृष्ट पद्धतियों को साझा करने और क्षमताओं के निर्माण के लिए शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के तहत दो दिवसीय मिलिट्री मेडिसिन कांफ्रेंस का गुरुवार को शुभारंभ किया गया। एससीओ रक्षा सहयोग योजना 2019-20 के तहत भारत की मेजबानी में यह पहला सैन्य सहयोग कार्यक्रम हो रहा है।
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दिल्ली में मानेकशॉ सेंटर में हो रहे सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन पहले दिन पाकिस्तान नहीं पहुंचा। सम्मेलन में 27 अंतरराष्ट्रीय और 40 भारतीय प्रतिनिधि शामिल हुए, लेकिन पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की कुर्सियां खाली रही। गुरुवार को सम्मेलन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ मौजूद रहे।
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राजनयिक सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान शुक्रवार को सम्मेलन के दूसरे दिन इसमें शामिल हो सकता है। पाकिस्तान ने अपने दो प्रतिनिधियों को शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सैन्य चिकित्सा सम्मेलन में भेजने का फैसला किया है। पाकिस्तान उच्चायोग में एअर अताशे अब्दुल आदिल एक अन्य अधिकारी के साथ बैठक में शामिल हो सकते हैं।
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गुरुवार को सम्मेलन में उद्घाटन सत्र को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, मौजूदा समय में वास्तविक खतरा जैव आतंकवाद है। उन्होंने एससीओ देशों के सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं (एएफएमएस) से आग्रह किया कि युद्ध क्षेत्र में सैनिकों के लिए उत्पन्न होने वाली नई चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने के रास्ते तलाशें।
उन्होंने कहा कि एससीओ, क्षेत्र में सुरक्षा का प्राथमिक स्तंभ है। सिंह ने जैव आतंकवाद को संक्रामक रोग बताया और इस खतरे से निपटने के लिए ताकत बढ़ाने के महत्व को रेखांकित किया। सिंह ने कहा कि इस खतरे से निपटने के लिए सशस्त्र बलों और इसकी चिकित्सा सेवाओं को आगे रहना होगा। उन्होंने कहा कि युद्ध की नई और गैर परंपरागत चुनौतियों ने वर्तमान चुनौतियों की जटिलता को बढ़ा दिया है।
भारत और पाकिस्तान जून 2017 में एससीओ के पूर्णकालिक सदस्य बने थे। इनके अलावा चीन, किर्गिस्तान, कजाकिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान एससीओ के सदस्य हैं।