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कोरोना से जंगः एक लाख की जांच रोज होगी, कई राज्यों को मिलेंगी मशीनें

Tue, 28 Apr 2020 05:14 AM IST
संजीव कुमार झा परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 28 Apr 2020 05:14 AM IST
सार

  • यूपी, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में आएंगी मशीनें
  • अभी देश की केवल 29 लैब में मौजूद है स्वचालित आरएनए मशीन

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Several lakhs will be tested daily, many states will get machines
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने कोरोना से जंग को अब तेज कर दिया है। साथ ही रैपिड जांच से अपना फोकस अब आरटी-पीसीआर जांच पर कर दिया है। आने वाले दिनों में अमेरिका की मदद से भारत में हर दिन एक लाख कोरोना जांच संभव हो सकेगी। इसके लिए यूपी, बिहार, दिल्ली, महाराष्ट्र, गुजरात सहित कई राज्यों में स्वचालित आरएनए मशीनें खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। अभी देश की 29 लैब में यह मशीन है जहां हर दिन सबसे ज्यादा जांच हो रही है।

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भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन के जरिए यह सलाह दी है कि जांच को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक मशीनों की सख्त जरूरत है। अभी भारत की 280 सरकारी और 90 प्राइवेट लैब में कोरोना वायरस की जांच चल रही है।
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आईसीएमआर के अनुसार रैपिड जांच किट्स में समस्या मिलने के बाद अब सरकार का फोकस सीधे तौर पर आरटी-पीसीआर जांच पर है। यह जांच ही एकमात्र ऐसा विकल्प है जिसमें मरीज के पॉजिटिव होने अथवा नहीं होने की सटीक जानकारी मिल सकती है। इस जांच में कई तरह की मशीनें सहायक हैं जो इस वक्त भारत में मौजूद हैं। अमेरिका, कोरिया और जापान से मशीनें खरीदने के अलावा इनका भी प्रयोग किया जा सकता है।
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  • शिकागो की कंपनियों को मिला है ऑर्डर

जांच के लिए स्वचालित आरएनए निष्कर्षण मशीन की जरूरत को देखते हुए शिकागो की कुछ कंपनियों से करार किया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बिहार सहित कुछ राज्यों से मशीनों के ऑर्डर भी दिए जा चुके हैं। उन्हें पूरी उम्मीद है कि मई के पहले या दूसरे सप्ताह में इन मशीनों का भारत में इस्तेमाल शुरू हो जाएगा। केंद्र ने कोरोना से जंग के लिए राज्यों को 17 हजार करोड़ रुपये का बजट दिया है।
 

  • तो इसलिए जरूरी है आरएनए 

एम्स के एक वरिष्ठ डॉक्टर के अनुसार आरएनए जीन से जुड़ी जांच है। जांच के लिए गले और नाक से सैंपल लिया जाता है । सैंपल से आरएनए निकालने के लिए लैब में 2 से 3 घंटे लगते हैं। इसे आरटी-पीसीआर जांच भी कहते हैं। हर सैंपल में एक किट का इस्तेमाल होता है । अभी यह पूरी प्रक्रिया मानवीय (मैनुअल) है लेकिन स्वचालित आरएनए निष्कर्षण मशीन से कम स्टाफ में भी ज्यादा से ज्यादा नमूनों की जांच संभव हो सकेगी। एम्स की लैब में यह मशीन मौजूद है।

  • 61 लैब का प्रस्ताव खारिज

राज्यों से मिली सबसे बेहतर लैब की सूची में से 61 मानकों पर खरी नहीं उतरींं। इनमें 20 सरकारी और 41 निजी लैब हैं। लेकिन राज्याें से अब तक संशोधित प्रस्ताव नहीं मिले हैं। आईसीएमआर से मंजूरी के बाद ही लैब में जांच शुरू हो सकती है। आंध्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, मेघालय, पश्चिम बंगाल की एक-एक और महाराष्ट्र 18, हरियाणा में तीन, दिल्ली व बिहार में दो-दो सरकारी लैब मानकों पर खरी नहीं उतरी हैं। प्राइवेट लैब के प्रस्ताव एनएबीएल सर्टिफिकेट न होने के कारण रद्द किए हैं।

  • फिलहाल रोज हो रहीं 20-25 हजार जाचें...

आईसीएमआर के अनुसार भारत में इस समय प्रतिदिन 20 से 25 हजार सैंपल की जांच चल रही है। यह स्थिति तब है जब देश में 24 घंटे तीन शिफ्ट में सैंपल की जांच चल रही है। अत्याधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से प्रतिदिन भारत में 1 से 1.20 लाख सैंपल की जांच हो सकती है।



 

यह है मास्टर प्लान
 

  • भी देश में 42 क्यूआरटी-पीसीआर मशीनें मल्टीडिस्प्लेनरी यूनिट्स में मौजूद हैं। यह मशीनें मिलकर देश में हर दिन 10 हजार सैंपल्स की जांच कर सकती हैं।
  • नोएडा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बॉयोलॉजिकल्स और भुवनेश्वर स्थित क्षेत्रीय चिकित्सीय अनुसंधान केंद्र में दो स्वचालित मशीन रोज 3 हजार नमूनों की जांच कर सकती हैं। ऐसी मशीनें और बढ़ाई जा सकती हैं।
  • नाको के तहत एचआईवी जांच करने वाली स्वचालित दो तिहाई मशीनें आईसीएमआर में मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
  • 36 में से 114 जिलों में एनएएटी आधारित मशीनें हैं जो हर दिन 15 हजार तक नमूनों की जांच कर सकती हैं। टीबी की जांच करने वाली पीओसी एनएएटी मशीनें देश के 725 जिलों में से 100 बीएसएल-2 लैब में मौजूद हैं।

 

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