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शाइस्ता वैज़: अफ़गान शरणार्थी कैंप से लेकर पायलट बनने तक की कहानी
बीबीसी हिन्दी
Updated Tue, 11 Jul 2017 11:46 AM IST
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शाइस्ता वैज़
- फोटो : GETTY IMAGES
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अफ़गान शरणार्थी शिविर में पैदा हुई एक लड़की ख़ुद विमान उड़ाकर पूरी दुनिया का सफ़र कर रही है। और महिलाओं को यह संदेश दे रही है। कि उन्हें अपने सपनों को जीना चाहिए। 29 साल की शाइस्ता वैज़ अफ़गानिस्तान की पहली प्रमाणित महिला पायलट हैं और अब विमान उड़ाकर पूरी दुनिया का अकेले चक्कर लगाने वाली सबसे युवा महिला बनना चाहती हैं। शाइस्ता ने अपने सफ़र की शुरुआत अमरीका से की थी. वो एक छोटे सिंगल इंजन वाले प्लेन में अपना सफ़र कर रही हैं और फिलहाल अफ़गानिस्तान के काबुल शहर में हैं।
काबुल में स्थानीय मीडिया से बात करते हुए शाइस्ता ने कहा कि उन्हें उस शहर में आकर बहुत अच्छा लग रहा है, जहां उनका जन्म हुआ था। उन्होंने कहा, "क़रीब 29 साल हो चुके हैं मुझे अपने परिवार के साथ देश छोड़े. और अब एक पायलट के तौर पर यहां आना, महिलाओं को प्रेरित करना, यह सब देखकर मुझे गर्व हो रहा है"।
साल 1987 में अफ़गान-सोवियत युद्ध के दौरान शाइस्ता वैज़ का परिवार अफ़गानिस्तान छोड़कर अमरीका चला गया था। उसी दौरान शाइस्ता का जन्म एक शरणार्थी कैंप में हुआ था. उनके परिवार में मां-पिता के अलावा पांच बहने भी हैं।
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काबुल में स्थानीय मीडिया से बात करते हुए शाइस्ता ने कहा कि उन्हें उस शहर में आकर बहुत अच्छा लग रहा है, जहां उनका जन्म हुआ था। उन्होंने कहा, "क़रीब 29 साल हो चुके हैं मुझे अपने परिवार के साथ देश छोड़े. और अब एक पायलट के तौर पर यहां आना, महिलाओं को प्रेरित करना, यह सब देखकर मुझे गर्व हो रहा है"।
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साल 1987 में अफ़गान-सोवियत युद्ध के दौरान शाइस्ता वैज़ का परिवार अफ़गानिस्तान छोड़कर अमरीका चला गया था। उसी दौरान शाइस्ता का जन्म एक शरणार्थी कैंप में हुआ था. उनके परिवार में मां-पिता के अलावा पांच बहने भी हैं।
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शाइस्ता वैज़
- फोटो : GETTY IMAGES
शाइस्ता का जन्म एक शरणार्थी कैंप में हुआ था. अब वो कैलिफॉर्निया में रहती हैं। कैलिफॉर्निया से सटे पिछड़े इलाके रिचमंड में शाइस्ता की परवरिश हुई। शाइस्ता के मुताबिक़ कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उन्हें पायलट बनने के अपने शौक के बारे में पता लगा शाइस्ता कहती हैं कि अपने प्लेन को ख़ुद उड़ाना एक गज़ब का अनुभव होता है।
यह मुझे अविश्वसनीय लग रहा है. बढ़िया बात तो यह है कि अपने प्लेन को आप जहां चाहें मोड़ सकते हैं, ले जा सकते हैं। हाल ही में शाइस्ता ने एक ग़ैर-लाभकारी संगठन की स्थापना की है. इसका नाम है ड्रीम्स सॉर।
इसके ज़रिए शाइस्ता दुनिया भर में विमान यात्रा करते हुए लड़कियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। मैं चाहती हूं कि अफ़गानिस्तान की महिलाएं भी ऐसे अनुभव कर पाएं।
यह मुझे अविश्वसनीय लग रहा है. बढ़िया बात तो यह है कि अपने प्लेन को आप जहां चाहें मोड़ सकते हैं, ले जा सकते हैं। हाल ही में शाइस्ता ने एक ग़ैर-लाभकारी संगठन की स्थापना की है. इसका नाम है ड्रीम्स सॉर।
इसके ज़रिए शाइस्ता दुनिया भर में विमान यात्रा करते हुए लड़कियों को विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित जैसे विषयों को पढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं। मैं चाहती हूं कि अफ़गानिस्तान की महिलाएं भी ऐसे अनुभव कर पाएं।
शाइस्ता वैज़
- फोटो : GETTY IMAGES
शाइस्ता वैज़ अपने परिवार में पहली महिला हैं जिसने बैचलर्स और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। वो कहती हैं कि सपने बड़े हों, तो उन्हें पूरा होने से कोई नहीं रोक सकता। शाइस्ता ने 13 मई को फ़्लोरिडा से अपनी यात्रा शुरू की थी और अब तक वो 19 देशों में जा चुकी हैं।
अफ़गानिस्तान के बाद वो एशिया के कई देशों और ऑस्ट्रेलिया से होते हुए वापस अमरीका जाएंगी। शाइस्ता ने कहा है कि वो अफ़गानिस्तान शिफ़्ट होने का प्लान बना रही हैं। अपने प्लान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो अफ़गानिस्तान में एक फ़्लाइट स्कूल खोलना चाहती हैं और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करना चाहती हैं।
अफ़गानिस्तान के बाद वो एशिया के कई देशों और ऑस्ट्रेलिया से होते हुए वापस अमरीका जाएंगी। शाइस्ता ने कहा है कि वो अफ़गानिस्तान शिफ़्ट होने का प्लान बना रही हैं। अपने प्लान के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो अफ़गानिस्तान में एक फ़्लाइट स्कूल खोलना चाहती हैं और महिलाओं के अधिकारों के लिए काम करना चाहती हैं।